इलाज में लापरवाही के आरोप में कानपुर के प्रमुख डॉक्टरों के खिलाफ मामला दर्ज

उत्तर प्रदेश कैडर के आईपीएस अधिकारी अनंत देव ने कहा, "सुप्रीम कोर्ट के मानदंडों के अनुसार हमने मरीज का इलाज करने वाली मेडिकल टीम से मौत और लापरवाही के कारणों का पता लगाने के लिए सीएमओ से कहा है।"

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Written By: Sadhna Tiwari | Updated : September 19, 2019 9:38 AM IST

इलाज में बरती गई लापरवाही के कारण हुई मरीज की मौत के आरोप में कानपुर पुलिस ने उत्तर प्रदेश के दो प्रमुख हृदय रोग विशेषज्ञों और उनके अधीनस्थ कर्मचारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पुलिस ने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा-304 ए के गंभीर अपराध के तहत मामला दर्ज किया है। उत्तर प्रदेश सरकार के प्रमुख हृदय रोग विशेषज्ञों ने कथित तौर पर एक हृदय रोगी को अस्पताल में घंटों कतार में इंतजार करवाया, जहां उसे दिल का दौरा पड़ गया। इसके बाद आखिरी समय में डॉक्टरों ने कथित तौर पर मरीज को एक हाई डोज का इंजेक्शन दे दिया, जिसके तुरंत बाद मरीज की मौत हो गई।

वरिष्ठ डॉक्टरों के खिलाफ दर्ज किया गया आपराधिक मामला अब राज्य भर में चिकित्सा बिरादरी की चिंता का कारण बन गया है।

स्वरूप नगर पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर में प्रतिष्ठित लक्ष्मीपति सिंघानिया इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोलॉजी अस्पताल के डॉ. विनय कृष्ण, डॉ. अवधेश शर्मा, एक अज्ञात डॉक्टर के साथ ही इको लैब के कर्मचारी व टेक्निशियन के नाम शामिल हैं।

कानपुर के एक प्रसिद्ध औद्योगिक समूह सिंघानिया ने अस्पताल का भवन उत्तर प्रदेश सरकार को दान कर दिया था। फिलहाल अस्पताल पूरी तरह से राज्य सरकार द्वारा संचालित किया जा रहा है।

कानपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) अनंत देव ने आईएएनएस को बताया कि बलबीर सिंह (50) की मौत से संबंधित मामले में उन्होंने जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) से प्रारंभिक पूछताछ करने का अनुरोध किया है।

उत्तर प्रदेश कैडर के आईपीएस अधिकारी अनंत देव ने कहा, "सुप्रीम कोर्ट के मानदंडों के अनुसार हमने मरीज का इलाज करने वाली मेडिकल टीम से मौत और लापरवाही के कारणों का पता लगाने के लिए सीएमओ से कहा है।"

वहीं दूसरी ओर सिंघानिया इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डिलॉजी के निदेशक डॉ. विनय कृष्ण ने कहा कि रोगी को अंतर्राष्ट्रीय दिशानिर्देशों के अनुसार उपचार दिया गया था।

डॉ. विनय ने आईएएनएस को बताया, "उन्हें इंजेक्श्न का ओवर डोज नहीं दिया गया, बल्कि हमने जीवन रक्षक दवाओं का प्रयोग किया था। हमने मरीज की जान बचाने की पूरी कोशिश की, जिसे लो-ब्लड प्रेशर की शिकायत थी। दुर्भाग्य से हम उसकी जान नहीं बचा पाए।"

इस बीच मृतक मरीज के परिजनों ने आरोप लगाया कि पेशे से डाकिया बलबीर सिंह को 11 सितंबर से छाती का दर्द उठ रहा था। इसके बाद 12 सितंबर को बलबीर की एंजियोप्लास्टी कराई गई और 13 सितंबर को वह कुछ जरूरी परीक्षण के लिए गए। उन्होंने बताया कि इस दौरान बलबीर को कई घंटे कतार में इंतजार करना पड़ा।

इसी दौरान बलबीर को एक और दिल का दौरा पड़ गया। परिजनों ने आरोप लगाया कि बाद में डॉक्टरों ने बलबीर को इंजेक्शन का एक ओवरडोज दिया, जिससे उसे ब्रेन हेमरेज हो गया और अगले दिन सुबह अस्पताल में उसकी मौत हो गई।

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