आज से दिल्ली में होगी डब्ल्यूसीएम-बीएमएसएस की शुरूआत !

बैरिएट्रिक मेटाबोलिक सर्जरी को मान्यता दिलाने के लिए हो रहा है आयोदबैरिएट्रिक मेटाबोलिक सर्जरी को मान्यता दिलाने के लिए

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Written By: Sadhna Tiwari | Updated : March 22, 2018 1:41 PM IST

दुनिया भर से भारत में जमा हो रहे 100 से अधिक बैरिएट्रिक सर्जन केन्द्र सरकार से मोटापे को बीमारी और गैर-कास्मेटिक समस्या घोषित करने की मांग करेंगे ताकि बैरिएट्रिक सर्जरी को हेल्थ बीमा के दायरे में लाया जा सके।

ये बैरिएट्रिक सर्जन नई दिल्ली में 22 मार्च से शुरू हो रही पहली विश्व बैरिएट्रिक मेटाबोलिक सर्जरी मानकीकरण सहमति बैठक (डब्ल्यूसीएम-बीएमएसएस) में हिस्सा लेने के लिए जमा हो रहे हैं। इस बैठक को 23 मार्च को केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जे पी नड्डा भी संबोधित करेंगे। इस बैठक के दौरान केन्द्रीय मंत्री को एक श्वेत पत्र एवं अपील पत्र सौंपे कर उनसे मोटापे को बीमारी एवं गैर कास्मेटिक समस्या घोषित करने की मांग की जाएगी।

डब्ल्यूसीएम-बीएमएसएस की आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ. मोहित भंडारी ने कहा कि बैरिएट्रिक सर्जरी के बारे में एक खास तरह की भ्रांति कायम है और इस भ्रांति के कारण ज्यादातर सरकारी संस्थाएं मोटापा घटाने के लिए की जाने वाली बैरिएट्रिक सर्जरी को कास्मेटिक सर्जरी मानती है। हालांकि मेडिकल कौंसिल आफ इंडिया (एमसीआई) ने बैरिएट्रिक सर्जरी को सर्जिकल गैस्ट्रोइंटेरोलॉजी के तहत की जाने वाली चिकित्सकीय प्रक्रिया माना है और इसलिए ऐसी सर्जरी पर होने वाले खर्च की प्रतिपूर्ति बीमा कंपनियों द्वारा की जानी चाहिए। केन्द्र सरकार ने भी बैरिएट्रिक एवं मेटाबोलिक सर्जरी पर होने वाले खर्च की प्रतिपूर्ति करना शुरू कर दिया है और लेकिन ज्यादातर बीमा कंपनियां ऐसी सर्जरी की प्रतिपूति नहीं करती है और ऐसे में देषभर में इस बारे में एकसमान बीमा नियम बनाए जाने की जरूरत है।

ओबेसिटी सर्जरी सोसायटी आफ इंडिया (ओएसएसआई) के अध्यक्ष डॉ. अरूण प्रसाद ने कहा कि मोटापा होने तथा भारत में टाइप 2 मधुमेह के संकट को नए सिरे से समझने की जरूरत है। दुनिया में मोटापे की समस्या के मामले में भारत चीन और अमरीका के बाद तीसरे नम्बर पर है।

डॉ. अरूण प्रसाद ने कहा कि भारत में मोटापे की समस्या के समाधान के रास्ते में सबसे प्रमुख चुनौति मोटापे के कारणों, मोटापे के वैज्ञानिक उपचार, बढ़ रहे टाइप 2 मधुमेह आदि के बारे में जागरूकता का अभाव है। इसके अलावा सरकार द्वारा मोटापे को बीमारी मानने से इंकार किया जाना तथा मुख्य बीमा कंपनियों द्वारा मोटापे के उपचार पर बीमा लाभ नहीं दिया जाना भी मोटापे की समस्या के समाधान के मार्ग में प्रमुख बाधा है। वक्त का तकाजा है कि सभी हितधारक एक साझे मंच पर आएं तथा मोटापे की इस बीमारी को परिभाशित करें, इस बीमारी के बोझ का आकलन करें तथा इसके उपचार की एक नीति सुझाएं एवं इसके उपचार के संबंध में दिषानिर्देष तय करें ताकि बीमा कंपनियां एवं सरकार दोनों ही मोटापे के उपचार को मेडिकल बीमा के दायरे में लाएं।

डॉ. मोहित भंडारी ने बताया कि नई दिल्ली में 22 से 24 मार्च तक होने वाली बैठक में दुनिया भर से 100 से अधिक बैरिएट्रिक सर्जन हिस्सा ले रहे हैं। इस बैठक को 52 अंतर्राष्ट्रीय बैरिएट्रिक सर्जरी सोसायटियों का समर्थन प्राप्त है। विभिन्न सोसायटियों के अध्यक्ष इस बैठक में अपने-अपने देषों में मोटापे के उपचार की स्थिति तथा मेडिकल बीमा के बारे में जानकारी देंगे।

इस कार्यक्रम के दौरान इन बातों पर मुख्य रूप से ध्यान दिया जाएगा:

  • बैरिएट्रिक सर्जन सरकार से मोटापे को ’बीमारी और गैर कास्मेटिक समस्या’ घोषित करने की मांग करेंगे
  • मोटापा घटाने की सर्जरी में भी मिले मेडिकल बीमा: बैरिएट्रिक सर्जन
  • बैरिएट्रिक मेटाबोलिक सर्जरी मानकीकरण के लिए पहली विष्व सहमति बैठक (डब्ल्यूसीएम-बीएमएसएस) कल से राष्ट्रीय राजधानी में शुरू होगी। दुनिया भर से 100 से अधिक बैरिएट्रिक सर्जन हिस्सा लेंगे।
  • स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जे पी नड्डा 23 मार्च को बैठक को संबोधित करेंगे।

स्रोत: Press Release.

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