महामारी के दौरान महिलाओं में बढ़ी नींद की कमी की समस्या, कामकाज़ी महिलाओं में बढ़ा मेंटल स्ट्रेस

एक सर्वे में यह जानकारी सामने आयी कि कोरोना काल में नौकरीपेशा महिलाओं पर परिवार के बुजुर्गों की देखभाल में लगने वाले समय में 2 गुना से ज्यादा बढ़ोतरी हुई है। (Pandemic's Impact on Women's Life )

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Written By: Sadhna Tiwari | Updated : May 21, 2021 3:35 PM IST

Pandemic's Impact on Women's Life : कोरोना वायरस महामारी का लोगों की ज़िंदगी पर बहुत व्यापक  असर पड़ा है। खासकर,  कामकाजी माहिलाओं की ज़िदगी बहुत प्रभावित हुई है। हाल ही में किए गए एक सर्वे के अनुसार, भारत में कामकाजी महिलाओं की नींद पूरी नहीं हो पा रही है। इस सर्वे के अनुसार, इन महिलाओं में सोने की औसत अवधि में भारी कमी आयी है।  शुक्रवार को एक राष्ट्रीय स्तर के सर्वे के परिणामों को सार्वजनिक किया गया जिसमें, यह जानकारी सामने आयी कि कोरोना काल में  कामकाजी माताओं के परिवार में बुजुर्गों की देखभाल में लगने वाले समय में 2 गुना से ज्यादा बढ़ोतरी हुई है। (Pandemic's Impact on Women's Life )

कोरोना काल में बढ़ी महिलाओं की मेहनत, कम हुई नींद

बाजार अनुसंधान एजेंसी मार्केट एक्ससेल डेटा मैट्रिक्स द्वारा देश भर में 1,200 कामकाजी माताओं को कवर करने वाले एक सर्वेक्षण के अनुसार, वे अब कोविड से पहले समय की तुलना में परिवार में बुजुर्गों, अन्य लोगों की देखभाल करने में 1.50 घंटे ज्यादा खर्च कर रही हैं। इस सर्वे  से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार कोरोना महामारी की शुरूआत के बाद-

  • देश में कामकाजी माताएं अब रोजाना केवल 5.50 घंटे सो रही हैं, जबकि कोविड काल से पहले इसका औसत रोजाना 6.50 घंटे होता था। इस तरह उनके सोने के घंटे में लगभग 17 प्रतिशत की कमी आई है।
  • महामारी ने कामकाजी माताओं की दिनचर्या और जीवन शैली को भी बदल दिया है, उनके व्यायाम और मनोरंजन का समय भी काफी कम हो गया है।
  • अनेक जिम्मेदारियों के बीच, वे अपने कार्यालय के काम को खत्म करने के लिए कड़ी मेहनत कर रही हैं और 6.50 घंटे पहले की तुलना में कार्यालय का काम खत्म करने के लिए 8.55 घंटे खर्च कर रही हैं। कई मामलों में गृहणियों के न होने से उनके घर का काम भी बढ़ गया है।
  • इसके अलावा, कामकाजी माताएं अब स्कूलों में उचित मार्गदर्शन के अभाव में अपने बच्चों की शिक्षा पर ज्यादा समय व्यतीत कर रही हैं। महामारी शुरू होने के बाद से लगभग 30 प्रतिशत महिलाओं ने अधिक घरेलू कामों की सूचना दी और लगभग 26 प्रतिशत ने कहा कि बच्चों की देखभाल की जिम्मेदारियां ज्यादा थीं।
  • 2020 से 30 प्रतिशत महिलाओं ने मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों की भी सूचना दी, जबकि अन्य 26 प्रतिशत ने कहा कि उन्हें किसी तरह की शारीरिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं थीं।

मल्टी-टास्किंग बढ़ा रही है मुश्किलें

मार्केट एक्ससेल डेटा मैट्रिक्स के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अश्विनी अरोड़ा ने शुक्रवार को कहा, "मौजूदा महामारी की स्थिति का हर किसी के जीवन पर खास असर पड़ा है। कामकाजी माताओं को विशेष रूप से प्रभावित किया गया है, जो पेशेवर जिम्मेदारियों और घरेलू कर्तव्यों को पूरा करने के लिए चौबीसों घंटे काम करने के बोझ और तनाव में हैं।"

अरोड़ा ने कहा "मल्टीटास्किंग और एक साथ कई भूमिकाएं निभाना धीरे-धीरे व्यस्त होता जा रहा है। कामकाजी माताओं को अपने व्यायाम और नींद के साथ समझौता करना पड़ता है। एक ही गति से एक ही समय में ऑफिस और होम स्कूल (बच्चों के) का प्रबंधन करना निश्चित रूप से आसान नहीं है और हमें हमारी देखभाल करने वालों के लिए अतिरिक्त देखभाल करने की जरूरत है।"

सर्वेक्षण के लिए देश भर के 17 राज्यों में 25-45 आयु वर्ग की 1,200 कामकाजी माताओं का सर्वेक्षण किया गया।

(आईएएनएस, एसएस/आरजेएस)

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