
रश्मि उपाध्याय
रश्मि उपाध्याय साल 2014 से मीडिया क्षेत्र से जुड़ी हैं और TheHealthSite.Com में बतौर एडिटर काम कर रही हैं। इन्हें ... Read More
Written By: Rashmi Upadhyay | Published : September 1, 2021 3:47 PM IST
कोरोनावायरस के बाद डेल्टा वेरिएंट (Delta Variant) और अब C.1.2 वेरिएंट ने दहशत फैला दी है। साउथ अफ्रीका और चीन जैसे कई देशों के लोगों को संक्रमित कर चुका C.1.2 वेरिएंट खतरनाक होता जा रहा है। हालांकि अभी तक हमारे देश भारत में किसी भी कोरोना सैंपल में C.1.2 वेरिएंट नहीं मिला है। डॉक्टर्स का कहना है कि यह वेरिएंट बहुत संक्रामक और खतरनाक है। हालांकि WHO के साइंटिस्ट सी.1.2 (C.1.2 Variant) की तुलना में डेल्टा वेरिएंट को ज्यादा खतरनाक और लंबे समय पर रहने वाला बता रहे हैं। C.1.2 वेरिएंट अब तक कुल 6 देशों में पाया जा चुका है जिसमें अफ्रीका, यूरोप और एशिया के 7 देश शामिल हैं। जानकारी के अनुसार कोरोना वायरस का सी.1.2 वेरिएंट दक्षिण अफ्रीका में पहली बार मई में मिला था।
हालांकि अभी तक C.1.2 पर पूरी तरह से सिर्च नहीं हो पाई है। हालांकि अभी तक विश्व स्वास्थ्य संगठन ने सी.1.2 वेरिएंट को वेरिएंट ऑफ इंटरेस्ट या वेरिएंट ऑफ कंसर्न के बीच में वर्गीकृत नहीं किया है। वहीं, द गार्डियन ने सिडनी में इम्यूनोलॉजी और संक्रामक रोगों में एक वायरोलॉजिस्ट डॉ. मेगन स्टेन के हवाले से कहा, "हम जब भी किसी खास म्यूटेशन को देखते हैं, तो यह जानने की कोशिश करते हैं कि यह वेरिएंट क्या करने वाला है और इसका रिएक्शन कैसा होगा।"
इससे पहले वैज्ञानिक भी दावा कर चुके हैं और स्टडी में भी साफ हो चुका है कि C.1.2 इतना खतरनाक है कि इस पर वैक्सीन का असर करना बहुत मुश्किल है। दक्षिण अफ्रीका में नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर कम्युनिकेबल डिजीज (एनआईसीडी) और क्वाज़ुलु-नेटाल रिसर्च इनोवेशन एंड सीक्वेंसिंग प्लेटफॉर्म (केआरआईएसपी) के वैज्ञानिकों ने कहा कि देश में मई महीने में पहली बार इस वेरिएंट का पता चला था। वैज्ञानिकों ने कहा कि यह कोविड वेरिएंट 13 अगस्त तक चीन, डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो, मॉरीशस, यूके, न्यूजीलैंड, पुर्तगाल और स्विटजरलैंड में पाया जा चुका था। वैज्ञानिकों ने दक्षिण अफ्रीका में हर महीने C.1.2 जीनोम की संख्या में लगातार वृद्धि देखी है।
मई में जहां जीनोम सीक्वेंस 0.2 प्रतिशत था वो जून में बढ़कर 1.6 प्रतिशत हुआ और फिर जुलाई में 2 प्रतिशत तक बढ़ गया। स्टडी के लेखक का कहना है कि शुरुआती पहचान के दौरान देश में बीटा और डेल्टा वेरिएंटके साथ देखी गई वृद्धि समान है।" शोधकर्ताओं का यह भी कहना है कि दुनिया में अब तक मिले वेरिएंट ऑफ कंसर्न और वेरिएंट ऑफ इंट्रेस्ट की तुलना में C.1.2 में ज्यादा म्यूटेशन देखने को मिला है। सिर्फ यही नहीं, वैज्ञानिकों का कहना है कि ये वेरिएंट इतना संक्रामक है कि वैक्सीन को भी चकमा दे सकता है। स्टडी में कहा है कि दक्षिणी अफ्रीका में हर महीने C.1.2 जीनोम की संख्या बढ़ रही है।