
मुकेश शर्मा
मुकेश शर्मा दिल्ली यूनिर्विसिटी से जर्नलिज्म डिग्री होल्डर हैं और पिछले 8 साल से Health Journalism से जुड़े हुए ... Read More
Written By: Mukesh Sharma | Updated : May 27, 2026 8:52 AM IST
ebola virus new vaccine (Image Credit: chatgpt)
साउथ अफ्रीका के डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ द कांगो और युगांडा जैसे देशों में तेजी से फैल रहे इबोला वायरस इन्फेक्शन को देखते हुए एक बार फिर दुनिया पर एक नई महामारी का खतरा मंडरा रहा है। स्थिति को देखते हुए डब्ल्यूएचओ ने भी इसे ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर दिया था। कई बड़े-बड़े देशों ने हाई रिस्क कंट्री से आने वाली यात्राओं को बैन कर दिया था तो कुछ देशों ने स्क्रीनिंग करना शुरू कर दिया था। हालांकि, दुनिया को अब इबोला के डर के साथ-साथ इसके लिए वैक्सीन का भी इंतजार है। कोविड 19 के समय में भारत ने दुनिया को वैक्सीन देने में एक बहुत बड़ी भूमिका निभाई थी और एक बार फिर भारत दुनिया के लिए आगे आ रहा है। ऑक्सफोर्ड की टीम ChAdOx1 BDBV नाम की वैक्सीन पर काम कर रही है, जिसका बड़े स्तर पर उत्पादन में भारत मदद करेगा।
कोरोना के समय में हीरो साबित होने वाली यह जोड़ी अबकी बार दुनिया को इबोला से बचाने आ रही है। ऑक्सफोर्ड की टीम इबोला की वैक्सीन एक खास और प्रभावी वैक्सीन तैयार करने पर काम कर रही है और वैक्सीन का जरूरी मटेरियल जल्द से जल्द भारत की जानी-मानी वैक्सीन निर्माता कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया को भेजने की कोशिश कर रही है, ताकि जल्द से जल्द बड़ी मात्रा में वैक्सीन का निर्माण किया जा सके।
ChAdOx1 BDBV Ebola Vaccine (Image credit: chatgpt)
रिपोर्ट्स के अनुसार यह अभी एक कैंडिडेट वैक्सीन है यानी इस पर अभी स्टडी और टेस्टिंग चल रही हैं। हालांकि, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की तरफ से अभी तक ऐसा कोई बयान नहीं आया है कि वैक्सीन कब तक रेडी टू यूज हो जाएगी। हालांकि, अनुमान लगाया जा रहा है, कि 2 से 3 महीनों में इस वैक्सीन के ह्यूमन ट्रायल शुरु हो सकते हैं।
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यह समझना होगा कि इबोला वायरस के कई अलग-अलग स्ट्रेन (प्रकार) होते हैं, जिनमें से कुछ स्ट्रेन्स के लिए वैक्सीन तैयार हो चुकी है जबकि कुछ के लिए अभी वैक्सीन तैयार नहीं हो पाई है। हाल ही में साउथ कांगो और युगांडा जैसे देशों फैल रहे इबोला का स्ट्रेन Bundibugyo ebolavirus है, जिसके लिए अभी वर्तमान में कोई वैक्सीन तैयार नहीं है।
डिसक्लेमर: इस लेख का उद्देश्य केवल इबोला से जुड़ी सही जानकारी देना है और इसमें दी गई किसी भी जानकारी का इस्तेमाल किसी भी बीमारी के इलाज के रूप में नहीं किया जाना चाहिए। इसके लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।
इबोला वायरस के शरीर में जाने के कम से कम 2 दिन बाद इसके लक्षण दिखने लगते हैं, शुरुआत में फ्लू, बुखार और ठंड लगने जैसे लक्षण होते हैं। संक्रमण गंभीर होने पर लक्षण भी गंभीर होने लगते हैं जैसे त्वचा पर चकत्ते बनना, गंभीर दस्त, सीने में दर्द और मांसपेशियों में गंभीर दर्द आदि।
इबोला वायरस संक्रमित व्यक्ति के शरीर से निकले तरल (Body Fluids) जैसे खून, पेशाब, पसीना और लार आदि के संपर्क में आने से एक स्वस्थ व्यक्ति में फैल सकता है।
इबोला एक खतरनाक वायरस है, जिससे जानलेवा संक्रमण हो सकता है। यह वायरस प्रमुख रूप अफ्रीका में पाए जाने वाले चमगादड़ों की एक खास प्रजाति में पाया जिससे यह बंदरों व अन्य जंगली जानवरों और उसके बाद इंसानों तक फैल जाता है।