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Written By: Editorial Team | Published : April 17, 2018 2:39 PM IST
एक अध्ययन की मानें तो लगभग 80 प्रतिशत भारतीय वयस्क और 41 प्रतिशत बच्चे अधिक मोटापे के शिकार हैं। इससे इनमें क्रोनिक डिजीज होने की संभावना बहुत हद तक बढ़ जाती है। शोधकर्ता डॉ. फिलिप मैफ्फेटोन और मिहिरा खोपकर ने शुगर के अत्यधिक सेवन और मोटापे की बढ़ती समस्या पर अध्ययन किया। यह अध्ययन ग्लोबल एपिडेमिक ओबेसिटी जर्नल में प्रकाशित हुआ है।
दुनिया भर में, यह अनुमान लगाया गया है कि सिर्फ 14 प्रतिशत जनसंख्या ऐसी है, जिनका शारीरिक वसा का स्तर सामान्य है। स्पोर्ट्स एंड क्लिनिकल न्यूट्रिशनिस्ट और मार्क की फाउंडर मिहिरा खोपकर के अनुसार, अतिरिक्त बॉडी फैट की समस्या सिर्फ अधिक वजन और मोटापे से ग्रस्त लोगों में ही नहीं पाया जाता है, बल्कि उनमें भी यह समस्या देखी जाती है, जिनका वजन तो सामान्य होता है, पर एब्डॉमिनल फैट (पेट संबंधित वसा) अधिक होता है। अत्यधिक मोटापा कार्डियोवैस्कुलर, मेटाबॉलिक या शारीरिक स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल सकता है।
शोधकर्ताओं का कहना है कि आज ज्यादातर लोग हद से ज्यादा प्रोसेस्ड शुगर से भरपूर चीजों का सेवन करने लगे हैं, जो शरीर में अतिरिक्त वसा बढ़ने का मुख्य कारण है, खासकर पेट के आसपास वाले भाग में। अत्यधिक मोटापा सेहत पर नकारात्मक असर डालता है। इससे एब्नॉर्मल कोलेस्ट्रॉल, ब्लड शुगर, हाइपरटेंशन जैसी बीमारियों के होने का खतरा बढ़ जाता है। आगे चलकर यह क्रोनिक बीमारियों जैसे कैंसर, डाइबिटीज, हार्ट और एल्जाइमर रोग का भी कारण बनता है।
मिहिरा खोपकर बता रही हैं कुछ टिप्स, जिससे आप अत्यधिक मोटापे को कम कर सकते हैं-
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अनुवादक: Anshumala.
चित्रस्रोत: Shutterstock Images.