... Read More
By clicking “Accept All Cookies”, you agree to the storing of cookies on your device to enhance site navigation, analyze site usage, and assist in our marketing efforts. Cookie Policy.
Written By: Yogita Yadav | Updated : January 8, 2019 2:13 PM IST
Image credits by: बॉलीवुड अभिनेता और फिल्म निर्माता राकेश रोशन गले के स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा से पीडि़त है, जिसका खुलासा उनके बेटे रितिक रोशन ने किया। ©Shutterstock.
एसएससी यानी स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा (SCC) कार्सिनोमाटस कैंसर है, जो त्वचा, होंठ, मुंह, घेघा, मूत्राशय, प्रोस्टेट, फेफड़ों, योनि और गर्भाशय ग्रीवा सहित शरीर के अलग-अलग हिस्सों में हो सकता है।
यह भी पढ़ें - शायद आप नहीं जानते कि कैंसर से भी बचा सकती है फूलगोभी, जानें इसके फायदे
स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा के प्रकार
यह भी पढ़़े़ें – पिता राकेश रोशन के लिए रितिक ने लिखी भावनात्मक पोस्ट, इस घातक बीमारी की करवा रहे हैं सर्जरी
संकेत व लक्षण
कटे या जले के निशान, निचले होठ या श्लेषमा झिल्ली और इम्युनोसप्रेस्ड (स्वरक्षा प्रणाली दमित) रोगियों में होने वाले एसएससी में मेटास्टेसिस का जोखिम ज्यादा होता है। जीभ के पास और श्लेषमा झिल्ली वाले करीब एक तिहाई ट्यूमर निदान से पहले ही एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानापन्न हो जाते हैं। यह भी पढ़ेें – खाने में इन सात फूड्स को रखें साथ, कभी नहीं पड़ेंगे बीमार
कारण
एचपीवी (HPV) ह्यूमन पैपिलोमा वायरस ग्रसनी, फेफड़े, उंगलियों और गुदा व जननांग क्षेत्र के एसएससी से जुड़े होते हैं।
त्वचा
शल्की सेल कार्सिनोमा सबसे आम दूसरे तरह का त्वचा कैंसर है (बेसल सेल कार्सिनोमा के बाद, लेकिन मेलेनोमा से ज्यादा आम)। यह आम तौर पर सूरज की किरणों से प्रभावित क्षेत्रों में होता है। धूप लगना और प्रतिरक्षादमन त्वचा के एसएससी के लिए जोखिम वाले कारक हैं, हालांकि क्रोनिक सन एक्सपोजर सबसे मजबूत पर्यावरणीय जोखिम कारक होता है।
मेटास्टेसिस का जोखिम कम होता है, लेकिन यह बेसल सेल कार्सिनोमा से बहुत अधिक होता है। होंठ और कानों के शल्की सेल कैंसर में जगह बदलने और पुनरावृत्ति की उच्च दर (20 से 50%) होती है। इम्युनोथेरेपी से गुजर रहे या श्वेत रक्त कणिकाओं के रोगों (ल्यूकेमियाज) वाले व्यक्तियों में त्वचा का शल्की सेल कैंसर ज्यादा आक्रामक होता है, इससे मतलब नहीं कि वह किस स्थान पर है।
शल्की सेल कार्सिनोमा का इलाज
आम तौर पर काटकर निकालने या सर्जरी के जरिये होता है। त्वचा संबंधी एसएससी के इलाज के ननसर्जिकल (बिना चीरा लगाये) विकल्पों में ट्रॉपिकल कीमोथेरेपी (सामयिक रसायन चिकित्सा), ट्रॉपिकल इम्युन रेस्पांस मोडिफायरर्स फोटो डायनेमिक थेरेपी (पीडीटी (PDT)) रेडियोथेरेपी और प्रणालीगत रसायन चिकित्सा शामिल हैं। सामयिक चिकित्सा और पीडीटी (PDT) का उपयोग आम तौर पर घातक होने से पहले (यानी, एकेएस (AKs)) और स्वस्थानी घावों तक सीमित होता है। विकिरण चिकित्सा उन रोगियों के लिए एक प्राथमिक उपचार का विकल्प है, जिनमें शल्य चिकित्सा संभव नहीं है और यह उनके लिए शुरुआती चिकित्सा के बाद वाली इलाज प्रक्रिया के लिए मुफीद है, जो स्थान बदलने वाले कैंसर या उच्च जोखिम वाले त्वचा एससीसी से पीड़ित हैं।
Disclaimer: The content on TheHealthSite.com is only for informational purposes. It is not at all professional medical advice. Always consult your doctor or a healthcare specialist for any questions regarding your health or a medical condition.