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Written By: Jitendra Gupta | Updated : June 2, 2022 8:31 PM IST
मुंह में लाल और सफेद झाग दिखाई देना है इस कैंसर का संकेत! 75 हजार लोग गंवाते हैं अपनी जान
भारत में मुंह के कैंसर के बढ़ते मामले खतरनाक स्वास्थ्य समस्याएं बनते जा रहे हैं। ग्लोबोकॉन 2020 के आंकड़े बताते हैं कि देश में सभी तरह के कैंसर के मामलों में 10.3 फीसदी मामले ओठ और मुंह के कैंसर के ही होते हैं और कैंसर से होने वाली 8.8 फीसदी मौतों के लिए इन्हें ही जिम्मेदार माना जाता है। हर साल करीब 1 लाख 35 हजार मुंह के कैंसर के नए मामले सामने आते हैं जबकि इसी से हर साल 75,000 मरीजों की मौत हो जाती है। ओरल कैविटी कैंसर के मामलों में जीभ का कैंसर, गाल के अंदरूनी हिस्से का कैंसर, ऊपरी और निचले जबड़े का कैंसर आदि शामिल हैं।
नई दिल्ली स्थित साकेत के मैक्स सुपर स्पेशियल्टी हॉस्पिटल के गले के कैंसर के प्रमुख सर्जन और कंसल्टेंट डॉ. अक्षत मलिक ने बताया की इस तरह के कैंसर का सबसे बड़ा कारण तंबाकू सेवन होता है। तंबाकू का सेवन दो तरीके से किया जाता हैः
1- धुएं के रूप में
2-धुआं रहित
डॉ. अक्षय मलिक कहते हैं कि धुआं रहित तंबाकू का सेवन देश की 21.4 फीसदी आबादी करती है जिसमें गुटखा,खैनी, पान आदि शामिल हैं। धुएं के रूप में सिगरेट, बीड़ी और हुक्का आदि का इस्तेमाल किया जाता है। तंबाकू के सेवन से मुंह का कैंसर होने की आशंका तीस गुना ज्यादा बढ़ जाती है। इस तरह के तंबाकू के साथ अल्कोहल का सेवन करने से भी कैंसर के मामले बढ़ते हैं। इसके अलावा पान के साथ सुपारी का सेवन भी मुंह के कैंसर का कारण बनता है।
तंबाकू सेवन करने वाले लोगों में ये लक्षण दिखाई देते हैंः
1-जीभ या गाल का घाव बार—बार हो जाना
2-ओरल कैविटी
3-दांत झड़ना
4- मुंह खोलने में दिक्कत होना
5-कोई भी चीज निगलने में दिक्कत आना
6-मुंह में लाल या सफेद दाग वाले घाव हो जाते हैं।
एक्सपर्ट के मुताबिक, अगर कोई मरीज डॉक्टर से संपर्क करता है तो उसे तंबाकू के सेवन से बचने के लिए कहा जाता है तभी वह कैंसर के घाव से बच सकता है।
ऐसे मरीजों की सभी तरह की जांच की जाती है और घाव वाले स्थान की बायोप्सी जांच कराई जाती है। निगलने में दिक्कत होने पर मरीज की एफएनएसी (फाइन नीडल एस्पिरेशन साइटोलॉजी) जांच कर कैंसर की कोशिकाओंका पता लगाया जाता है। आगे के इलाज के लिए सीटी स्कैन और एमआरआई स्कैन जैसी रेडियोलॉजिकल जांच भी कराई जाती है। इस तरह के घाव का इलाज कैंसर के चरणों के अनुरूप किया जाता है।
इलाज पूरा होने के बाद मरीज को नियमित रूप से डॉक्टर से परामर्श लेते रहना चाहिए ताकि रोग दोबारा न होने पाए। जीभ, गाल या जबड़े की सर्जरी के बाद मरीज को रिहैबिलेशन में रहना जरूरी है। इसमें मरीज को बोलने और जबड़ा पूरी तरह खोलने का अभ्यास कराया जाता है और खाना निगलने की दिक्कतें दूर की जाती है। कुछ समय तक मरीजों को हल्का और तरल भोजन करने को कहा जाता है। बचाव जीवनशैली में कुछ बदलाव लाने से व्यक्ति मुंह के कैंसर से बच सकता है। इसमें सबसे जरूरी है कि तंबाकू का किसी भी रूप में सेवन पूरी तरह त्याग दिया जाए।