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Written By: Anshumala | Published : August 14, 2018 10:11 AM IST
Unexplained weight loss could be an alarm. © Shutterstock
क्या आपने न्यू वर्ल्ड सिंड्रोम के बारे में सुना है? इस बामारी से देश में बहुत बड़ी आबादी प्रभावित है। न्यू वर्ल्ड सिंड्रोम कीटाणु या संक्रमण से ही नहीं होता बल्कि आपकी जीवनशैली और आप जो खाते-पीते हैं, उससे भी बहुत हद तक यह हो सकता है। जिसे भी यह समस्या होती है वे लोग मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, दिल संबंधी रोगों जैसे गैर-संक्रमणीय बीमारियों से पीड़ित होते हैं।
एक अध्ययन में यह बात सामने आई है कि न्यू वर्ल्ड सिंड्रोम पारंपरिक आहार और जीवनशैली में आए बदलाव के कारण होने वाली बीमारी है। बहुत हद तक इसके लिए पश्चिमी भोजन मुख्य रूप से जिम्मेदार है। ये सभी खाद्य पदार्थ वसा, नमक, चीनी, काबोर्हाइड्रेट और परिष्कृत स्टार्च मानव शरीर में जमा हो जाते हैं और मोटापे का कारण बनते हैं।
आज बढ़ते मोटापे के कारण ही लोगों में डायबिटीज मेलिटस, हाई ब्लड प्रेशर, कार्डियोवैस्कुलर डिजीत और ब्रेस्ट कैंसर आदि बीमारियां हो रही हैं। भारत में करीब 70 फीसदी शहरी आबादी मोटापे या अधिक वजन का शिकार है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के अनुसार, भारत में करीब 20 फीसदी स्कूल जाने वाले बच्चे मोटापे से ग्रस्त हैं।
यदि आपको इस तरह की बीमारी से बचना है तो सबसे पहले अपनी लाइफस्टाइल को बदलना होगा। वर्क प्रेशर और देर तक घंटों बैठ कर करने वाले काम से लोगों में फिजिकल एक्टिविटी न के बराबर हो गई है। ऐसे में शारीरिक गतिविधि कम और मस्तिष्क संबंधी परिश्रम अधिक होता है, जिसके कारण लोगों में न्यू वर्ल्ड सिंड्रोम जैसी बीमारी होने की आशंका बढ़ गई है। वजन कम करना होगा, तभी आप इससे संबंधित रोगों से बचे रहेंगे। यह गठिया जैसे रोगों को भी जन्म देता है।
गठिया जोड़ों को प्रभावित करता है। इसकी वजह से मरीज में यूरिक एसिड का स्तर बढ़ जाता है, जिसके कारण जोड़ों में दर्द और सूजन की शिकायत रहती है। बढ़े हुए बॉडी मॉस इंडेक्स के कारण शरीर में ट्राइग्लिसराइड्स और खराब कोलेस्ट्रॉल (एलडीएल) का स्तर बढ़ जाता है। एलडीएल का उच्च स्तर और एचडीएल का निम्न स्तर एथेरोस्क्लेरोसिस नामक बीमारी का प्रमुख कारण होता हैं इसकी वजह से रक्त वाहिकाएं सिकुड़ जाती हैं और दिल का दौरा पड़ने का खतरा बढ़ जाता है। मोटापाग्रस्त व्यक्ति में जीवन भर कैंसर होने का खतरा बना रहता है। इनमें आंत, स्तन व ओसोफेंजियल कैंसर होने की संभावना ज्यादा रहती है।
चित्रस्रोत: Shutterstock.