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Written By: Jitendra Gupta | Published : April 13, 2022 9:06 AM IST
ओमिक्रोन के BA.4 और BA.5 सब वेरिएंट्स से चकराया WHO का माथा, जानें कितने गंभीर हैं ये दोनों सब-वेरिएंट
कुछ देशों में बीते कुछ दिनों से कोविड के मामलों में फिर से वृद्धि देखने को मिल रही है। मौजूदा वक्त में बीए.2 सब वेरिएंट पूरी दुनिया का सबसे प्रभावी स्ट्रेन है, जो कि करीब 94 फीसदी मामलों की सबसे बड़ी वजह है। हालांकि अब वैज्ञानिकों के सामने ओमिक्रोन के दो नए सब वेरिएंट का खतरा मंडराने लगा है। ये वेरिएंट्स हैं बीए.4 और बीए.5, जिन्हें दक्षिण अफ्रीका में पाया गया है। फिलहाल विश्व स्वास्थ्य संगठन इस पूरे मामले पर निगरानी रखे हुए है। पहले से ही ओमिक्रोन के बीए.1 और बीए.2 सब वेरिएंट्स पर नजर रखी जा रही है।
दक्षिण अफ्रीका स्थित सेंटर फॉर एपिडेमिक रिस्पॉन्स एंड इनोवेशन (सेरी)के निदेशक टुलिया डी ओलिवेरा का कहना है कि बीए.4 और बीए.5 में भी ठीक बीए.2 जैसे तेजी से फैलने वाले गुण हैं। उन्होंने ट्विटर पर इन नए सब वेरिएंट्सके सामने आने से जुड़ा डेटा भी शेयर किया है।
New Omicron BA.4 & BA.5 detected in South Africa, Botswana, Belgium, Germany, Denmark, and U.K. Early indications that these new sublineages are increasing as a share of genomically confirmed cases in SA. No cause for alarm as no major spike in cases, admissions or deaths in SA pic.twitter.com/PrcBWpVWtl
— Tulio de Oliveira (@Tuliodna) April 11, 2022
ओलिवेरा का कहना है कि इन नए सब वेरिएंट्स में मौजूद स्पाइक प्रोटीन में से एक डेल्ट, कप्पा और एप्सीलोन नाम के वेरिएंट्स में भी मौजूद था।
डब्लूएचओ का कहना है कि उन्होंने बीए.4 और बीए.5 को ट्रैक करना शुरू कर दिया है क्योंकि उनमें हुए अतिरिक्त म्यूटेशन को समझने के लिए और अध्ययन की जरूरत है ताकि ये पता लगाया जा सके कि उनका इंसानी शरीर पर क्या प्रभाव पड़ रहा है।
पिछले सप्ताह ब्रिटेन की हेल्थ सिक्योरिटी एजेंसी ने ये जानकारी दी थी कि 10 जनवरी से 30 मार्च के बीच दक्षिण अफ्रीका, डेनमार्क, बोत्सवाना, स्कॉटलैंड और इंग्लैंड में बीए.4 पाया गया था। वहीं बीए.5 के सभी मामले पिछले सप्ताह दक्षिण अफ्रीका से ही सामने आए हैं।
बोत्सवाना के स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि उन्होंने बीए.4 और बीए.5 के चार मामलों की पहचान की है और ये सभी संक्रमित लोग 30 से 50 साल की उम्र के बीच के हैं। इन सभी लोगों को वैक्सीन की दोनों डोज लगी हुई है और इनमें हल्के लक्षण दिखाई दे रहे हैं।
ओलिवेरा के मुताबिक, दक्षिण अफ्रीका में इन सब वेरिएंट्स के मामलों में तेजी से वृद्धि को लेकर कोई खतरे की बात नहीं है और न ही अस्पतालों या फिर मौतों में इसका कोई बड़ा कारक जिम्मेदार है। .
ट्वीट के मुताबिक, दक्षिण अफ्रीका में ज्यादातर लोगों को वैक्सीन की दोनों डोज लग चुकी है, जिसकी वजह से ज्यादातर आबादी के पास इम्यूनिटी है और ये सबसे बड़ी वजह है कि वहां इंफ्केशन कम है। साथ ही अस्पताल में भर्ती होने और मौत का खतरा भी डेल्टा और ओमिक्रोन बीए.1 के मुकाबले कम है।
उन्होंने ये भी कहा कि फिलहाल ये समझना बहुत ही जल्दबाजी होगी कि इन दो सब वेरिएंट्स में म्यूटेशन कैसे महामारी को प्रभावित करते हैं।