
रश्मि उपाध्याय
रश्मि उपाध्याय साल 2014 से मीडिया क्षेत्र से जुड़ी हैं और TheHealthSite.Com में बतौर एडिटर काम कर रही हैं। इन्हें ... Read More
Written By: Rashmi Upadhyay | Published : August 14, 2020 10:10 AM IST
रूस की ‘Sputnik V’ के बाद जल्द ही ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी भी अपनी कोरोना वैक्सीन लॉन्च कर सकती है। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के साथ कोरोना की संभावित वैक्सीन पर काम कर रही कंपनी एस्ट्रा जेनेका का कहना है कि यह वैक्सीन हर स्टेज में सफल हो चुकी है ऐसे में इसी साल नवंबर में इसका ह्यूमन ट्रायल होना है। यदि यह वैक्सीन ह्यूमन ट्रायल में सफल होती है तो उम्मीद है कि फिर तेजी से इसका उत्पादन होगा और 2021 के शुरू में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की वैक्सीन बाजारों में मिल जाएगी। कंपनी के प्रमुख का कहना है कि 2021 में लैटिन अमेरिकी देशों के लिए 40 करोड़ टीकों का निर्माण किया जाएगा। बता दें कि मेक्सिको और अर्जेंटीना में पूरे लैटिन अमेरिका के लिए इस वैक्सीन का उत्पादन होगा।
हमारे देश समेत दुनियाभर में कोरोना के मामले बढ़ते ही जा रहे हैं। भारत में जहां कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या 22 लाख के पार हो चुकी है वहीं मरने वालों का आंकड़ा 44 हजार तक पहुंच चुका है। वर्तमान में यह स्थिति है कि रोजाना हजारों की संख्या में नए मामले सामने आ रहे हैं। इस महामारी से बचने का एक ही उपाय है और वह है इसकी वैक्सीन का बन जाना। हाल ही में रूस ने पहली कोरोना वैक्सीन लॉंच तो कर दी है लेकिन भारतीय डॉक्टर समेत दुनियाभर के वैज्ञानिक इस पर संदेह जता रहे हैं। कहा जा रहा है कि वैक्सीन के कई साइड इफेक्ट होने की संभावना है। विश्व स्वास्थ्य संगठन का भी कहना है कि रूस वैक्सीन से जुड़ी कई अहम जानकारियां छिपा रहा है।
यह सच है कि रशिया दुनियाभर में ऐसा पहला देश बन गया है जिसने कोरोना का सफल टीका बनाया है। लेकिन दिल्ली स्थित एम्स अस्पताल के डायरेक्टर डॉक्टर रणदीप गुलेरिया का कहना है कि इस वैक्सीन को तभी भारत लाया जा सकता है जब इसकी सुरक्षा के हर एंगल से जांच हो जाए। उनका कहना है कि 2 शर्तें है जिनकेदम पर इस वैक्सीन को भारत लाया जा सकता है। पहली है सुरक्षा और दूसरी है कोई साइड इफेक्ट न होना। डॉक्टर रणदीप गुलेरिया ने कहा कि अगर ‘Sputnik V’ सुरक्षित पाई गई और यह मरीजों को इम्युनिटी देने के साथ ही शरीर में मौजूद वायरस को खत्म करने में सफल होती है तो इसे भारत लाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि भारत के पास इतनी क्षमता है कि वह उसका मास प्रॉडक्शन कर पाए।