मोटापा भी बनता है अवसाद का कारण, शोध में फि‍र हुआ दावा

साझा अध्‍ययन में यह बात और पुख्‍ता हुई कि बहुत पतले पुरुषों और बहुत मोटी महिलाओं में ज्‍यादा होता है अवसाद का जोखिम।

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Written By: Yogita Yadav | Published : November 16, 2018 3:01 PM IST

दक्षिण ऑस्ट्रेलिया विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों और ब्रिटेन में एक्सीटर विश्वविद्यालय के नए शोध के मुताबिक मोटापे से पड़ने वाले मनोवैज्ञानिक प्रभावों में अवसाद के जन्‍म लेने की संभावना भी बन जाती है।

लंबे समय से मोटापे और अवसाद के बीच के संबंध को महसूस किया जाता रहा है।  लेकिन अब ताजा  अध्ययन में लेखकों ने इस दावे को और पुख्‍ता कर दिया है कि मोटापे का मनोवैज्ञानिक प्रभाव भी होता है और इसका असर अनिश्चित सीमा तक हो सकता है। साझा टीम ने यह भी पाया कि उच्च बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) अवसाद को बढ़ाने का एक महत्‍वपूर्ण कारक बनता है।

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क्‍या कहते हैं आंकड़ें

मोटापे और अवसाद के आपसी संबंध का परीक्षण करने के लिए आनुवांशिक दृष्टिकोण लेते हुए, शोधकर्ताओं ने यूके बायोबैंक से डाटा हासिल किया, जिसमें कुल 500,000 लोग शामिल थे। इनमें से  48,000 से अधिक लोगों ने अस्पताल के रिकॉर्ड या स्वयं निरीक्षण में उदास होने के मानदंडों को पूरा किया। यह भी पढ़ें – ब्रिटेन में चिकित्‍सा विशेषज्ञों ने की पशुओं पर एंटीबायोटिक्‍स पर प्रतिबंध की मांग

इसके बाद उन्होंने उच्च बीएमआई से जुड़े 73 अन्‍य प्रभावों का भी निरीक्षण किया, जिनमें हृदय रोग और मधुमेह जैसी अन्य बीमारियां शामिल थीं। इन अनुवांशिक लक्षणों के चलते  अवसाद के जोखिम में बढ़ोतरी देखी गई, जिससे यह स्‍पष्‍ट हुआ कि जैविक या मनोवैज्ञानिक तंत्र दोनों एक-दूसरे पर प्रभाव डालते हैं। यह भी पढ़ें – वर्ल्‍ड डायबिटीज डे : बचपन में न घुल जाए मधुमेह की कड़वाहट

इसके अतिरिक्त, टीम ने 14 अन्य जेनेटिक्‍स वेरिएंट्स की भी पड़ताल की, जो शरीर की वसा के उच्च प्रतिशत से जुड़े हुए हैं, किंतु अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़े नहीं हैं। उन्होंने पाया कि ये वेरिएंट अवसाद से भी जुड़े थे, और यह अवसाद केवल मनोवैज्ञानिक तंत्र द्वारा समझाया जा सकता था।

अध्ययन की लेखक एलीना हाइपोनन ने एक बयान में कहा, "हमने उच्च शरीर द्रव्यमान सूचकांक (बीएमआई) से जुड़े जीन का उपयोग करके मोटापे से संबंधित स्वास्थ्य समस्याओं के प्रभाव से मोटापे के मनोवैज्ञानिक घटक को अलग किया है, लेकिन मधुमेह जैसी बीमारियों के न्‍यूनतम जोखिम के साथ।"

अनिवार्य रूप से, शोधकर्ता शारीरिक रूप से बीएमआई-अवसाद संबंधों के मनोवैज्ञानिक पहलुओं को "अलगाने" में सक्षम नहीं हो पाए।

महामारी न बन जाए मोटापा  

हाइपोनन ने समझाया, "ये जीन अवसाद के साथ दृढ़ता से जुड़े थे, क्योंकि उच्च बीएमआई और मधुमेह से जुड़े जीन," अधिक वजन होने से संबंधित स्वास्थ्य समस्याओं के साथ खासतौर से महिलाओं में अवसाद का कारण बनता है। विशेष रूप से महिलाओं में बहुत पतले पुरुष भी अधिक प्रवण होते हैं। बहुत पतली महिलाओं और सामान्‍य वजन के पुरुषों की तुलना में बहुत पतले पुरुषों में भी अवसाद का जोखिम ज्‍यादा देखा गया। मोटापे के जोखिमों की ओर संकेत करते हुए हाइपोनन कहती हैं कि मोटापा महामारी की तरह विश्‍व भर में छाया हुआ है, अनुमान है कि प्रत्येक वर्ष वैश्विक समुदाय को इस पर ट्रिलियन डॉलर खर्च होंगे।

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