समयपूर्व प्रसव का जोखिम घटाता है ओमेगा-3 फैटी एसिड

गर्भवती महिलाओं को सभी तरह के प्रोटीन और विटामिन के सेवन की सलाह दी जाती है। इसमें एक महत्‍वपूर्ण अवयव है ओमेगा-3 फैटी एसिड। यह बच्‍चे के दिमाग के सही तरीके से विकास के लिए जरूरी है।

WrittenBy

Written By: Anshumala | Updated : November 17, 2018 10:14 AM IST

गर्भावस्था के दौरान ओमेगा-3 अोमेगा-3 फैटी एसिड का ज्यादा मात्रा में सेवन समयपूर्व प्रसव के जोखिम को घटाता है। गर्भावस्था की अवधि 38 से 42 हफ्ते की होती है। समय से जितना पहले एक बच्चे का जन्म हो जाता है, उससे उसकी मौत या खराब स्वास्थ्य का जोखिम उतना ही बढ़ जाता है।

समय पूर्व प्रसव से पैदा हुए बच्चों में दृष्टि दोष, विकास में देरी व सीखने की दिक्कत व दूसरे कई जोखिमों का अधिक खतरा होता है।

गर्भनिरोधक गोली की जगह खाएं ये एक चीज, नहीं होंगी प्रेगनेंट

शोध के निष्कर्षों से पता चलता है कि रोजाना के आहार में लंबी श्रंखला वाला ओमेगा-3 लेने से समयपूर्व प्रसव (37 हफ्ते से कम का बच्चा) का जोखिम 11 फीसदी कम होता है।

साउथ ऑस्ट्रेलियन हेल्थ एंड मेडिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट (एसएएचएमआरआई) की एसोसिएट प्रोफेसर फिलिप्पा मिड्डलेटन ने कहा, "समयपूर्व प्रसव को रोकने के लिए बहुत से विकल्प नहीं हैं, ऐसे में गर्भवती महिलाओं व स्वास्थ्य पेशेवरों, जो उनकी देखभाल करते हैं, के लिए यह नए निष्कर्ष काफी महत्वपूर्ण है।"

सिजेरियन डिलीवरी के बाद संक्रमण से बचना है, तो यूं रखें अपना ख्याल

क्यों जरूरी है प्रेगनेंसी में ओमेगा-3 फैटी एसिड

गर्भवती महिला को खानपान का विशेष ध्‍यान देना चाहिए, क्‍योंकि उसे अपनी नियमित पौष्टिकता के साथ गर्भ में पल रहे बच्‍चे के पोषण और विकास का भी ध्‍यान रखना होता है। अगर इसमें कोई चूक हो जाए तो इससे बच्‍चे का विकास तो अवरुद्ध होगा साथ ही उसका कोई अंग अविकसित ही रहेगा। इसलिए गर्भवती महिलाओं को सभी तरह के प्रोटीन और विटामिन के सेवन की सलाह दी जाती है। इसमें एक महत्‍वपूर्ण अवयव है ओमेगा-3 एसिड। यह बच्‍चे के दिमाग के सही तरीके से विकास के लिए जरूरी है।

प्रेगनेंसी में गलती से भी न पिएं इन्हें, शिशु की सेहत के लिए हो सकता है हानिकारक

ओमेगा-3 फैटी एसिड के स्रोत

शाकाहारी और मांसाहारी दोनों स्रोतों से हमें ओमेगा-3 फैटी एसिड मिलता है। यह अखरोट जैसे सूखे मेवों, मूंगफली, अलसी, सूरजमुखी, सरसों के बीज, कनोडिया या सोयाबीन, स्प्राउट्स, टोफू, गोभी, हरी बीन्स, ब्रोकली, शलजम, हरी पत्तेदार सब्जियों और स्ट्रॉबेरी, रसभरी जैसे फलों में काफी मात्रा में पाया जाता है। टूना, साल्मन, हिलसा, सार्डिन जैसी मछलियां, शैवाल, झींगा जैसे सी-फूड ओमेगा-3 के ईपीए और डीएचए प्रकार के अच्छे स्रोत हैं। इसके अलावा गाय का दूध, मूंगफली, अंडे का सेवन भी फायदेमंद है। यदि आप प्रेगनेंट हैं, तो इनका सेवन जरूर करें ताकि बच्चे का विकास बेहतर तरीके से हो सके। हालांकि, इसका सेवन डायटिशियन की सलाह पर ही करें, क्योंकि ओमेगा-3 फैटी एसिड एक प्रकार की वसा है और अधिक फैट लेना मोटापे का कारण बन सकता है।

इनपुट: (आइएएनएस हिंदी)

Add The Health Site as a Preferred Source Add The Health Site as a Preferred Source