
साधना तिवारी
साधना तिवारी 15 वर्षों से मीडिया क्षेत्र में हैं। लगभग 9 वर्षों से अधिक समय से ZEE ग्रुप के साथ जुड़ी हुई ... Read More
Written By: Sadhna Tiwari | Published : March 9, 2018 3:19 PM IST
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कुछ शर्तो के साथ इच्छा मृत्यु को मंजूरी दे दी है। दरअसल, न्यायालय में दायर याचिका में इच्छा मृत्यु के लिखी वसीयत (लीविंग विल) को मान्यता देने की मांग की गई थी।
गौरतलब है कि इच्छा मृत्यु को लेकर लंबे समय से विचार चल रहा था। खुद की मर्ज़ी से असमय मरने की इच्छा कई लोगों ने जतायी, जिनमें से ज़्यादातर किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित थे। इच्छामृत्यु पर चल रहे एक मामले पर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। 5 न्यायाधीशों की बेंच ने कुछ शर्तों के साथ इच्छा मृत्यु को इज़ाज़त दे दी। कोर्ट की ओर से यह भी कहा गया कि इस दौरान इच्छा मृत्यु मांगने वाले के सम्मान का ख्याल रखना भी बेहद ज़रूरी है। फैसले में यह भी साफ किया गया कि वसीयत न होने की स्थिति में बीमार व्यक्ति के परिजन हाईकोर्ट में इच्छा मृत्यु की मांग कर सकते हैं।
कोर्ट ने कहा कि किसी लाइलाज बीमारी से पीड़ित व्यक्ति ने अगर लिखित वसीयत में कहा है कि उसे उपकरणों के सहारे ज़िंदा नहीं रखा जाए, तो यह वैध होगा।
दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा, "बीमार व्यक्ति यह तय कर सकता है कि लाइफ सपोर्ट कब बंद करना है। लाइफ सपोर्ट उसी स्थिति में बंद किया जा सकता है, जब मेडिकल बोर्ड यह घोषित कर दे कि व्यक्ति का इलाज नामुमकिन है।"
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वसीयत का पालन कौन करेगा और इस प्रकार की इच्छा मृत्यु के लिए मेडिकल बोर्ड किस प्रकार हामी भरेगा, इस संबंध में वह पहले ही गाइडलाइन्स जारी की जा चुकी है।
प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की पीठ ने पिछले साल 11 अक्टूबर को इस याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रखा था। मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि आज कल मध्यम वर्ग में वृद्ध लोगों को बोझ समझा जाता है, ऐसे में इच्छा मृत्यु में कई दिक्कतें आएंगी हैं। सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ ने एक सवाल यह भी उठाया कि जब सम्मान से जीने को अधिकार माना जाता है तो क्यों न सम्मान के साथ मरने को भी हर व्यक्ति का अधिकार माना जाए।
स्रोत: IANS Hindi, ANI.
चित्रस्रोत:File Photo.