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Written By: Yogita Yadav | Published : February 25, 2019 9:54 AM IST
जब मां-बाप हर समय सिर्फ नंबर और मार्क्स की बात करते हैं, तो बच्चों को इस बात से चिढ़ होती है। माता-पिता को चाहिए कि बच्चों को पढ़ाई के लिए समझाएं मगर उन्हें खुद अपने मनपसंद विषय चुनने दें और रूचि बनाने दें। ©Shutterstock.
ये मौसम परीक्षाओं का है। कुछ कक्षाओं की परीक्षाएं शुरू हो चुकी हैं, तो कुछ की होने वाली हैं। ऐसे में कई बार परीक्षाओं को लेकर इतना ज्यादा तनाव हो जाता है कि बच्चों के साथ-साथ अभिभावक भी घबरा जाते हैं जबकि इन दिनों में बच्चों के प्रति पेरेंट्स की जिम्मेदारी और ज्यादा बढ़ जाती है।
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ये होता है तनाव
आमतौर पर परीक्षा के दौरान बच्चे दो तरह से प्रभावित होते हैं। एक यह कि उन्हें परीक्षा से इतना डर लगता है कि वो परीक्षा देना ही नहीं चाहते हैं और पढ़ाई से दूर भागना चाहते हैं। दूसरा यह कि उन्हें परीक्षा के परिणाम या किसी खास सब्जेक्ट से डर लगता है, जिस कारण वो अपनी पढ़ाई ठीक से नहीं कर पाते हैं। इसीलिए माता-पिता को शुरुआत से ही बच्चे की मदद करनी चाहिए।
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पियर प्रेशर भी बढ़ाता है तनाव
टीनएज में पियर प्रेशर यानी दोस्तों का दबाव बहुत अधिक प्रभावित करता है। बच्चों की दुनिया में दोस्त बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण होते हैं। लेकिन यहां मसला ये है कि आपके बच्चे की दोस्ती किस तरह के बच्चों से है और वो दोस्तों की किन बातों से प्रभावित होता है। इसके अलावा यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि आपका बच्चा दूसरे बच्चों से कितना ज्यादा प्रभावित है। उसी अनुसार उसे तनाव हो सकता है।
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न बढ़ाएं नंबरों का तनाव
जब मां-बाप हर समय सिर्फ नंबर और मार्क्स की बात करते हैं, तो बच्चों को इस बात से चिढ़ होती है। माता-पिता को चाहिए कि बच्चों को पढ़ाई के लिए समझाएं मगर उन्हें खुद अपने मनपसंद विषय चुनने दें और रूचि बनाने दें। मां-बाप के ज्यादा दबाव के कारण परीक्षा के समय बहुत सारे बच्चे अवसाद (डिप्रेशन) का शिकार हो जाते हैं। बच्चों को यह बताने के बजाय कि वो ज्यादा नंबर लाएं, यह बताना चाहिए कि पढ़ाई में वो दिलचस्पी कैसे जगाएं और किताबों से प्यार कैसे करें।
न लें इस तरह की दवाएं
कुछ बच्चे परीक्षा के दौरान तनाव से बचने के लिए दवाइयों, कॉफी आदि का सहारा लेने लगते हैं। ये सरासर गलत है। बच्चे डॉक्टर्स के पास जाकर नींद की दवाएं मांगते हैं। लड़कियां पीरियड्स आगे बढ़ाने के लिए दवाएं खाती हैं। ये सब बहुत हानिकारक साबित होते हैं। इन सबकी जगह तनाव से बचने के लिए म्यूजिक, खेल या मनपसंद बुक्स का सहारा लेना चाहिए।
इन बातों का जरूर रखें ध्यान
परीक्षा से एक रात पहले बच्चों को अच्छी तरह सोना चाहिए। एग्जाम पेपर सामने आते ही बच्चों को सबसे पहले पूरा पेपर पढ़ना चाहिए और एक गहरी सांस लेनी चाहिए। इसके बाद सबसे पहले आसान प्रश्नों को हल करना चाहिए, जिनका उत्तर बच्चों को आता हो।