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Written By: Atul Modi | Published : August 20, 2021 1:17 PM IST
बिहार की राजधानी पटना समेत कई जिले इन दिनों डेंगू और मलेरिया (Dengue And Malaria) के चपेट में है। यहां डेंगू और मलेरिया के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। अगर सिर्फ पटना की बात करें तो सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अब तक यहां 7 लोगों में डेंगू की पुष्टि हुई है। यह डेंगू के उन मामलों में से हैं जिनकी जांच सरकारी अस्पतालों में कराई गई थी। जबकि NS-1 से हुई जांच से अब तक जिले में 200 से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं।
दैनिक जागरण की खबर के मुताबिक, मलेरिया विभाग उन्हीं क्षेत्रों में फागिंग और एंटी लारवा का छिड़काव करा रहा है जहां पर डेंगू की पुष्टि सरकारी अस्पतालों के द्वारा हुई है। वहीं दूसरी ओर यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि नगर निगम ने अभी तक नियमित रूप से फागिंग शुरू नहीं की है, जिसके चलते मलेरिया का भी खतरा बना हुआ है। जबकि मच्छरों की रोकथाम के लिए फागिंग की जिम्मेदारी पटना नगर निगम की है।
बिहार मैं नदी क्षेत्र के अधिकांश इलाके बाढ़ और जलभराव से प्रभावित हैं। इस प्रकार की परिस्थितियां डेंगू और मलेरिया के मच्छरों को पनपने का जरिया बनते हैं। ऐसे में जरूरी है कि छिड़काव को नियमित रूप से किया जाए और सरकारी अस्पतालों में जांच की सुविधा बढ़ाई जाए ताकि डेंगू और मलेरिया की जांच कर उसका समय पर उपचार किया जा सके।
आमतौर पर पूरी दुनिया में मच्छरों की तमाम तरह की प्रजातियां पाई जाती हैं मगर इनमें कुछ प्रजातियां ऐसी हैं जो जानलेवा हैं जैसे- एडीज एजिप्ट मच्छर। यह मच्छर बहुत ही खतरनाक होते हैं जो डेंगू, येलो फीवर, चिकनगुनिया जैसी बीमारियों का कारण बनते हैं। वहीं मलेरिया के भी मच्छर कई प्रकार के होते हैं। मलेरिया मच्छर की दो प्रजातियां- प्लाज्मोडियम फॉल्सीपैरम और प्लाज्मोडियम वाईवैक्स हैं जो जानलेवा मलेरिया का कारण बनते हैं। मच्छरों से बचने के लिए जरूरी है कि आप अपने आसपास साफ सफाई रखें, शरीर को पूरी तरह से ढक कर सोएं, मच्छरदानी का प्रयोग करें और अपनी इम्यूनिटी को मजबूत रखें।
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