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हर 8 में से 1 कोरोना रोगी के दिमाग में हो रही दिक्कत, ऑक्सफोर्ड का दावा इस उम्र वाले लोगों को खतरा ज्यादा
दुनियाभर में मानसिक स्वास्थ्य की समस्या लगातार बढ़ रही है और कोरोनावायरस ने इसे और ज्यादा बदतर बना दिया है। कोरोना से ठीक होने वाले लोगों की बात करें तो उन्हें ठीक होने के बाद भी कई तरीके की परेशानियां झेलनी पड़ रही हैं , जो हमारे जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित कर रही हैं। ऐसे बहुत से लक्षण हैं, जो कोरोना से ठीक होने के बाद भी किसी व्यक्ति को परेशान कर सकते हैं और उसके लिए विशेष उपचार की जरूरत होती है ताकि वह अपने जीवन को बेहतर बना सके। हाल ही में एक स्टडी में खुलासा हुआ है कि कोरोना से ठीक होने वाले प्रत्येक 8 में से एक व्यक्ति का दिमाग बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है। आइए जानते हैं इस बारे में जुड़ी ज्यादास जानकारी।
एक नए अध्ययनमें इस बात का खुलासा हुआ है कि कोरोना से ठीक हुए हर 8 में 1 मरीज को मानसिक बीमारियों और दिमाग से संबंधित परेशानियां होती हैं, जो पहले से ही खराब मानसिक स्वास्थ्य वाले मरीजों के लिए हालात को और खराब बनाती हैं।
ऑक्सफोर्ड रिसर्चर्स की एक टीम द्वारा किए गए इस अध्ययन में ये बताया गया है कि कोरोना से ठीक हुए हर 8 में से 1 मरीज को छह महीने तक मनोरोग या फिर न्यूरोलॉजिकल समस्याओं की शिकायत हुई या फिर उन्हें इस समस्या से पीड़ित है। अध्ययन के निष्कर्ष के मुताबिक, अध्ययन से ये भी सामने आया है कि अगर रोगी पहले से ही किसी मानसिक बीमारी से पीड़ित था तो 8 के बजाए हर 3 में से 1 को दिमागी समस्याओं का सामना करना पड़ा।
ये अध्ययन अमेरिका में कोरोना से ठीक हुए लगभग 2,36,379 रोगियों के सर्वेक्षण के आधार पर किया गया था। ये अध्ययन उन लोगों के गंभीर रूप से बीमार होने की ओर इशारा करता है, जो कोरोना होने से पहले ही मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित थे।
इटली, जर्मनी और ब्रिटेन में हुए कुछ अध्ययनों ये जानकारी सामने आई थी कि अस्पताल में भर्ती हुए कोरोना मरीजों को काफी हद तक याददाश्त संबंधी समस्याएं, न्यूरोलॉजिकल समस्याएं, PTSD (पोस्ट ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर), अनिद्रा, ब्रेन फॉग, भ्रम जैसी स्थितियां विकसित होने का अधिक खतरा है। इन मरीजों में महिलाओं की संख्या अधिक थी। ये सभी समस्याएं कोरोना से ठीक होने के कम से कम 6 महीने तक रही थीं।
कोरोना की गंभीरता का अधिक जोखिम उन लोगों को भी था, जिन्हें दुर्लभ स्वास्थ्य समस्याएं थीं। इसमें फेफड़ों से संबंधित समस्याएं शामिल थीं।
ऑक्सफोर्ड का ये अध्ययन हालांकि दोबारा समीक्षा के लिए जाएगा लेकिन निष्कर्षों में मोटे तौर पर ये सुझाव दिया गया है कि 50 वर्ष से अधिक उम्र के लोग, जिसमें पुरुष व महिलाएं दोनों शामिल हैं, को मस्तिष्क और मनोवैज्ञानिक जटिलताओं से पीड़ित होने की अधिक संभावना है।