कोविड-19 अस्पतालों में ज़रूरत के अनुसार ऑक्सीजन सप्लाई करने की महाराष्ट्र सरकार की योजना, डॉक्टरों ने किया फैसले का विरोध

मिली जानकारी के अनुसार, राज्य के प्रधान सचिव (स्वास्थ्य) प्रदीप व्यास ने  18 सितंबर के एक सर्कुलर जारी किया। इस सर्कुलर के मुताबिक, कोविड ऑक्सीजन वार्ड या इंटेसिंव केयर यूनिट में मरीजों की संख्या की तुलना में ऑक्सीजन की बहुत अधिक खपत होने--राष्ट्रीय औसत से 3 बार से अधिक खपत होने के कारण यह फैसला लिया गया। (Oxygen for Covid-19 Patients in Maharashtra Hospitals)

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Written By: Sadhna Tiwari | Published : September 21, 2020 10:06 PM IST

Oxygen for Covid-19 Patients:  महाराष्ट्र सरकार ने कोविड-19 सार्वजनिक और निजी अस्पताल के वार्ड/आईसीयू में मरीजों के लिए चिकित्सा ऑक्सीजन की राशनिंग करने का फैसला किया है, जिसका चिकित्सा बिरादरी ने विरोध किया है। राज्य में डॉक्टरों ने इस कदम को 'दुनिया में अभूतपूर्व', 'भयानक' करार देते हुए निंदा किया है, यह कुछ ऐसा है जो कोरोना मरीजों की मृत्यु दर को बढ़ा सकता है। उन्होंने कहा कि "यह बेहतर होगा कि सरकार सभी निजी अस्पतालों को अपने दम पर चलाए।"

मिली जानकारी के अनुसार, राज्य के प्रधान सचिव (स्वास्थ्य) प्रदीप व्यास ने  18 सितंबर के एक सर्कुलर जारी किया। इस सर्कुलर के मुताबिक, कोविड ऑक्सीजन वार्ड या इंटेसिंव केयर यूनिट में मरीजों की संख्या की तुलना में ऑक्सीजन की बहुत अधिक खपत होने--राष्ट्रीय औसत से 3 बार से अधिक खपत होने के कारण यह फैसला लिया गया। (Oxygen for Covid-19 Patients in Maharashtra Hospitals)

महाराष्ट्र में प्रतिदिन इस्तेमाल हो रही ऑक्सीजन की मात्रा चिंताजनक :

व्यास ने कहा कि मेडिकल ऑक्सीजन की वर्तमान खपत प्रतिदिन 600 टन से ऊपर है और विकास की तेज दर से, आशंका है कि यह कुछ दिनों के बाद राज्य में विनिर्माण क्षमता को पीछे छोड़ सकता है। उन्होंने आगे कहा कि,  भारत सरकार ने महाराष्ट्र में जो मरीज ऑक्सीजन पर है, उनकी संख्या पर विचार करते हुए प्रतिदिन महाराष्ट्र में इस्तेमाल होने रही ऑक्सीजन की मात्रा पर गंभीर चिंता जताई है।"

वहीं दूसरी तरफ महाराष्ट्र में कोरोना से ठीक हो चुके और अस्पताल से डिस्चार्ज किए गए मरीजों की संख्या का भी डेटा अपडेट नहीं किया गया है। इस वजह से भी महाराष्ट्र राज्य में ऑक्सीजन की खपत और आवश्यकता का आंकलन लगाने में दिक्कतें आ रही हैं। अभी तक जो जानकारी उपलब्ध करायी गयी है उसके अनुसार यह कहा जा सकता है किमहाराष्ट्र में कम संख्या में डिस्चार्ज और कम रिकवरी दर दिखाई गई है, लेकिन अगर इस आंकड़े का हिसाब लगाया जाए, तो यह राज्य में लगभग 15 प्रतिशत रोगियों के आक्सीजन उपचार प्राप्त करने की ओर इशारा करता है। उन्होंने कहा तिक राष्ट्रीय औसत 5-6 प्रतिसथ से बहुत अधिक है।

ऑक्सीजन का सोच-समझकर इस्तेमाल करने की सलाह:

व्यास ने कहा, "तो, यह स्पष्ट है कि ऑक्सीजन का कोई विवेकपूर्ण इस्तेमाल नहीं है।" उन्होंने कहा कि पैसे बनाने के लिए निजी अस्पतालों द्वारा मरीजों को ऑक्सीजन पर रखने का चलन सा बन गया है और ऐसी गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखने की जरूरत है।

सरकार ने अब आदेश दिया है कि वाडरें में ऑक्सीजन की खपत 7 लीटर प्रति मिनट और आईसीयू में 12 लीटर प्रति मिनट तक सीमित होनी चाहिए। सभी अस्पतालों को लीक के कारण मेडिकल ऑक्सीजन के अपव्यय को रोकने के लिए खपत को लेकर इन प्रतिबंधों का पालन करने के लिए निर्देशित किया गया है।

महाराष्ट्र इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के अध्यक्ष अविनाश भोंडवे ने एक मरीज के जीवन की कीमत पर प्रशासन के इस आदेश को 'सबसे बड़ा और सबसे क्रूर हमला' करार दिया।

समाचार एजेंसी  आईएएनएस से बातचीत में भोंडवे ने कहा, "यह चिकित्सकों की पेशेवर स्वायत्तता पर एक और सीधा प्रहार है, डॉक्टरों की चिकित्सकीय कुशलता पर एक अनुचित सवाल है। यह ऑक्सीजन की आपूर्ति की खराब बंदोबस्त को कवर करने का एक प्रयास है।"

उन्होंने कहा कि कुछ मरीज ऐसे हैं जिन्हें 20 लीटर / मिनट की आवश्यकता होगी और कुछ को 80 लीटर / मिनट तक भी चाहिए होगा, जिसे हाई फ्लो नेजल ऑक्सीजन (एचएफएनओ) के रूप में जाना जाता है और 7-12 लीटर की ऐसी सीमाएं रखना बिल्कुल बेतुका है और यह फैसला मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे द्वारा गठित कोविड स्पेशल टास्क फोर्स की सलाह के बिना भी लिया गया है।

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