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डिप्रेशन को मानेें मानसिक बीमारी , अभिनेता गुलशन देवैया ने कहा लोगों को अपनी बीमारी पर खुलकर करनी चाहिए बात

कई बार लोग समझ नहीं पाते कि वे डिप्रेशन के शिकार हैं तो कई बार लोग सामाजिक बहिष्कार के डर से भी यह स्वीकार नहीं करते कि वे डिप्रेशन से गुज़र रहे हैं। इस विषय पर अभिनेता गुलशन देवैया का कहना है कि डिप्रेशन को एक बीमारी के रूप में स्वीकार करने की आवश्यकता है, उसके बाद ही हंम इसके इलाज के बारे में जागरूकता फैला सकते हैं। 

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Written By: Sadhna Tiwari | Updated : September 17, 2020 4:57 PM IST

अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत(Sushant Singh Rajput) की मृत्यु के बाद से डिप्रेशन के विषय पर एक बार फिर चर्चा तेज़ हो गयी है। डिप्रेशन (Depression) यानि अवसाद एक ऐसी मानसिक समस्या है जो आज कई लोगों को प्रभावित कर रही है। खासकर, लॉकडाउन के दौरान लोगों में डिप्रेशन की बीमारी बहुत अधिक बढ़ गयी है। नौकरी जाने, खस्ता आर्थिक स्थिति,  ख़राब सेहत, अकेलापन, उदासी, भविष्य को लेकर चिंता जैसे कई कारणों से लोगों को मानसिक दबाव महसूस हो रहा है। जिससे, तनाव, एंग्जायटी और डिप्रेशन जैसी समस्याएं भी बढ़ रही हैं।

लेकिन, कई बार लोग समझ नहीं पाते कि वे डिप्रेशन के शिकार हैं तो कई बार लोग सामाजिक बहिष्कार के डर से भी यह स्वीकार नहीं करते कि वे डिप्रेशन से गुज़र रहे हैं। इस विषय पर अभिनेता गुलशन देवैया का कहना है कि डिप्रेशन को एक बीमारी के रूप में स्वीकार करने की आवश्यकता है, उसके बाद ही हंम इसके इलाज के बारे में जागरूकता फैला सकते हैं।

डिप्रेशन को बीमारी के तौर पर स्वीकार करना सबसे ज़रूरी

समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए गुलशन ने कहा कि लोग डिप्रेशन को बीमारी नहीं मानते। बल्कि, वे इसे  एक मानसिक अवस्था मानते हैं।  गुलशन ने कहा , "डिप्रेशन को एक बीमारी के तौर पर स्वीकार करने  में जो सबसे बड़ी  समस्या है वह यही है कि, अधितर लोग मानते हैं कि डिप्रेशन केवल मन की एक अवस्था है या किसी तरह की  भावना है, जो खुद ब खुद ठीक हो जाएगाी।  लोग इसे प्रपोज़ल ठुकराए जाने जैसी छोटी बातों के बाद महसूस होने वाली उदासी जितना ही छोटा मानते हैं। लोग डिप्रेशन को ना तो गम्भीरता से लेते हैं और ना ही इसे एक गम्भीर समस्या मानते हैं। असली प्रॉब्लम यहीं से शुरु होती है।

डिप्रेशन का इलाज फिलॉसॉफी नहीं दवाइयां हैं

गुलशन ने  कहा, "डिप्रेशन का उपयोग किसी चीज पर प्रतिक्रिया देने की अभिव्यक्ति के तौर पर होता है। जब किसी मेंटल हेल्थ प्रैक्टिसनर या डॉक्टर द्वारा डिप्रेशन की पहचान की जा रही है तो जाहिर है कि यह एक बीमारी है। इसका किसी बीमारी जैसे कैंसर या टी.बी. की तरह इलाज होना चाहिए।"

डिप्रेशन के इलाज को लेकर उन्होंने कहा, "बहुत से लोग ऐसे  हैं जो डिप्रेशन के इलाज के लिए ढेर सारी दवाइयां खाते हैं। जबकि, डिप्रेशन क इसके इलाज का पहला कदम यह है कि आप यह स्वीकार करें कि यह एक बीमारी है, फिर इसे लेकर आपका ²ष्टिकोण बदल जाएगा।"

उन्होंने आगे कहा, "हर कोई सोचता है कि यह मन की अवस्था है और थोड़ी सी फिलासफी (दर्शन) का उपयोग इसमें कारगर होगा। ऐसा नहीं है आपको पहले इसे बीमारी के तौर पर स्वीकार करना होगा।"