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दुनियाभर में कोरोना का कहर बदस्तूर जारी है और कई देश कोरोना की वैक्सीन बनाने की कोशिश में लगे हुए हैं। यूं तो कोरोना वैक्सीन बनाने का काम कई देशों में चल रहा है और हर देश में ये वैक्सीन विभिन्न ट्रायल में सफल साबित हो रही हैं। सफल साबित होने वाली इन वैक्सीन की इस रेस में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की कोविड-19 वैक्सीन का नाम सबसे आगे है। लेकिन ऑक्सफोर्ड की वैक्सीन के ट्रायल के दौरान एक वॉलंटियर की मौत होने की खबर सामने आई है।
समाचार एजेंसी एएफपी की एक खबर के मुताबिक, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और दवा कंपनी एस्ट्राजेनेका द्वारा विकसित कोरोना वैक्सीन के ब्राजील में थर्ड स्टेज के ट्रायल के दौरान एक वॉलंटियर की मौत हो गई। अधिकारियों ने इस बात की जानकारी दी है। मीडिया रिपोर्ट में हालांकि वॉलंटियर की मौत की पीछे का कारण कोरोना वैक्सीन नहीं बल्कि प्लेसबो को बताया जा रहा है।
बता दें कि दुनिया भर में अभी तक किसी भी देश में वैक्सीन के विभिन्न ट्रायल के दौरान मौत का ये पहला मामला सामने आया है। वहीं अध्ययन करने वाले शोधकर्ताओं ने वॉलिंटयर की मौत के बाद एक स्वतंत्र समीक्षा कर ये निष्कर्ष निकाला है कि इस मामले के बाद भी वैक्सीन की सुरक्षा को लेकर किसी को भी कोई चिंता करने की जरूरत नहीं है और एस्ट्राजेनेका द्वारा विकसित किए जा रहे टीके का ट्रायल भी नहीं रोका जाएगा।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, एस्ट्राजेनेका द्वारा विकसित कोरोना वैक्सीन के इस ट्रायल में जिस शख्स की मौत हुई है वह 28 वर्षीय वॉलंटियर था और महामारी के दौरान फ्रंट लाइन पर काम कर रहा था। कोरोना से संक्रमित होने के कारण ही उसकी मौत हुई थी। वॉलिंटयर की मौत पर ब्राजील समाचार पत्र ग्लोबो और अंतर्राष्ट्रीय समाचार एजेंसी ब्लूमबर्ग ने अपनी-अपनी रिपोर्ट में बताया है कि वॉलंटियर नियंत्रण समूह में था और उसकी मौत वैक्सीन के बजाय प्लेसबो से हुई है।
वहीं ऑक्सफोर्ड ने वॉलिंटयर की मौत पर अपने बयान में कहा है कि मामले के सावधानीपूर्वक मूल्यांकन के बाद ब्राजील ने क्लिनिकल ट्रायल की सुरक्षा पर किसी प्रकार की कोई चिंता व्यक्त नहीं है और वैक्सीन का ट्रायल जारी रखने की बात कही है।
गौरतलब है कि पहले भी ऑक्सफोर्ड और एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन के ट्रायल को लेकर बाधाएं सामने आई थी, जिसमें एक वॉलंटियर वैक्सीन के डोज के बाद अजीबो-गरीब बीमारी का शिकार हुआ था। हालांकि ब्रिटिश नियामक द्वारा रिव्यू के बाद वैक्सीन को हरी झंडी मिलने पर ट्रायल दोबारा शुरू हुआ था।
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और एस्ट्राजेनेका द्वारा विकसित वैक्सीन को अब तक ब्राजील में आठ हजार वॉलंटियर्स पर प्रयोग किया गया है जबकि पूरी दुनिया में यह संख्या बीस हजार से अधिक है।