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Fatty Liver disease cases in India: भारत में हर तीसरा व्यक्ति फैटी लिवर की बीमारी से पीड़ित है। यह एक ऐसी बीमारी है जो टाइप-2 डायबिटीज (Type 2 diabetes) और मेटाबोलिक डिसऑर्डर से पहले होनेवाली एक हेल्थ कंडीशन (early symptoms of type 2 diabetes) है। यह कहना है केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह का। डायबिटीज एक्सपर्ट और मशहूर एंडोक्रिनोलॉजिस्ट डॉ. जितेंद्र ने कहा कि, नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज एक आम मेटाबोलिक लिवर डिसऑर्डर है जो बाद में सिरोसिस और प्राइमरी लिवर कैंसर में बदल सकता है। यह डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर (High Blood Pressure), हार्ट डिजिज (Heart Disease) और अन्य तरह की बीमारियों से जुड़ा हुआ है और इन बीमारियों से पहले फैटी लिवर डिजिज की समस्या (Fatty Liver diseases) लोगों में देखी जाती है।
हाल ही में राष्ट्रीय राजधानी स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलियरी साइंसेज में मेटाबॉलिक लिवर रोगों से बचाव और उनकी रोकथाम के लिए एक वर्चुअल नोड की शुरूआत की गयी। इस नोड में फ्रांस के 11 और भारत के 17 डॉक्टर एकसाथ काम करेंगे। इस मौके पर बोलते हुए जितेंद्र ने कहा, भारतीय उपमहाद्वीप और यूरोप दोनों में लाइफस्टाइल और डाइट से जुड़ी गलत आदतों के कारण डायबिटीज और मोटापे जैसे मेटाबॉलिक सिंड्रोम (Metabolic syndrome) में बढ़ोतरी देखी गयी है और इसकी वजह से नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज के मामले भी बढ़े हैं।
उन्होंने कहा कि भारतीय उपमहाद्वीप में यह डिजीज लगभग 20 प्रतिशत ऐसे लोगों को भी है जिनका वजन ज्यादा नहीं है। जबकि पश्चिम में नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज के अधिकांश मामले मोटापे से जुड़े हुए हैं। उन्होंने आगे कहा कि भारत और फ्रांस दोनों में अल्कोहलिक लिवर डिजीज के काफी मामले हैं।
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र ने बताया कि नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज और अल्कोहलिक लिवर डिजीज दोनों ही स्टेटोसिस से लेकर स्टेटोहेपेटाइटिस सिरोसिस और एचसीसी तक एक समान प्रगति प्रदर्शित करते हैं।
(IANS)