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आयुर्वेद को उसकी खोई हुई पहचान वापस दिलाने के लिए केंद्र सरकार लगातार नई-नई योजनाओं पर कार्य कर रही है। इसी क्रम में आयुर्वेद को बढ़ावा देने के लिए केंद्रीय ग्रामीण विकास और पंचायती राज मंत्रालय द्वारा एक नई घोषणा की गई है जिसके तहत अब गांव के युवाओं को पंचकर्म चिकित्सा पद्धति (Panchakarma Therapy) की ट्रेनिंग देने की योजना बना रहा है ताकि देश से बेरोजगारी के साथ बीमारी का भी खात्मा हो सके। पंचकर्म थेरेपी एक ऐसी आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति है जिसके माध्यम से गंभीर से गंभीर रोगों को साधारण प्रक्रियाओं से ठीक किया जा सकता है।
दरअसल, वर्ष 2023 को इंटरनेशनल ईयर आफ मिलेट्स के तौर पर मनाया जा रहा है। जिसको लेकर दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA) में सोमवार को एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री गिरिराज सिंह और राज्यसभा सांसद विजय पाल सिंह तोमर मौजूद थे। इस दौरान गिरिराज सिंह ने संबोधित करते हुए कहा कि उनका मंत्रालय जल्द ही ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को आयुर्वेद में प्रयोग की जाने वाली पंचकर्म चिकित्सा पद्धति के लिए प्रशिक्षित करेगा ताकि आयुर्वेद के माध्यम से ग्रामीण रोजगार के अवसर उपलब्ध हो, और प्रधानमंत्री की 'हील इन इंडिया' पहल के अंतर्गत आयुर्वेद को जनमानस तक पहुंचाया जा सके।
आयुर्वेद में पंचकर्म चिकित्सा का एक महत्वपूर्ण स्थान है। पंचकर्म के माध्यम से असाध्य रोगों का उपचार बिना किसी औषधि के बहुत ही सहजता के साथ किया जाता है। इसे पंचकर्म चिकित्सा इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसके अंतर्गत पांच अलग-अलग प्रक्रियाएं होती हैं जो रोगी को लक्षणों के अनुसार ही इन क्रियाकलापों में उन्हें शामिल किया जाता है। पंचकर्म चिकित्सा में मुख्य रूप से वमन, विरेचन, वस्ति, नस्यम व रक्तमोक्षण किया जाता है। जिसके माध्यम से अलग-अलग बीमारियों को ठीक किया जाता है।
अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान की डायरेक्टर प्रो. डॉ. तनुजा मनोज नेसारी ने बताया कि, " संस्थान के अस्पताल में आने वाले मरीजों को अधिक से अधिक सुविधा उपलब्ध कराने के लिए कैंटीन में पथ्याहार की शुरुआत कर रहे हैं। जो स्वास्थ्य के लिए बहुत ही लाभदायक है। इसके अंतर्गत मरीजों को मिलेट्स से बने फूड्स परोसे जाएंगे जिसमें कोदो उपमा, बेसन चिल्ला, रागी बटरमिल्क, वेजिटेबल सूप, गाजर का हलवा, सोठियादि लड्डू, लौकी की बर्फी, जौ का दलिया, पोंगल खिचड़ा और बाजरे का खिचड़ा आदि व्यंजनों को शामिल किया गया है।"
स्वास्थ्यवृत्ता विभाग की प्रोफेसर मेधा कुलकर्णी ने बताया कि, मोटे अनाज (मिलेट्स) से बने व्यंजन प्रोटीन और फूड फाइबर से भरपूर होते हैं, जो दिल की बीमारी डायबिटीज और अन्य गंभीर समस्याओं से हमें बचाते हैं। यह पहल इंटरनेशनल ईयर आफ मिलेट्स को ध्यान में रखते हुए किया गया है ताकि मिलेट्स के प्रति लोगों को जागरुक किया जा सके।