अब टाइप-1 Diabetes में नहीं पड़ सकती इंसुलिन की ज़रूरत!

भारतीय डॉक्टरों ने की Diabetes के इलाज से जुड़ी महत्वपूर्ण खोज

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Written By: Editorial Team | Updated : February 22, 2018 12:45 PM IST

डायबिटीज़ के इलाज के मामले में भारतीय डॉक्टरों ने एक महत्वपूर्ण व मददगार खोज की है। डॉक्टरों के मुताबिक इस खोज से मधुमेह या डायबिटीज़ के प्रकार का पता कर उसका इलाज आसानी से किया जा सकता है। उनका कहना है कि अक्सर डायबिटीज़ के मरीज़ों को इंसुलिन लेना पड़ता है जबकि टाइप-1 डायबिटीज़ का उपचार बगैर इन्सुलिन के संभव है। 'बीएमसी मेडिकल जेनेटिक्स' जर्नल में मैच्योरिटी ऑनसेट डायबिटीज ऑफ द यंग (एमओडीवाई) नाम से प्रकाशित इस रिसर्च में रिसर्चस डायबिटीज़ के टाइप का उल्लेख किया है। मद्रास डायबिटीज रिसर्च फाउंडेशन (एमडीआरएफ) के डॉ. वी. मोहन और डॉ. राधा वेंकटेशन द्वारा जेनेनटेक, कैलिफोर्निया से डॉ. एंड्रयू एस. पीटरसन, डॉ. सोमशेखर शेशगिरी और डॉ. थॉन्ग टी. एनगुयेन और मेडजेनोम, भारत से डॉ. रामप्रसाद और सैम संतोष के सहयोग से यह शोध प्रकाशित हुआ।

डॉक्टरों ने बताया कि सामान्य रूप से डायबिटीज़ के 2 प्रकार या टाइप होते हैं। टाइप-1 डायबिटीज़ की शिकायत युवाओं या बच्चों को होती है। एमओडीवाई के साथ मरीज़ आमतौर पर कमज़ोर होते हैं और उनकी कम उम्र के कारण उन्हें टाइप 1 डायबिटीज़ से पीड़ित बताया जाता है और उन्हें जीवनभर इंसुलिन इंजेक्शन लेने की सलाह दी जाती है।

डबकि टाइप-2 डायबिटीज़ आम तौर पर वयस्कों को प्रभावित करता है और बीमारी के अंतिम स्तरों को छोड़कर हाइपरग्लाइकेमिया को नियंत्रित करने के लिए इंसुलिन की ज़रूरत नहीं होती है।

डॉ. वी. मोहन, निदेशक, एमडीआरएफ ने कहा, "एमओडीवाई जैसे डायबिटीज़ के मोनोजेनिक प्रारूप का पता चलने का महत्व सही जांच तक है क्योंकि मरीज़ों को अक्सर गलत ढंग से टाइप 1 डायबिटीज़ से पीड़ित बता दिया जाता है और उन्हें गैर-ज़रूरी रूप से पूरी जिंदगी इंसुलिन इंजेक्शन लेने की सलाह दी जाती है। एक बार एमओडीवाई का पता चलने पर एमओडीवाई के ज्यादातर प्रारूपों में इंसुलिन इंजेक्शन से पूरी तरह बचा जा सकता है और इन मरीज़ों का इलाज बहुत ही सस्ते सल्फोनिलयूरिया टैबलेट से किया जाता है जिनका इस्तेमाल दशकों से डायबिटीज़ के इलाज के लिए किया जाता है। जहां तक उपचार और इन मरीज़ों के जीवन और उनके परिवारों की बात है तो यह एक व्यापक बदलाव है।"

डॉ. राधा वेंकटेशन, जेनोमिक्स प्रमुख, एमडीआरएफ ने कहा, " दुनिया में पहली बार ऐसा हुआ है जब एनकेएक्स6-1 जीन म्युटेशन को एमओडीवाई के नए प्रकार के तौर पर परिभाषित किया गया है। एमओडीवाई का यह प्रकार सिर्फ भारतीयों के लिए अनोखा है या यह अन्य लोगों में भी पाया जाता है, यह जांचने के लिए आगे भी अध्ययन करने होंगे।"

स्रोत: IANS Hindi.

चित्रस्रोत: Shutterstock.

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