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संधिवात गठिया (Gouty arthritis in hindi) रोग के लिए आयुर्वेदिक उपचार का असर की जांच के लिए मल्टीसेंटर फेज-3 परीक्षण भारत में शुरू होगा। बिजनेस स्टैंडर्ड की वेबसाइट से मिली जानकारी के अनुसार यह संधिवात गठिया के लिए किया जाने वाला दुनिया का पहला फेज-3 मल्टीसेंटर परीक्षण होगा, जिसे आने वाली मई से शुरू किया जाएगा। यह परीक्षण कोयंबत्तूर, बेंगलुरू व मुंबई में किया जाएगा इंटरनेशनल काउंसिल फॉर हॉरमॉनिजेशन ऑफ टेक्निकल फार्मास्यूटिकल्स फॉर ह्यूमन यूज - गुड क्लिनिकल प्रैक्टिस (ICH-GCP) के दिशानिर्देशों के अनुसार आयोजित किया जाएगा। आयुष मंत्रालय के एक बयान के अनुसार इस क्लिनिकल परीक्षण पर लॉस एंजलस स्थित यूनिवर्सिटी और कैलिफोर्निया के रूमेटोलॉजिस्ट डेनियल एरिक फुर्स्ट बारीकी से नजर रखेंगे। आगे आयुष मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि यह प्रोजेक्ट संधिवात गठिया के उपचार में आयुर्वेद की कारगरता पर पहले मल्टीसेंटर फेज-3 वाले डबल ब्लाइंड डबल क्लिनिकल परीक्षणों में से एक है। इसे भारत सरकार की एजेंसी केंद्रीय आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (CCRAS) और वैद्य फार्मेसी लिमिटेड (कोयंबत्तूर) से एफिलिएटेड रिसर्च इंस्टीट्यूट एवीपी रिसर्च फाउंडेशन द्वारा मिलकर चलाया जाएगा।
First of its kind phase 3 clinical trial in Ayurveda for Rheumatoid Arthritis
Monitored by renowned rheumatologist Dr. Edzard Ernst, Will take Ayurveda research in Rheumatology to a global stage Read details: https://t.co/rxskV3mNf0 — PIB India (@PIB_India) March 23, 2022
एवीपी रिसर्च फाउंडेशन के डायरेक्टर और इस शोध के सह शोधकर्ता यह डबल ब्लाइंड डबल डमी आकस्मिक क्लिनिकल परीक्षण एएमआरए संधिवात में आयुर्वेद अनुसंधान को वैश्विक स्तर पर ले जाएगा। इस प्रोजेक्ट पर आयुष मंत्रालय ने यह दावा किया है कि आर्थराइटिस एसोसिएशन ऑफ साउथ कैलिफोर्निया (AASC) में क्लिनिकल रिसर्च के डायरेक्टर रूमेटोलॉजिस्ट एडजार्ड अर्नस्ट ने इस शोध का समर्थन किया है। आगे आयुष मंत्रालय ने अपने बयान में यह बताता कि वे डॉक्टर एडजार्ड अर्नस्ट ने ही इस शोध की रूपरेखा तैयार की है और वे आगे भी इसपर अपनी नजर बनाए रखेंगे।
आयुष मंत्रालय के अनुसार डॉक्टर डेनियल एरिक ने क्लिनिकल रिसर्च के मानकों का पालन कर रहे रिसर्च के ऑपरेशन सेंटर के सभी रिसर्चरों को प्रशिक्षण देना शुरू कर दिया है। आयुष का मानना है कि इस तरह अध्ययन को मई 2022 में शुरू कर दिया जाएगा और अगले दो सालों में इसके पूरा होने के अनुमान हैं।
संधिवात गठिया को गाउट (Gout) के रूप में भी जाना जाता है, यह अत्यंत दर्दनाक और गंभीर रोग है। गाउट का कोई स्थायी इलाज नहीं है और दवाओं व अन्य ट्रीटमेंट थेरेपी की मदद से इसके लक्षणों को नियंत्रित रखा जा सकता है। ऐसे में आयुर्वेद और एलोपैथी में एक साथ की जाने वाली इस रिसर्च से अगर अच्छे परिणाम मिलते हैं, तो स्थिति की गंभीरता को कम करने में काफी मदद मिल सकती है।