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व्रत या उपवास हर एक की निजी इच्छा और पारिवारिक मान्यता है। © Shutterstock.
महिलाओं के बीच करवा चौथ के व्रत को लेकर खासी मान्यता है। विवाहित स्त्रियों के लिए यह व्रत बहुत खास माना जाता है। पर कई बार ऐसी स्थिति आ जाती है कि आपको लगने लगता है कि यह व्रत करें या न करें। व्रत या उपवास हर एक की निजी इच्छा और पारिवारिक मान्यता है। पर सेहत पर भी इसका असर होता है। इसलिए अगर आप सेहत से जुड़ी किसी खास स्थिति में हैं तो करवा चौथ के व्रत के दौरान इन बातों का जरूर ध्यान रखें।
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पीरियड्स के दौरान
धार्मिक मान्यताओं से अलग पीरियड के दौरान शरीर में कुछ खास बदलाव होते हैं। जिनके चलते एनर्जी लेवल डाउन हो जाता है। जब आप व्रत करते हैं तब एनर्जी के लिए शरीर में जमा हुआ शर्करा या शुगर बर्न होता है। असल में ये संचय ज्यादा देर तक नहीं चल पाता क्योंकि लीवर में 100 ग्राम ग्लूकोज ग्लाइकोजेन के रूप में स्टोर रहता है जो कुछ ही घंटों में खत्म हो जाता है। उसके बाद शरीर एमिनो एसिड से ग्लूकोज बनाने के लिए मांसपेशियों के ऊतक या टिशू का इस्तेमाल करने लगता है। लेकिन ये प्रक्रिया भी जल्दी खत्म होने लगती है क्योंकि शरीर के नियमानुसार ये गलत होता है।
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पीरियड्स के दौरान व्रत करना है तो व्रत शुरू होने से पहले पर्याप्त मात्रा में पानी पियें। क्योंकि पूरे दिन हाइड्रेट यानि शरीर में जल की मात्रा संतुलित रहने से आपको पीरियड्स के दौरान पेट में दर्द नहीं होगा। सुबह सरगी में सेब और नट्स जरूर खाएं। इससे पेट में गैर की समस्या नहीं बनेगी और आप में एनर्जी भी बनी रहेगी।
अगर आप व्रत कर ही रहे हैं, तो कुछ सावधानियां रखना बेहद जरूरी है।© Shutterstock.
गर्भावस्था के दौरान
गर्भावस्था में व्रत करना महिलाओं और गर्भस्थ शिशु दोनों की सेहत के लिए सही नहीं है, लेकिन अगर आप व्रत कर ही रहे हैं, तो कुछ सावधानियां रखना बेहद जरूरी है। व्रत शुरु करने से पहले थोड़ा भारी खाना खाएं ताकि वह धीरे-धीरे पचे और शरीर को लंबे समय तक ऊर्जा देता रहे। व्रत के पहले और व्रत के दौरान भी तरल पदार्थों का भरपूर सेवन करते रहें ताकि शरीर में पानी की कमी या डिहाइड्रेशन न हो।
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गर्भावस्था के शुरुआती दौर में हैं तो सावधानीपूर्वक उपवास कर सकते हैं, लेकिन अंतिम तीन माह में व्रत करना खतरनाक हो सकता है। व्रत के दौरान फल, तरल पदार्थ और पौष्टिक आहार कुछ घंटों के अंतराल में लेते रहें, ताकि कमजोरी और थकान महसूस न हो। अचानक तेज चक्कर आने, अधिक उल्टी होने या गर्भस्थ शिशु की हलचल अचानक बढ़ने पर बिना देर किए अपने डॉक्टर के पास जाकर जांच कराएं। यह भी पढ़ें – गर्भावस्था में उलटी और मतली से हैं परेशान, तो अपनाएं ये घरेलू उपाय
ब्रेस्टफीडिंग के दौरान
शोधकर्ताओं ने व्रत रखने पर स्तनपान करवाने वाली मांओं और व्रत न रखने वाली व स्तनपान करवाने वाली मांओं के स्वास्थ्य की तुलना की है। दोनों तरह की मांओं के खून में लगभग समान रासायनिक संतुलन पाया गया। इससे पता चलता है कि दोनों के ही शरीर समान तरीके से काम कर रहे थे। हां ये जरूर है कि स्तनपान के दौरान प्यास बहुत लगती है। इसे नजरंदाज न करें। व्रत रखना ही है तो निर्जला न रखें। बीच-बीच में कुछ लिक्विड लेते रहें। वैसे में धार्मिक ग्रंथों में स्तनपान करवाना बहुत सात्विक माना गया है, ऐसे में आप अगर व्रत में कुछ छूट भी लेना चाहें तो ले सकती हैं। यह भी पढ़ें –बेबी के लिए क्या है बेहतर ब्रेस्टफीडिंग या फार्मूला फीड ?
अत्यधिक प्यास लगने, गहरे रंग वाला पेशाब आने, चक्कर महसूस होने या थकान होने पर आप ओआरएस का घोल भी ले सकती हैं। यह भी पढ़ें – जानें पुरुषों के लिए कितना फायदेमंद है टमाटर और अन्य चीजों में पाया जाने वाला लाइकोपीन
डायबिटीज के मरीज हैं तो
डायबिटीज के मरीजों को ज्यादा देर भूखे नहीं रहना चाहिए और समय-समय पर खाना चाहिए। इनके लिए खाना और दवाई बहुत जरूरी होती है और अगर इन रोगियों ने व्रत रखा है, तो सरगी में अच्छा और हेल्दी आहार लें। साथ ही दिन भर भूखे रहने की बजाए कुछ तरल पदार्थ लेती रहें।