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Written By: Atul Modi | Published : November 25, 2020 2:59 PM IST
मोटापे से ग्रस्त लोगों में COVID-19 होने का खतरा अधिक, जानिए क्यों है ऐसा?
जैसे कि वायरस हर रोज अधिक फैल रहा है और डॉक्टर्स अभी भी वैक्सीन बनाने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं। ऐसे में और भी जरूरी हो जाता है कि वायरस से बचने के लिए आवश्यक सभी सावधानियों का पालन किया जाए। यदि आप का बीएमआई 30 से अधिक लगभग 35 के बराबर है है तो आप को चौकन्ना हो जाना चाहिए। डॉक्टर्स के मुताबिक अभी तक मरने वाले लोगों के आंकड़ों में, उन लोगों की संख्या ज्यादा थी, जो मोटे थे और जिनको वेंटिलेटर की मदद लेनी पड़ी। शोध बताते हैं कि पूरी दुनिया में मोटे लोगों की संख्या बहुत तेजी से बढ़ रही है। जो कि पिछले कुछ सालों के मुकाबले दोगुनी है।
कोविड-19 का रिस्क, वायरस से संक्रमित होने पर बढ़ने की वजह से, मरीज को ठीक होने के लिए अधिक संघर्ष करना पड़ता है। साथ ही कुछ दवाइयां भी अपना असर दिखाना बंद कर देती हैं।
मोटापा बढ़ने के साथ-साथ अन्य बीमारियां भी शरीर में घर करने लगतीं हैं। जैसे कि हाइपरटेंशन, टाइप 2 डायबिटीज, लिवर संबंधी समस्याएं आदि। इसलिए जब आप कोरोनावायरस से संक्रमित होते हैं, तो यह बीमारियां भी सबसे पहले कोविड के सम्पर्क में आती हैं। इसलिए कोविड का रिस्क और अधिक बढ़ जाता है।
अनहेल्दी डाइट, जंक फूड का सेवन, एल्कोहल, हेल्दी फैट्स आदि, के सेवन से मोटापा बढ़ता है। यही नहीं हार्मोनल बदलाव या समस्याएं जैसे कि अंडरएक्टिव थायरॉयड, कुशिंग सिंड्रोम और पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस), कुछ कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स व एंटीडिप्रेसेंट्स की दवाओं के कारण भी वजन बढ़ जाता है।
जीन्स के कारण होने वाला प्रेडर-विली सिंड्रोम डिसऑर्डर भी, मोटापे का एक कारण हैं। ये वजन बढ़ाने के लिए किसी व्यक्ति की संवेदनशीलता में योगदान कर सकते हैं।
रिसर्च कहती हैं कि कोविड कुछ घातक रोगजनकों के लिए प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया में बाधा डाल सकता है। जिस कारण ओबेसिटी से ग्रस्त लोगों का इम्यून सिस्टम रेस्पॉन्स करना बन्द कर देता है और सूजन, ब्लड क्लाट, आदि समस्याएं हो जाती हैं। इस प्रकार की समस्याएं कोविड के लक्षणों को और भी भयंकर बना देती हैं। परन्तु कुछ डॉक्टर का मानना है कि मोटे लोगों पर दवाइयां असर नहीं करती कहना गलत है।
अधिकतर लोग जो ओबेसिटी के शिकार हैं और जिन की उम्र 18 से 34 वर्ष के बीच में है, उन्हे हाइपर टेंशन व डायबिटीज भी साथ में होती है। इस कारण उनके वायरस से जुड़े लक्षण और अधिक गंभीर हो जाते हैं। जिस कारण उनकी मृत्यु की संभावना भी अधिक बढ़ जाती है।