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चीन के बाहर भी फैला कोल्ड निमोनिया, इस देश में महामारी बनने की आशंका

चीन के बाहर भी फैला कोल्ड निमोनिया, इस देश में महामारी बनने की आशंका

डेनमार्क और नीदरलैंड जैसे देशों में बच्चों में निमोनिया होने की रिपोर्ट दी गयी है।

Written by Sadhna Tiwari |Published : November 30, 2023 9:14 PM IST

Pneumonia Outbreak: चीन  के बाद अब कुछ अन्य देशों में भी निमोनिया के मामले सामने आए हैं। इनमें डेनमार्क और नीदरलैंड जैसे देशों का नाम शामिल है जहां बच्चों में निमोनिया होने की रिपोर्ट दी गयी है। न्यूज ब्लॉग एवियन फ़्लू डायरी की एक पोस्ट से पता चला है कि माइकोप्लाज्मा निमोनिया संक्रमण महामारी के लेवल तक पहुंच गया है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि, संक्रमण के मामले गर्मियों में शुरू हुए थे और बीते 5 सप्ताह में इनमें बहुत तेजी देखी गयी है। वहीं, डेनमार्क के स्टेटेंस सीरम इंस्टीट्यूट की तरफ से बयान दिया गया है कि, "यह निमोनिया मरीजों की संख्या इतनी अधिक है कि इसे एक महामारी कहा जा सकता है।"

स्टेटेंस सीरम इंस्टीट्यूट की वरिष्ठ शोधकर्ता हेने-डोर्थे एम्बॉर्ग ने कहा कि, "काफी अधिक मामले सामने आ  रहे हैं, और पूरे देश में संक्रमण का असर देखा जा रहा है।"

डेनमार्क में मिल सकते हैं और भी मरीज

मिली जानकारी के अनुसार, इस सप्ताह  माइकोप्लाज्मा निमोनिया संक्रमण के 541 नए मामले सामने आए। एक्सपर्ट के अनुसार, मामलों की वास्तविक संख्या संभवतः इससे बहुत अधिक है, क्योंकि फिलहाल उन लोगों की टेस्टिंग नहीं की जा रही जिनमें हल्के लक्षण दिखायी दे रहे हैं।

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इस बीमारी में अक्सर हल्के फ्लू जैसे लक्षण दिखायी देते हैं। जैसे- थकान, सिरदर्द, गले में खराश और लंबे समय तक सूखी खांसी, जो रात में बढ़ जाती है।

पोस्ट में यह भी कहा गया है कि इस बीमारी को 'कोल्ड निमोनिया' या 'एटिपिकल निमोनिया' नाम दिया गया है, क्योंकि साधारण पेनिसिलिन का असर संक्रमित लोगों में नहीं दिखायी दे रहा।

नीदरलैंड में भी बढ़े निमोनिया के मामले

वहीं, फ़्लूट्रैकर्स पर छपी एक सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, बीते सप्ताह नीदरलैंड में बच्चों और युवाओं में निमोनिया के मामलों में बहुत अधिक बढ़ोतरी दर्ज की गयी।

नीदरलैंड इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ सर्विसेज रिसर्च (NIVEL) के मुताबिक, बीते सप्ताह 5 से 14 वर्ष की आयु के प्रत्येक एक लाख बच्चों में से 103 को निमोनिया का सामना करना पड़ा।

इस बीच लैंसेट की एक नई रिपोर्ट में कहा गया है कि अप्रैल 2023 के बाद से सिंगापुर और स्वीडन सहित अन्य कई देशों में माइकोप्लाज्मा निमोनिया के केसेस फिर से बढ़े हैं।