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मोटे बच्चों में टाईप 2 मधुमेह की संभावना अधिक, ऐसे बचाएं उन्‍हें डायबिटीज के पंजे से

मधुमेह के दो मुख्य प्रकार हैं -टाईप 1 और टाईप 2। दोनों तरह का मधुमेह किसी भी उम्र में हो सकता है, लेकिन बच्चों में टाईप 1 मधुमेह की संभावना अधिक होती है।

मोटे बच्चों में टाईप 2 मधुमेह की संभावना अधिक, ऐसे बचाएं उन्‍हें डायबिटीज के पंजे से
मधुमेह के दो मुख्य प्रकार हैं -टाईप 1 और टाईप 2। दोनों तरह का मधुमेह किसी भी उम्र में हो सकता है, लेकिन बच्चों में टाईप 1 मधुमेह की संभावना अधिक होती है। ©Shutterstock

Written by Yogita Yadav |Published : November 14, 2018 2:08 PM IST

डायबिटीज मेलिटस बेहद गंभीर मैटाबोलिक विकार है, जिसके चलते शरीर में शुगर यानी काबोर्हाइड्रेट का अपघटन सामान्य रूप से नहीं होता। इसका बुरा असर दिल, खून की वाहिकाओं, किडनी और न्यूरोलॉजिकल सिस्टम पर पड़ सकता है। कई सालों तक बीमारी के बाद व्यक्ति की देखने की क्षमता भी जा सकती है।

क्‍या कहते हैं विशेषज्ञ

नोएडा स्थित जेपी हॉस्पिटल में एंडोक्राइनोलॉजी विभाग के वरिष्ठ कंसल्टेंट और समन्वयक डॉ. निधि मल्होत्रा का कहना है कि मधुमेह के दो मुख्य प्रकार हैं -टाईप 1 और टाईप 2। दोनों तरह का मधुमेह किसी भी उम्र में हो सकता है, लेकिन बच्चों में टाईप 1 मधुमेह की संभावना अधिक होती है। यह भी पढ़ें - वर्ल्‍ड डायबिटीज डे : बचपन में न घुल जाए मधुमेह की कड़वाहट

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पहचानें इसके लक्षण

"बच्चों को आम तौर पर थकान, सिर में दर्द, ज्यादा प्यास लगने, ज्यादा भूख लगने, व्यवहार में बदलाव, पेट में दर्द, बेवजह वजन कम होने, खासतौर पर रात के समय बार-बार पेशाब आने, यौन अंगों के आस-पास खुजली होने पर उनमें मधुमेह के लक्षणों को पहचाना जा सकता है। बच्चों में टाईप 1 डायबिटीज के लक्षण कुछ ही सप्ताह में तेजी से बढ़ जाते हैं। टाईप 2 मधुमेह के लक्षण धीरे-धीरे बढ़ते हैं और कई मामलों में महीनों या सालों तक इनका निदान नहीं हो पाता।" यह भी पढ़ें – एशिया-प्रशांत क्षेत्र में 48.6 करोड़ लोग कुपोषित और मोटे, ऐसे करें वेेट मैनेजमेंट

ये है उपचार

"डायबिटीज से पीड़ित बच्चों को इंसुलिन थेरेपी दी जाती है। अक्सर निदान के पहले साल में बच्चे को इंसुलिन की कम खुराक दी जाती है। इसे 'हनीमून पीरियड' कहा जाता है। आमतौर पर बहुत छोटे बच्चों को रात में इंजेक्शन नहीं दिए जाते, लेकिन उम्र बढ़ने के साथ रात को इंसुलिन शुरू किया जाता है।" यह भी पढ़ें – डायबिटीज की राजधानी न बन जाए भारत, इससे बचने को अपनाएं ये आठ घरेलू नुस्‍खे

मोटे बच्‍चों में है टाइप 2 का जोखिम

उन्होंने कहा कि मोटे बच्चों में टाईप 2 मधुमेह की संभावना अधिक होती है। गतिहीन जीवनशैली के कारण शरीर इंसुलिन और रक्तचाप पर नियन्त्रण नहीं रख पाता। चीनी से युक्त खाद्य एवं पेय पदार्थों का सेवन सीमित मात्रा में करें। ज्यादा चीनी से बने खाद्य पदार्थों के सेवन ने वजन बढ़ता है, जो शरीर में इंसुलिन स्तर के लिए खतरनाक है। विटामिन और फाईबर से युक्त संतुलित, पोषक आहार के सेवन से टाईप 2 डायबिटीज की संभावना को घटाया जा सकता है। यह भी पढ़ें – क्या आप भी हैं डायबिटीज की बॉर्डर लाइन पर, घबराएं नहीं, बस रूटीन करें ठीक 

ऐसे बचाएं नन्‍हें मुन्‍नों को

  • डायबिटीज से बचाव का सबसे बेहतर तरीका है कि उन कारणों से बचा जाए, जो डायबिटीज के लिए जिम्‍मेदार हैं। बच्‍चों को हरी पत्‍तेदार सब्जियां, मौसमी फल और दालें प्रचूर मात्रा में दी जाएं। बचपन से ही उन्‍हें शारीरिक श्रम की आदत डाली जाएं। ताकि जो पौष्टिक आहार वे ले रहे हैं, शरीर में उन्‍हें बर्न करने अर्थात पचाने की क्षमता भी हो।
  • घर और स्‍कूल इन दोनों ही जगहों पर पौष्टिक भोजन की बजाय जंक फूड की उपलब्‍धता सहज हो गई है। इस स्थिति को उलटना होगा। जंक फूड जितना मिलने में सुलभ है, सेहत के लिए उतना ही खतरनाक है। बच्‍चों को सेहतमंद रखने के लिए इससे दूरी बनाए रखें।
  • बच्‍चों के स्‍वास्‍थ्‍य के लिए यह बहुत जरूरी है कि व्‍यायाम को उनकी दिनचर्या का हिस्‍सा बनाया जाए। उन्‍हें बंद कमरों से बाहर निकल कर ऐसे खेल खेलने के लिए प्रोत्‍साहित किया जाए, जिसमें शरीर का व्‍यायाम हो।
  • अगर माता या पिता में से किसी को भी डायबिटीज है तो ऐसे बच्‍चों के डायबिटीज की चपेट में आने का जोखिम बढ़ जाता है। इसलिए जरूरी है कि समय-समय पर डॉक्‍टरी परामर्श लेते रहें।
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