एक्सपर्ट का बयान, शर्मिंदगी और भ्रांतियों की वजह से भारत में लोग नहीं करा रहे मंकीपॉक्स का टेस्ट!

नेशनल कोविड टास्क फोर्स के को-चेयरमैन राजीव जयदेवन ने कहा है कि, देश में मंकीपॉक्स के और भी केसेस का पता चल सकता है लेकिन, लोग इसका टेस्ट कराने से कतरा रहे हैं।

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Written By: Sadhna Tiwari | Updated : August 2, 2022 10:21 AM IST

Monkeypox cases in India: मंकीपॉक्स के नये मामले सामने आने के साथ ही इस बीमारी को लेकर लोगों में डर और हेल्थ एक्सपर्ट्स में चिंता का माहौल है। बता दें कि, भारत में मंकीपॉक्स के कुल 6 मामलों (Monkeypox cases in India) की पुष्टि की जा चुकी है वहीं कई संदिग्धों की भी पहचान की गयी है। इसी बीच, कुछ एक्सपर्ट्स ने दावा किया  है कि भारत में अधिकांश लोग मंकीपॉक्स का टेस्ट नहीं करा रहे हैं और इसकी वजह समाज में फैली कुछ भ्रांतिया हैं। दरअसल, लोगों के मन में बदनामी का डर है और वे शर्मिंदगी से बचने के लिए  मंकीपॉक्स का टेस्ट नहीं करा रहे। समाचार एजेंसी आईएएनएस की रिपोर्ट के अनुसार, नेशनल कोविड टास्क फोर्स के को-चेयरमैन राजीव जयदेवन ( Rajeev Jayadevan, Co-chairman of IMA’s national task force on Covid-19) ने कहा है कि, देश में मंकीपॉक्स के और भी केसेस का पता चल सकता है लेकिन, लोग इसका टेस्ट कराने से कतरा रहे हैं। (stigmas related to Monkeypox cases in India)

देश में अब तक मिल चुके हैं मंकीपॉक्स के 6 मामले

जयदेवन ने कहा, “देश में मंकीपॉक्स के और भी मामले हो सकते हैं। बहुत से संक्रमित छुपे हुए हैं और इसीलिए इस बीमारी के मरीजों की सही संख्या का पता नहीं लग पा रहा।” बता दें कि, मई 2022 में मंकीपॉक्स का पहला मामला सामने आया था और अब तक यह संक्रमण 78 देशों में फैल चुका है। वहीं, विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization) के आंकड़ों के अनुसार अब तक दुनियाभर में इसके 1800 केसेस की पुष्टि की जा चुकी है। वहीं, भारत में मंकीपॉक्स के 6 मामलों की पुष्टि हुई है जिनमें से 3 मामले केरल (Monkeypox cases in Kerala), 2 केसेस दिल्ली में (Monkeypox cases in Delhi) और एक मामला कर्नाटक (Monkeypox cases in Karnataka) में पाया गया।

राजीव जयदेवन के अनुसार, यूरोप मे पाए गए अधिकांश मंकीपॉक्स के मामलों में गे (Gay) और बायसेक्सुअल पुरुषों में संक्रमण देखा गया है। हालांकि, भारत में ऐसे विषयों पर खुलकर बात नहीं होती और ऐसे में लोग टेस्ट कराने से हिचकिचा रहे हैं कि कहीं लोग उनके बारे में कोई गलत राय ना बना लें।

लोगों के मन में बदनामी का डर

वहीं, संक्रामक बीमारियों के एक्सपर्ट ईश्वर गिलाडा (Ishwar Gilada) का कहना है कि, मंकीपॉक्स की बीमारी के साथ जुड़ी मान्यताएं और भ्रांतियों के कारण मंकीपॉक्स की टेस्टिंग की दर बढ़ाने में दिक्कतें आ रही हैं। क्योंकि, संक्रमित व्यक्तियों से यह सवाल पूछा जाता है कि क्या उन्हें यह बीमारी सेक्सुअल ट्रांसमिशन की वजह से हुई है। जैसा कि सेक्सुअली ट्रांसमिटेड बीमारियों (STD) के साथ हमेशा से गलत जानकारियां और भ्रांतियां समाज में देखी जाती हैं और कई बार संक्रमित व्यक्ति को समाज 'गलत काम करने वाला' माना जाता है ऐसे में लोग मंकीपॉक्स का टेस्ट कराने के लिए खुलकर सामने नहीं आ रहे। हालांकि, अभी तक मंकीपॉक्स को एक एसटीडी (sexually transmitted diseases) घोषित नहीं किया गया है।

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