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Written By: Yogita Yadav | Published : September 26, 2018 3:03 PM IST
हर साल सितंबर से अकटूूूबर तक का समय होता है इस बीमारी के लिहाज से संवेदनशील। © Shutterstock
दिल्ली में डिप्थीरिया से होने वाली मौतें थमने का नाम नहीं ले रही हैं। सोमवार को डिप्थीरिया से पीड़ित यूपी के एक और बच्चे की मौत हो गई। अब तक इस बैक्टीरिया की वजह से मरने वाले बच्चों की संख्या बढ़कर 19 तक पहुंच गई है। इस तरह से डिप्थीरिया की वजह से सितंबर में ऐडमिट होने वाले बच्चों की संख्या बढ़कर 157 तक पहुंच गई है।
ऐंटिडॉट सीरम मिलने के बाद भी मौत
सोमवार को एक और बच्चे की मौत होने के बाद से लोग एक बार फिर से डर गए हैं। यहां सबसे दुखद यह रहा कि बच्चे को दवा दी जा चुकी थी, उसके बावजूद यह दुखद घटना हुई।
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सितंबर से अक्टूबर है संवेदनशील समय
डिप्थीरिया का बैक्टीरिया हर साल सितंबर महीने में ऐक्टिव हो जाता है और ऐडमिट होने वाले 15 से 20 पर्सेंट मरीजों की मौत हो जाती है। डॉक्टरों की मानें तो यह कोई नया ट्रेंड नहीं है और हर साल औसतन ऐसा होता है। अक्टूबर महीने के बाद इसमें कमी आनी शुरू हो जाती है। डिप्थीरिया एक प्रकार के इंफेक्शन से फैलने वाली बीमारी है। चपेट में ज्यादातर बच्चे आते हैं। हालांकि बीमारी बड़ों में भी हो सकती है। बैक्टीरिया सबसे पहले गले में इंफेक्शन करता है। इससे सांस नली तक इंफेक्शन फैल जाता है। डिप्थीरिया कम्यूनिकेबल डिजीज है यानी यह बड़ी आसानी से एक व्यक्ति से दूसरे में फैलता है।
ये हैं डिप्थीरिया के लक्षण
वैक्सीनेशन है जरूरी
वैक्सीनेशन से बच्चे को डिप्थीरिया बीमारी से बचाया जा सकता है।
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नियमित टीकाकरण में डीपीटी (डिप्थीरिया, परटूसस काली खांसी और टिटनेस) का टीका लगाया जाता है। 1 साल के बच्चे को डीपीटी के 3 टीके लगते हैं। इसके बाद डेढ़ साल पर चौथा टीका और 4 साल की उम्र पर पांचवां टीका लगता है। टीकाकरण के बाद डिप्थीरिया होने की संभावना नहीं रहती है।