फिक्स होने वाले हैं कोलेस्ट्राल, डायबिटीज सहित 84 दवाएं के दाम, जानिए दवाओं के नाम और लेटेस्ट कीमत

एनपीपीए द्वारा एक अधिसूचना में जानकारी देते हुए कहा गया कि अब फार्मा कंपनियां अपनी इच्छा से दवाओं की कीमतें नहीं बढ़ा सकेंगी।

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Written By: Sadhna Tiwari | Updated : July 4, 2022 1:11 PM IST

देश में दवाओं की कीमत निर्धारित करने संबंधी अधिकार रखने वाली नियामक संस्था एनपीपीए (National Pharmaceutical Pricing Authority) ने सिरदर्द, डायबिटीज (diabetes) और हाइपरटेंशन या हाई बीपी (high blood pressure.) जैसी बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल की जाने वाली कुल 84 दवाओं की कीमतों से जुड़ा एक बड़ा फैसला लिया है। एनपीपीए ने इन दवाओं की खुदरा बाजार में कीमतें तय कर दी हैं। मिली जानकारी के अनुसार, राष्ट्रीय दवा मूल्य निर्धारण प्राधिकरण शरीर में हाई कोलेस्ट्रॉल (increased cholesterol) और ट्राइग्लिसराइड्स के बढ़े लेवल (triglycerides levels, ) को कम करने के लिए मरीजो को दिए जाने वाले फॉर्मूलेशन की कीमतें भी तय की हैं।

एनपीपीए द्वारा एक अधिसूचना में जानकारी देते हुए कहा गया कि दवाओं के मूल्य नियंत्रण से जुड़े 2013 में दिए गए आदेश (Drugs (Prices Control Order, 2013) द्वारा मिली शक्तियों के आधार पर एनपीपीए ने कई दवाओं की खुदरा कीमतें तय की हैं। नये आदेश के मुताबिक अब, वोग्लिबोस और (एसआर) मेटफॉर्मिन हाइड्रोक्लोराइड की एक टैबलेट की कीमत 10.47 रुपये रखी जाएगी। इसमें जीएसटी अलग से लगाया जा सकता है। लेकिन, अब फार्मा कंपनियां अपनी इच्छा से दवाओं की कीमतें नहीं बढ़ा सकेंगी।

इन दवाओं के भी दाम तय

इस अधिसूचना के अनुसार, आमतौर पर दर्द और बुखार जैसी परेशानियों से राहत के लिए इस्तेमाल की जाने वाली पैरासिटामोल और कैफीन के दाम 2.88 रुपये तक प्रति टैबलेट निर्धारित किए गए हैं।वहीं,

  • एक रोसुवास्टेटिन एस्पिरिन और एक क्लोपिडोग्रेल कैप्सूल का दाम 13.91 रुपये होगा।
  • इसके अलावा टाइप 2 डायबिटीज, हाई बीपी और गैस्ट्रो से जुड़ी बीमारियों के इलाज में प्रयोग की जानेवाली दवाओं के दाम भी तय किए गए हैं।
  • जबकि, हार्ट अटैक (Heart Attack) और स्ट्रोक का खतरा कम करने के लिहाज से खून में बढ़े ट्राइग्लिसराइड्स के लेवल को संतुलित करने के लिए दी जाने वाली दवाओं के दाम भी तय कर लिए गए हैं।

नियमों का पालन ना करने पर फार्मा कम्पनियों पर लग सकता है जुर्माना

वहीं, एनपीपीए की तरफ से यह भी कहा गया है कि, दवा निर्माता कम्पनियों को ये दवाएं उन्हीं दरों पर उपलब्ध करानी होंगी जो नियामक द्वारा तय की गयी हैं। अगर दवाओं की निश्चित कीमतों से जुड़े  नियमों का सख्ती से पालन नहीं किया जाएगा तो कम्पनियों के खिलाफ कार्रवाई होगी और उन पर ज़ुर्माना लगाया जाएगा।