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कोविड के हल्के लक्षण भी बिगाड़ सकते हैं आपका दिमागी संतुलन! नई स्टडी में खुलासा कैसे पड़ता है ब्रेन पर प्रभाव

स्टैनफोर्ड और येल यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों की एक टीम द्वारा किए गए एक नए अध्ययन के मुताबिक, कोविड के हल्के लक्षण भी हमारे मस्तिष्क पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकते हैं।

कोविड के हल्के लक्षण भी बिगाड़ सकते हैं आपका दिमागी संतुलन! नई स्टडी में खुलासा कैसे पड़ता है ब्रेन पर प्रभाव
कोविड के हल्के लक्षण भी बिगाड़ सकते हैं आपका दिमागी संतुलन! नई स्टडी में खुलासा कैसे पड़ता है ब्रेन पर प्रभाव

Written by Jitendra Gupta |Published : January 19, 2022 3:51 PM IST

कोविड कहीं न कहीं हमारे संपूर्ण स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा रहा है फिर चाहे उसकी गंभीरता कितनी ही कम क्यों न हो। स्टैनफोर्ड और येल यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों की एक टीम द्वारा किए गए एक नए अध्ययन के मुताबिक, कोविड के हल्के लक्षण भी हमारे मस्तिष्क पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकते हैं। ये टीम वही है, जिसने कुछ दिन पहले ये पता लगाया था कि कैसे कोविड के छिपे हुए बायोलॉजिक्ल मैक्निज्म और मार्कर कीमोथैरेपी के समान प्रभाव छोड़ सकते हैं। आइए जानते हैं क्या कहती है स्टडी।

अभी तक ब्रेन फॉग के रूप में जाना गया

अध्ययन के ये निष्कर्ष कोविड के उन हल्के और लंबे समय तक दिखाई देने वाले लक्षणों से जूझ रहे लोगों के ठीक होने से जुड़े हैं, जिन्हें अभी तक समझा नहीं जा सका है। इन प्रभावों को अक्सर और आमतौर पर ब्रेन फॉगके रूप में जाना जाता है, जो हमारी याददाश्त क्षमताओं और याददाश्त संबंधी गतिविधियों को बिगाड़ने का काम करते हैं।

मस्तिष्क होता है प्रभावित

हाल ही में हुए इस अध्ययन में अब ये पता चला है कि ये वायरस कैसे सिर्फ हल्की बीमारी के रूप में सामने आ रहा है, जिसके अधिक संकेत प्राप्त हो रहे हैं। अध्ययन के मुताबिक, ये वायरस चूहे के मस्तिष्क को प्रभावित करता है और कोविड संक्रमित लोग फिर चाहे उनमें लक्षण हो या नहीं सभी में इंफेक्शन के रूप में सामने आ रहा है।

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इस तरह होती है हमारी याददाश्त प्रभावित

अध्ययन के लिए शोधकर्ताओं ने सबसे पहले ये पता लगाया कि संक्रमण होने के बाद करीब सात सप्ताह तक हमारी स्पाइनल फ्लूय्ड में मौजूद साइटोकिन नाम के इम्यून सेल्स में विशिष्ट मार्कर आ जाते हैं, जिसके कारण न्यूरो इंफ्लेमेशन के संकेत मिलने शुरू हो जाते हैं। ये संकेत चूहों में तो पाए ही गए साथ ही उन 48 लोगों में भी मौजूद थे, जिन्होंने कोविड के लंबे न्यूरो लक्षण महसूस किए थे लेकिन ये मार्कर उन 15 लोगों में मौजूद नहीं थे जिन्में कोविड के लंबे समय तक दिखाई देने वाले लक्षण नहीं थे।

ऐसे किया गया अध्ययन

उसके बाद वैज्ञानिकों ने चूहे के मस्तिष्क का अध्ययन किया और पाया कि मस्तिष्क के एक विशेष हिस्से में माइक्रोजलियल रिएक्टिविटी हो रही थी। माइक्रोजलिया एक प्रकार के इम्यून सेल्स हैं, जो हमारी केंद्रीय तंत्रिका तंत्र में होते हैं।

ये सेल्स हमारे दिमाग के एक हिस्से हिप्पोकैम्पस में नए न्यूरोन के बनने की प्रक्रिया को भी सीमित करते हैं, जो कि हमारी याददाश्त को दुरुस्त तरीके से काम करने में मदद करता है। इसके अलावा अध्ययन में ये भी पाया गया कि संक्रमित चूहे में नए न्यूरोन के बनने की क्षमता में भारी कमी पाई गई। इतना ही नहीं शोधकर्ताओं ने ये भी पता लगाया कि हमारे मस्तिष्क को स्वस्थ रखने वाली एक और प्रक्रिया मेलिन भी काफी हद तक प्रभावित हुई, जो न्यूरोन आवेगों की गति को नियंत्रित करती है।

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हल्के लक्षण वालों को भी खतरा

अध्ययन के लेखक बताते हैं कि ओमिक्रोन जैसे नए वेरिएंट भी मस्तिष्क पर समान तरीके का बायोलॉजिक्ल प्रभाव डालते हैं, इसका पता लगाया जाना बाकी है। लेकिन ये अध्ययन पर्याप्त जानकारी प्रदान करता है कि जो लोग कोविड के कारण अस्पताल में भर्ती हुए या फिर जिनमें हल्के लक्षण भी पाए गए उन लोगों को याददाश्त संबंधी नुकसान जरूर हुआ है।

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