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Written By: Mousumi Dutta | Published : November 23, 2017 10:19 AM IST
दिल्ली हाईकोर्ट ने सेंट्रल केंद्रीय सरकार को ये आदेश दिया है कि कोई भी दवा जिस में स्टेरॉयड हो उसको बिना डॉक्टर के प्रेस्क्रिप्शन के बेच या खरीद नहीं सकते। हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर मिनस्ट्री और सेंट्रल ड्रग स्टैन्डर्स एंड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (Health and Family Welfare Ministry and the Central Drug Standards and Control Organization (CDSCO) ने इस फाइल की सुनवाई को जनवरी 23 तक स्थगित की है। ये पिेटिशन इंडियन एसोसियेशन ऑफ डर्माटोलोजिस्ट्स, वेनेरियोलॉजिस्ट एंड लेप्रोलॉजिस्ट (Indian Association of Dermatologists, Venereologists and Leprologists (IADVL) के माने हुए डर्माटोलॉजिस्ट और स्किन स्पेशेलिस्ट ने फाइल किया है कि जिन स्किन क्रीम में स्टेरॉयड रहेगा जो पिग्मेन्टेशन, खुजली, फेयरनेस और सूजन को कम करनेवाले क्रीम बनाने वाले और बेचने वालों पर दायर किया है।
अधिवचन या प्ली में कहा गया है कि बिना जांच किये अवैज्ञानिक और नुकसान पहुँचाने वाले कॉर्टिकोस्टेरॉयड सिंगल मोल्युकल के रूप में या एन्टीफंगल या एन्टीबैक्टिरीयल के रूप में खरीदे और बेचे जा रहे हैं। देश में इन टॉपिकल कॉर्टिकोस्टेरॉयड का इस्तेमाल गलत तरीके से किया जा रहा है। ये एन्टीबायोटिक या एन्टीफंगल स्किन क्रीम स्किन के कलर को हल्का करने या गोरा करने का दावा करने के साथ-साथ खुजली या सूजन तक कम करने का दावा करते हैं।
ऐसे क्रीम लगाने से बच्चों विकास पर बाधा उत्पन्न होने के साथ-साथ ग्रोन एरिया में फंगल इंफेक्शन, पुरूषों के प्राइवेट पार्ट्स में डर्माटोफाइटोसेस होने का खतरा होता है और टॉपिकल स्टेरॉयड से चेहरा को भी नुकसान पहुँच सकता है। प्ली में ये भी कहा गया है कि मेगलो प्रिमियम फेयरनेस क्रीम और पर्ल ब्यूटी वाइटेनिंग फेयरनेस क्रीम जैसे हर्बल प्रोडक्ट में भी स्टेरॉयड होता है।
भारत के 800,000 दवाई के दुकानों में वे बॉक्स में लिखे चेतावनी को नजरअंदाज करके बिना प्रेसक्रिप्शन के बेच रहे हैं।
सरकार ने ये पिटिशन शेड्युल एच के अंतर्गत ड्रग एंड कॉज़्मेटिक रूल्स 1945 के दायर किया है। शेड्यल एच के अंतर्गत ये पांबदी दायर किया जाता है कि बिना प्रिस्क्रिप्शन के बेचना यहां तक कि विज्ञापन तक नहीं दे सकते।
सौजन्य: IANS
चित्र स्रोत: Shutterstock
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