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स्क्रीन एडिक्शन: भारत में लोग रोज़ घंटे भर से अधिक समय केवल वीडियोज़ देखने में बिता देेते हैं

एक नयी रिपोर्ट के आंकड़ें यह बताते हैं कि लोग प्रत्येक दिन 70 मिनट वीडियो स्ट्रीमिंग में बिताते हैं।

Written By Sadhna Tiwari
Updated : September 8, 2019 4:54 PM IST

ओबेसिटी, कमज़ोर हड्डियों और पाचन से जुड़ी परेशानियों की वजह है सुस्त लाइफ स्टाइल। हमारे आस-पास बहुत-से ऐसे कारण हैं जो हमारी ज़िंदगी का बहुत सारा कीमति समय चुरा लेते हैं और हमारी सेहत को बिगाड़ने का काम करते हैं। ऐसी ही एक चीज़ है मोबाइल फोन।

आप में से बहुत-से लोगों को मोबाइल एडिक्शन और उसके प्रभावों के बारे में पता ही होगा। किस तरह यह समस्या हम सबको परेशान  कर रही है उसके बारे में आए दिन हेल्थ एक्सपर्ट्स नए-नए खुलासे कर रहे हैं। मोबाइल फोन के इस्तेमाल को एक सुविधा से अधिक आदत या यूं कहें लत बनते देर नहीं लगी है। हाल ही में आयी एक रिपोर्ट में तो यह बताया गया कि ज़्यादातर भारतीय रोज़ाना एक घंटे से अधिक समय केवल मोबाइल पर वीडियोज़ देखते बिता देते हैं।

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जी हां, भारत में एक ऑवर-द-टॉप (ओटीटी) दर्शक वीडियो स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म पर रोजाना करीब 70 मिनट का समय बिताते हैं। एक नयी रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है, जिसमें कहा गया है कि हर हफ्ते में इस दर में लगातार बढ़ोतरी भी हो रही है। फिलहाल के आंकड़ें यह बताते हैं कि लोग प्रत्येक दिन 70 मिनट वीडियो स्ट्रीमिंग में बिताते हैं।

इरोज नाउ-केपीएमजी की यह रिपोर्ट कहती है कि दर्शक इसके लिए 2.5 से अधिक प्लेटफॉर्म का सहारा लेते है और स्मार्ट टीवी और बड़ी स्क्रीन्स में फिल्में उनकी पसंद होती हैं। रिपोर्ट से पता चला है, "नेटफ्लिक्स (92 प्रतिशत) और हॉटस्टार (89 प्रतिशत) के मुकाबले बड़ी स्क्रीन पर लगभग 96 प्रतिशत लोग इरोज नाउ को देखना पसंद करते हैं। 30 प्रतिशत उत्तरदाता ओटीटी प्लेटफॉर्म पर फिल्में देखना पसंद करते हैं।"

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गौरतलब है कि  भारत में इंटरनेट वीडियो ट्रैफिक प्रति माह 1.5 एक्जाबाइट (ईबी) है और 2017 के मुकाबले 2022 तक प्रतिमाह अनुमानित 13.5 एक्जाबाइट (ईबी) तक पहुंच जाएगा। वर्तमान में भारत में 30 से अधिक वीडियो ऑन डिमांड (वीओडी) प्लेटफॉर्म हैं। इसका साफ अर्थ है कि मोबाइल रखने वाले लोगों को अपने मनोरंजन के लिए लगातार विविध प्रकार की सामग्री औऱ मनोरंजन के साधन उपलब्ध होते रहते हैं। जिनके प्रति लोगों का आकर्षण उन्हें मोबाइल पर ज़्यादा समय बिताने के लिए प्रेरित करता है। इस तरह लोग ज़्यादा से ज़्यादा स्क्रीन टाइम बिताते हैं।