पुरुषों की सेहत के लिए अच्छे हैं पुराने दोस्त

क्या करते हैं दोस्त कि लंबी हो जाती है पुरुषों की उम्र

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Written By: Yogita Yadav | Updated : June 15, 2018 5:21 PM IST

पुराने दोस्‍त न सिर्फ आपकी पुरानी स्‍मृतियों को सहेज कर रखते हैं, बल्कि इनके पास आपकी लंबी उम्र की चाबी भी छुपी है। मेन्‍स हेल्‍थ वीक में निकाले कुछ समय अपने पुराने दोस्‍तों के लिए।  आंकड़े बताते हैं कि महिलाओं की तुलना में पुरषों में गंभीर रोगों से ग्रस्‍त होने का खतरा ज्‍यादा रहता है। इसकी मुख्‍य वजह है अपनी हेल्‍थ को प्राथमिकता के सबसे निचले पायदान पर रखना। व्‍यस्‍तता, लापरवाही और खराब आदतों के चलते पुरुषों की औसत आयु महिलाओं की औसत आयु की तुलना में पांच साल कम हो रही है।

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मेन्‍स हेल्‍थ मंथ

पुरुषों और लड़कों में अपनी हेल्‍थ के प्रति जागरुकता पैदा करने के लिए जून 11 से 17 तक मेन्‍स हेल्‍थ वीक सेलिब्रेट किया जाता है। कई देशों में तो जून के पूरे माह को ही मेन्‍स हेल्‍थ मंथ घोषित किया गया है। इस दौरान पुरुषों की हेल्‍थ से जुड़े विभिन्‍न जागरुकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इसके साथ ही पुरुषों को चिकित्‍सा संबंधी सलाह और बचाव के विभिन्‍न उपाय भी बताए जाते हैं।

पुरुषों में होने वाली मुख्‍य बीमारियां

सर्वेक्षण बताते हैं कि पुरुषों में महिलाओं की तुलना में हृदय संबंधी बीमारियों की संभावना कई गुणा ज्‍यादा होती है। हाई बीपी एवं हाई कोलेस्ट्रोल भी हृदय संबंधी बीमारियों के खतरे को बढ़ा देता है। इससे बचाव के लिए जरूरी है कि 25 साल की उम्र से ही हर पांच वर्ष पर कोलेस्ट्रॉल की जांच करवाते रहें। हर रोज कम से कम 30 मिनट वर्कआउट जरूर करें। इसके अलावा डायबिटीज, प्रोस्‍टेट कैंसर और डिप्रेशन वे बीमारियां हैं जो पुरुषों में हाल के वर्षों में लगातार बढ़ रही हैं। सेलिब्रेट करें हेल्‍थ इस मेन्‍स हेल्‍थ वीक सेलिब्रेट करने का सबसे बढि़या तरीका है कि अपनी हेल्‍थ सेलिब्रेट करें। वे आदतें अपनाएं जिनसे स्‍वास्‍थ्‍य बेहतर हो और उन आदतों से परहेज करें जो स्‍वास्‍थ्‍य के लिए खतरा हैं।

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ढाई घंटे वर्कआउट

इसी सप्‍ताह से यह नियम बना लें कि हर सप्‍ताह कम से कम ढाई घंटे वर्कआउट जरूर करना है। इसके लिए आपको ज्‍यादा कुछ नहीं करना बस हर रोज 30 मिनट का समय शारीरिक श्रम को देना है। इसके लिए चाहें जिम जाएं, स्विमिंग करें या बच्‍चों के आउटडोर गेम्‍स खेलें। इससे बीपी और कोलेस्ट्रोल लेवल नियंत्रित रहता है।

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नशे को कहें न

अल्‍कोहल अब आदत के साथ साथ एक तरह की सामाजिकता भी बन गया है। इसलिए यह जानते हुए भी कि अल्‍कोहल सेहत के लिए खतरनाक है, ज्‍यातादर लोग उसे न नहीं कह पाते। पर घबराने की जरूरत नहीं, किसी के सम्‍मान को ठेस पहुंचाए बिना भी आप अल्‍कोहल फ्री वीक सेलिब्रेट कर सकते हैं। इसके लिए बस जरूरत है दृढ़ इच्‍छाशक्ति और अपनी बात रखने की कला की। उन जगहों पर जाना परहेज करें जहां अल्‍कोहल कल्‍चर है। इसके साथ उन दोस्‍तों को भी इस सप्‍ताह न कह सकते हैं, जिनकी मुलाकात का उद़देश्‍य सिर्फ जाम छलकाना ही होता है। कॉरपोरेट मजबूरियों के चलते अगर कभी ऐसी जगह पर जाना भी पड़े तो यातायात का वह नियम पालन करें जिसमें कहा गया है कि डोन्‍ट मिक्‍स डृाईविंग विद अल्‍कोहल। इस तरह न केवल आप अल्‍कोहल फ्री वीक मनाकर अपनी हेल्‍थ सेलिब्रेट कर सकते हैं, बल्कि दूसरों के लिए भी रोल मॉडल बन सकते हैं।

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दोस्‍तों की बैठक

पुराने दोस्‍तों से मिलना हेल्‍दी लाइफ की चाबी है। कई बार काम और परिवार की जिम्‍मेदारियों में हम इतने व्‍यस्‍त हो जाते हैं कि अपने पुराने दोस्‍तों को भूल ही जाते हैं। जबकि यही दोस्‍त हमें तमाम तरह के अवसाद से बचाकर खुशमय जीवन बिताने में मददगार साबित होते हैं। अब तो शोध भी इस बात को मान रहे हैं। विभिन्‍न अध्ययनों से यह सामने आया है अकेलापन 15 सिगरेट या शराब पीने से भी ज्‍यादा खतरनाक है। ब्रिगेम यंग यूनिवर्सिटी में मनोवैज्ञानिक अध्‍ययनों के प्रोफेसर और लेखक जूलियन होल्ट-लुनस्टेड तो इसे मोटापे से भी ज्‍यादातर खतरनाक मानती हैं। इसलिए बेहतर हेल्‍थ के लिए जरूरी है कि पुराने दोस्‍तों से मिलते-जुलते रहें। संपर्क सिर्फ ऑनलाइन ही न हो, ब‍ल्कि सप्‍ताह में या महीने में इन दोस्‍तों के साथ बैठकी और गपबाजी का भी मजा लें।

चित्रस्रोत: Shutterstock.

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