कैंसर का ही एक प्रकार है स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा, जानिए इसके लक्षण और प्रकार

बॉलीवुड अभिनेता और फिल्म निर्माता राकेश रोशन गले के स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा से पीडि़त है, जिसका खुलासा उनके बेटे ऋतिक रोशन ने किया।

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Written By: Yogita Yadav | Updated : January 8, 2019 2:13 PM IST

एसएससी यानी स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा (SCC) कार्सिनोमाटस कैंसर है, जो त्वचा, होंठ, मुंह, घेघा, मूत्राशय, प्रोस्टेट, फेफड़ों, योनि और गर्भाशय ग्रीवा सहित शरीर के अलग-अलग हिस्‍सों में हो सकता है।

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स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा के प्रकार

  • एडीनॉयड (नाक और कंठ के बीच में उभरा हुए टिश्यू)
  • स्पष्ट सेल कार्सिनोमा (त्वचा की स्पष्ट कोशिका कार्सिनोमा)
  • स्पाइंडल सेल कार्सिनोमा
  • सिगनेट रिंग सेल कार्सिनोमा
  • बेसलॉयड शल्की सेल कार्सिनोमा
  • तलवे में होने वाली गांठ का कार्सिनोमा
  • केराटोसैंथोमा

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संकेत व लक्षण

  • प्रभावित अंगों के आधार पर लक्षण भी काफी अलग-अलग होते हैं।
  • त्वचा का एसएससी कोशिकाओं की एक छोटी सी गांठ के रूप में शुरू होती है और इसके बढ़ने पर उसका केंद्र रूप मृत और परिगलित होने लगता है और गांठ एक घाव में बदल जाती है।
  • एससीसी की वजह से पैदा हुआ घाव अक्सर स्पर्शोन्मुख होता है।
  • अल्सर या लाल त्वचा पट्टिका, जिसका विकास धीमी गति से होता है
  • गांठ से, खासकर उसके मुंह से रुक-रुक कर खून का बहना
  • रोग-विषयक रूप अत्यधिक परिवर्तनशील होता है।
  • आमतौर पर ट्यूमर एक घाव के रूप में दिखता है, जो कठोर होता है और उसके किनारे उठे हुए होते हैं।
  • ट्यूमर अक्सर एक या कठोर पट्टिका या पुंज के रूप में हो सकता है, जिस पर लाल और जामुनी दाने होते हैं और सतह पर विभिन्न रंगों की झलक दिखती है।
  • ट्यूमर आसपास की त्वचा के स्तर से नीचे रह सकते हैं और अंततः उनमें घाव हो जाता है और वे नीचे के ऊतकों पर आक्रमण करते हैं।
  • ये ट्यूमर आमतौर धूप लगने वाले क्षेत्रों (जैसे हाथ के पीछे, खोपड़ी, होंठ और कान के बाहरी हिस्से) में स्थित होते हैं।
  • होंठ पर ट्यूमर एक छोटा घाव पैदा करता है, जो भरता नहीं है और रह-रहकर उससे खून बहता है।
  • क्रोनिक स्किन फोटो डैमेज का साक्ष्य, जैसे मल्टीपल एक्टीनिक केराटोसेज (सौर केराटोसेज) यह भी पढ़ें – क्‍यों आम होती जा रही है कैंसर की बीमारी ? क्‍या कहते हैं दुनिया भर के शोध
  • ट्यूमर अपेक्षाकृत धीरे-धीरे बढ़ता है
  • बेसल सेल कार्सिनोमा (बीसीसी (BCC)) के विपरीत शल्की सेल कार्सिनोमा (एससीसी (SCC)) में मेटास्टेसिस का काफी जोखिम होता है।

SSC-

कटे या जले के निशान, निचले होठ या श्लेषमा झिल्‍ली और इम्युनोसप्रेस्ड (स्वरक्षा प्रणाली दमित) रोगियों में होने वाले एसएससी में मेटास्टेसिस का जोखिम ज्यादा होता है। जीभ के पास और श्लेषमा झिल्‍ली वाले करीब एक तिहाई ट्यूमर निदान से पहले ही एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानापन्न हो जाते हैं। यह भी पढ़ेें – खाने में इन सात फूड्स को रखें साथ, कभी नहीं पड़ेंगे बीमार

कारण

एचपीवी (HPV) ह्यूमन पैपिलोमा वायरस ग्रसनी, फेफड़े, उंगलियों और गुदा व जननांग क्षेत्र के एसएससी से जुड़े होते हैं।

त्वचा

शल्की सेल कार्सिनोमा सबसे आम दूसरे तरह का त्वचा कैंसर है (बेसल सेल कार्सिनोमा के बाद, लेकिन मेलेनोमा से ज्यादा आम)। यह आम तौर पर सूरज की किरणों से प्रभावित क्षेत्रों में होता है। धूप लगना और प्रतिरक्षादमन त्वचा के एसएससी के लिए जोखिम वाले कारक हैं, हालांकि क्रोनिक सन एक्सपोजर सबसे मजबूत पर्यावरणीय जोखिम कारक होता है।

मेटास्टेसिस का जोखिम कम होता है, लेकिन यह बेसल सेल कार्सिनोमा से बहुत अधिक होता है। होंठ और कानों के शल्की सेल कैंसर में जगह बदलने और पुनरावृत्ति की उच्च दर (20 से 50%) होती है। इम्युनोथेरेपी से गुजर रहे या श्वेत रक्त कणिकाओं के रोगों (ल्यूकेमियाज) वाले व्यक्तियों में त्वचा का शल्की सेल कैंसर ज्यादा आक्रामक होता है, इससे मतलब नहीं कि वह किस स्थान पर है।

शल्की सेल कार्सिनोमा का इलाज

आम तौर पर काटकर निकालने या सर्जरी के जरिये होता है। त्वचा संबंधी एसएससी के इलाज के ननसर्जिकल (बिना चीरा लगाये) विकल्पों में ट्रॉपिकल कीमोथेरेपी (सामयिक रसायन चिकित्सा), ट्रॉपिकल इम्युन रेस्पांस मोडिफायरर्स फोटो डायनेमिक थेरेपी (पीडीटी (PDT)) रेडियोथेरेपी और प्रणालीगत रसायन चिकित्सा शामिल हैं। सामयिक चिकित्सा और पीडीटी (PDT) का उपयोग आम तौर पर घातक होने से पहले (यानी, एकेएस (AKs)) और स्वस्थानी घावों तक सीमित होता है। विकिरण चिकित्सा उन रोगियों के लिए एक प्राथमिक उपचार का विकल्प है, जिनमें शल्य चिकित्सा संभव नहीं है और यह उनके लिए शुरुआती चिकित्सा के बाद वाली इलाज प्रक्रिया के लिए मुफीद है, जो स्थान बदलने वाले कैंसर या उच्च जोखिम वाले त्वचा एससीसी से पी‍ड़ित हैं।

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