सुरक्षित है कोरोनावायरस का प्लाज्मा थेरेपी से इलाज, साइड इफेक्ट होने का खतरा भी है कम

अमेरिका में ह्यूस्टन मेथोडिस्ट अस्पताल के शोधकर्ताओं ने 28 मार्च को, कोविड -19 मरीजों पर प्लाज्मा थेरेपी से ट्रांसफ्यूज करने के लिए क्लिनिकल ट्रायल शुरू किया था। यह अध्ययन द अमेरिकन जर्नल ऑफ पैथोलॉजी में प्रकाशित किया गया है।

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Written By: Kishori Mishra | Updated : June 4, 2020 1:15 PM IST

Plasma Therapy and Coronavirus : कोरोनावायरस से बचने के लिए वैज्ञानिक तरह-तरह के रिसर्च कर रहे हैं। इसी बीच प्लाज्मा थेरेपी को लेकर अध्ययन किया गया है। यह थेरेपी कोरोनावायरस के इलाज का एक बेहतर विकल्प (Plasma Therapy and Coronavirus) माना जा रहा है। हाल ही में हुए अध्ययन में इस बात का खुलासा हुआ है कि प्लाज्मा थेरेपी से कोरोनावायरस (Plasma Therapy and Coronavirus) को हराया जा सकता है। इतना ही नहीं, इस थेरेपी से किसी तरह का साइड इफेक्ट होने का खतरा भी नहीं है।

अमेरिका में ह्यूस्टन मेथोडिस्ट अस्पताल के शोधकर्ताओं ने 28 मार्च को, कोविड -19 मरीजों पर प्लाज्मा थेरेपी से ट्रांसफ्यूज करने के लिए क्लिनिकल ट्रायल शुरू किया था। यह अध्ययन द अमेरिकन जर्नल ऑफ पैथोलॉजी में प्रकाशित किया गया है। इस परीक्षण में 25 मरीजों को शामिल किया गया था, जिसमें से 19 मरीज स्वस्थ हो गए और इन्हें अस्पताल से 11 दिन के अंदर छुट्टी दे दी गई। हालांकि इस बारे में रिसर्चर्स का कहना है प्लाज्मा थेरेपी को फुल प्रूफ बनाने के लिए इस पर बड़े पैमाने से परीक्षण करना होगा।

कई बार हो चुका है प्लाज्मा थेरेपी का इस्तेमाल

ह्यूस्टन मेथोडिस्ट हॉस्पीटल के जेम्स मूसर ने कहा, "दुनिया भर के चिकित्सक कोविड-19 वायरस के खिलाफ नई दवाओं और उपचारों का परीक्षण करने में लगे हैं। इस बीच प्लाज्मा थेरेपी बेहतर विकल्प में हमारे सामने आई है।"  वैज्ञानिकों ने प्लाज्मा थेरेपी के (Plasma Therapy and Coronavirus) बारे में बताया कि यह बहुत ही पुरानी थेरेपी है। इस थेरेपी का इस्तेमाल सदियों से हो रहा है। 1918 की शुरुआत में स्पैनिश फ्लू से लड़ने के लिए भी प्लाज्मा थेरेपी का इस्तेमाल किया गया था। हाल ही में शोधकर्ताओं ने कहा कि 2003 में SARS महामारी, 2009 में इन्फ्लूएंजा H1N1 महामारी, और अफ्रीका में 2015  में इबोला के प्रकोप को कम करने के लिए प्लाज्मा थेरेपी का इस्तेमाल किया गया था।

प्लाज्मा थेरेपी कैसे करती है काम?

कोरोनावायरस (Coronavirus) जैसे संक्रमण को जब कोई व्यक्ति हराने में कामयाब हो जाता है या फिर ऐसा व्यक्ति जो वायरस से संक्रमित होने के बाद स्वस्थ हो जाता है, तो ऐसे में वह व्यक्ति एंटीबाडीज बन जाता है। ऐसी स्थिति में उस व्यक्ति की  इम्युनिटी कुछ या फिर कभी-कभी अधिक समय के लिए मजबूत हो जाती है। ऐसे व्यक्ति की बॉर्डी में इम्युनिटी सेल्स से प्रोटीन उत्सर्जित होता है, जो उसके शरीर के प्लाज्मा में पाया जाता है। प्लाज्मा ब्लड का थक्का बनाने में मदद करता हैं। इसे लेकर विशेषज्ञों का कहना है कि प्लाज्मा थेरेपी (Plasma Therapy ) से एक साथ कई मरीजों का इलाज आसानी से किया जा सकता है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इस थेरेपी से ऐसे मरीजों का इलाज तत्काल किया जाएगा, जिन्हें सबसे ज्यादा खतरा रहता है।

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