
आशु कुमार दास
आशु कुमार दास एक अनुभवी हेल्थ कंटेंट स्पेशलिस्ट हैं। इन्हें हेल्थ कंटेंट राइटर के तौर पर काम करते हुए 6 ... Read More
Written By: Ashu Kumar Das | Published : January 27, 2026 7:24 AM IST
Medically Verified By: Dr. Astik Joshi
मुझको अचानक से घबराहट होने लगती है। इतना ज्यादा डर और बचेनी होने लगती है, ऐसे लगता है जैसे मानो अभी हार्ट अटैक आ जाएगा और मैं मर जाऊंगी।
Panic attacks and panic disorder Symptoms and causes: रितु की तरह आपको भी अचानक से घबराहट, बेचैनी और हार्ट अटैक जैसा महसूस होने लगता है, तो ये पैनिक अटैक लक्षण हैं। नई दिल्ली के शालीमार बाग स्थित फोर्टिस अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ आस्तिक जोशी (Dr. Astik Joshi, PSYCHIATRIST, Fortis Shalimar Bagh) बताते हैं कि पिछले कुछ सालों में भारतीय महिलाओं में पैनिक अटैक के मामले तेजी से बढ़े हैं। बहुत से लोग इसे “सिर्फ घबराहट” समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि पैनिक अटैक एक ऐसा अनुभव है जिसमें व्यक्ति को अचानक इतना डर और बेचैनी होती है कि उसे लगता है कि हार्ट अटैक हो रहा है, सांस बंद हो रही है या वह बेहोश हो जाएगा।
कुछ लोगों में पैनिक अटैक इतना ज्यादा गंभीर हो जाता है कि व्यक्ति अपने शरीर और दिमाग पर नियंत्रण खो देते है। डॉ. आस्तिक बताते हैं कि पैनिक अटैक आम तौर पर अचानक शुरू होता है। अचानक से 10- 20 मिनट में पीक पर पहुंच सकता है और फिर धीरे-धीरे कम हो जाता है। कभी-कभी इसके बाद थकान, शरीर में कमजोरी और डर बना रहता है।

किसी व्यक्ति को पैनिक अटैकआने के 1 नहीं बल्कि कई कारण होते हैं। कुछ लोगों को पैनिक अटैक आर्थिक स्थिति, नौकरी, परिवार की कलह और अचानक जिम्मेदारियां बढ़ने के कारण आता है। वहीं, कुछ लोग जब तनाव में आ जाते हैं और किसी से शेयर करने में घबराते हैं, तब उनमें पैनिक अटैक आने की संभावना बढ़ जाती है। पैनिक अटैक आने के कारणों में शामिल है।

इसके अलावा अगर परिवार में पहले से किसी को पैनिक डिसऑर्डर, डिप्रेशन या एंग्जायटी की परेशानी रही तो भी व्यक्ति को पैनिक अटैक होने की संभावना बढ़ जाती है।
डॉक्टर का कहना है कि पैनिक अटैक कई बार किसी खास स्थिति या आदत से ट्रिगर हो जाता है। इनमें शामिल हैं
पैनिक अटैक के लक्षण अक्सर शारीरिक + मानसिक दोनों होते हैं।
| S. NO | पैनिक अटैक के शारीरिक लक्षण | पैनिक अटैक के मानसिक लक्षण |
| 1 | दिल की धड़कन तेज होना | पति, दोस्त या किसी रिश्ते को खोने का डर |
| 2 | घुटन की समस्या होना | पागल होने का एहसास |
| 3 | सांस का अचानक से तेज चलने लगना | अचानक से मौत का डर होना |
| 4 | अचानक से सीने में दर्द या भारीपन | आर्थिक परेशानी होने का डर |
| 5 | हाथ-पैर कांपना | बेचैनी या बेचैन घूमना |
| 6 | चक्कर आना और दिमाग का सुन्न होना | बहुत ज्यादा मीठा खाने की क्रेविंग होना |
| 7 | शरीर का सुन्न पड़ जाना | बिना किसी कारण खाना खाना |
| 8 | ठंड या गर्मी लगना | |
| 9 | बिना कुछ खाए पेट में दर्द |
इस सवाल का जवाब देते हुए डॉक्टर कहते हैं कि 10 में से 9 मामलों में पैनिक अटैक 5 से 10 मिनट में शुरू होकर, 10 से 20 मिनट में पीक और 20 से 30 मिनट में धीरे-धीरे कम हो जाता है। कुछ लोगों में यह 1 घंटे तक भी रह सकता है।

डॉ. आस्तिक जोशी बताते हैं कि जब सामान्य रूप से व्यक्ति को पैनिक अटैक की समस्या कम नहीं हो पाती है, तो उसे डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। पैनिक अटैक का इलाज करने के लिए मुख्य रूप से डॉक्टर थेरेपी और कुछ गंभीर मामलों में दवाओं का सेवन करने की सलाह देते हैं।

1. CBT Therapy (सबसे बेस्ट)
CBT - Cognitive Behavioral Therapy पैनिक अटैक के इलाज में सबसे प्रभावी मानी जाती है। ये पैनिक अटैक का इलाज करने का सबसे सटीक तरीका है। इसमें मरीज की निगेटिव सोच पहचानना, डर के पैटर्न तोड़ना, ट्रिगर को संभालना और व्यक्ति को खुद को कैसे रिलैक्स करना है ये स्किल्स सिखाई जाती हैं।
2. दवाएं
कुछ केस में डॉक्टरों को पैनिक अटैक का इलाज करने के लिए दवाओं की भी जरूरत पड़ती है। इसमें डॉक्टर मरीज को Anti-anxiety medicines दे सकते हैं। ये दवाएं कभी भी खुद से नहीं लेनी चाहिए।
डॉक्टर के साथ बातचीत के आधार पर हम ये कह सकते हैं कि पैनिक अटैक डरावना जरूर है लेकिन खतरनाक नहीं। सही जानकारी, ब्रीदिंग टेक्निक, ग्राउंडिंग, बेहतर लाइफस्टाइल और जरूरत पड़ने पर थेरेपी से इसे पूरी तरह कंट्रोल किया जा सकता है। आप या आपके परिवार में कोई पैनिक अटैक की समस्या से परेशान हैं तो इस विषय पर डॉक्टर से बात जरूर करें। पैनिक अटैक कोई मानसिक बीमारी नहीं बल्कि एक स्थिति है, जिससे सामना न पाने वाले लोगों के दिमाग में डर बैठ जाता है।