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इंसानों में  नियोकोव के प्रभाव के नही मिले सबूत,डॉक्टरों ने कहा,'नहीं है इस नये वेरिएंट से घबराने की ज़रूरत'

एक्सपर्ट्स ने कहा है कि, वर्तमान में, कोई प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं है कि नियोकोव मानव शरीर को प्रभावित करता है और हमें घबराना या तनाव नहीं लेना चाहिए।

Written by Sadhna Tiwari |Updated : January 30, 2022 10:19 AM IST

कोरोना वायरस के नये वेरिएंट 'नियोकोव' (NeoCov) के बारे में डॉक्टरों ने लोगों को सलाह दी है कि वे इससे घबराएं नहीं। बता दें कि कुछ दिन पहले ही इस नए वेरिएंट की रिपोर्ट सामने आयी है जिसकी खोज चीन के वुहान विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने की और उनका दावा है कि दक्षिण अफ्रीका के चमगादड़ों की आबादी में इस वायरस का पता चला है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, यह वायरस केवल इन जानवरों के बीच फैलने के लिए जाना जाता है, इस प्रकार ने सार्स-सीओवी-2 वायरस की तरह ही मानव कोशिकाओं में प्रवेश करने की क्षमता दिखाई है।

इंसानों में  नियोकोव के प्रभाव के नही मिले सबूत

नियोकोव के बारे में राष्ट्रीय और महाराष्ट्र के कोविड -19 टास्कफोर्स के सदस्य डॉ राहुल पंडित ने कहा, "वर्तमान में, कोई प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं है कि नियोकोव मानव शरीर को प्रभावित करता है और हमें घबराना या तनाव नहीं लेना चाहिए।"

मुंबई के फोर्टिस अस्पताल के निदेशक-क्रिटिकल केयर, पंडित ने कहा, "दुनिया में ऐसे कई वायरस हैं जिनकी खोज की जानी बाकी है और जिनकी विशेषताओं का पता नहीं है। हम एक चुनौतीपूर्ण समय से गुजर रहे हैं और चल रहे कोविड-19 महामारी के प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। मैं लोगों को सलाह देता हूं कि वे घबराएं नहीं, अपना बचाव रखें और कोविड-19 उपयुक्त प्रोटोकॉल का पालन करें।"

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शोधकर्ताओं ने कहा, "यह मनुष्यों के लिए खतरनाक बनने से केवल एक उत्परिवर्तन दूर है।" लेकिन, सर गंगा राम अस्पताल, नई दिल्ली के डॉ. धीरेन गुप्ता ने कहा कि मनुष्यों के लिए वेरिएंट का संचरण अभी भी एक 'वैज्ञानिक अटकलें' और 'परिकल्पना' है।

यह नियोकोव सार्स-सीओवी वायरस (सर्बेकोवायरस) से बहुत अलग है और मेरबेकोवायरस से संबंधित है जो एक अलग जीन्स है।"

नियोकोव से मृत्यु की बातों पर ना करे विश्वास

गुप्ता ने कहा, "यह मानव एसीई2 को संक्रमित नहीं कर सकता (वैज्ञानिक अनुमान लगा रहे हैं कि क्या यह एसएआरएस के साथ जुड़ सकता है और मनुष्यों को प्रभावित करना शुरू कर सकता है)। यह वैज्ञानिकों द्वारा बनाई गई एक परिकल्पना है (जो विज्ञान में असामान्य नहीं है)।" उन्होंने कहा कि यह सिद्धांत कि 'तीन में से एक की मृत्यु हो सकती है, केवल एक परिकल्पना है, जिसे सोशल मीडिया ने सुर्खियां बटोरीं'। गुप्ता ने कहा, "यह सिर्फ एक परिकल्पना है जो सनसनीखेज प्रलय के दिन की भविष्यवाणियों में बदल रही है।"

यहां तक कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने भी कहा है कि क्या नियोकोव कोरोना वायरस मनुष्यों के लिए खतरा बन गया है, इस सवाल पर और अध्ययन की आवश्यकता है।

(आईएएनएस)

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