कुत्तों से इंसानों तक पहुंचा कोरोना वायरस! जानें क्या कहते हैं वैज्ञानिक

कोरोना वायरस (Coronavirus) को लेकर पिछले कई दिनों से बहुत सी स्टडीज आ चुकी हैं। इस वायरस को लेकर इस बात की पुष्टि तो की जा चुकी है कि यह चमगादड़ों में पाया जाता है। लेकिन अब तक इस बात की पुष्टि नहीं हो पाई है कि कोरोना वायरस (Coronavirus) जीव से इंसानों तक कैसे पहुंचा। इसी को लेकर एक नई स्टडी सामने आई है, जिसमें कहा गया है कि कोरोना वायरस (कोविड 10) पहले चमगादड़ों से कुत्तों में आई फिर यह कुत्तों से इंसानों तक पहुंची।

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Written By: Kishori Mishra | Published : April 16, 2020 9:38 AM IST

कोरोना वायरस (Coronavirus) को लेकर पिछले कई दिनों से बहुत सी स्टडीज आ चुकी हैं। इस वायरस को लेकर इस बात की पुष्टि तो की जा चुकी है कि यह चमगादड़ों में पाया जाता है। लेकिन अब तक इस बात की पुष्टि नहीं हो पाई है कि कोरोना वायरस (Coronavirus) जीव से इंसानों तक कैसे पहुंचा। इसी को लेकर एक नई स्टडी सामने आई है, जिसमें कहा गया है कि कोरोना वायरस (कोविड 10) पहले चमगादड़ों से कुत्तों में आई फिर यह कुत्तों से इंसानों तक पहुंची। चलिए जानते हैं और क्या-क्या कहा गया है इस स्टडी में-

स्टडी में हुए खुलासे

चमगादड़ से SARS-CoV वायरस छोटी लोमड़ी जैसे जीव द्वारा इंसानों में पहुंचा। वहीं, MERS-CoV वायरस से चमगादड़ से ऊंट में पहुंचा फिर यह ऊंट के जरिए इंसानों तक। अब ऐसी ही एक और स्टडी सामने आई है, जिसमें कहा ग.ा है कि कई बार वायरस उन जीवों के जरिए इंसानों तक पहुंचते हैं, जिसकी अधिकता हमारे आस-पास होती है।

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इसी प्रकार की स्टडी फरवरी में हुई थी, जिसके प्रारंभिक स्टडी में वैज्ञानिकों ने बताया कि SARS-CoV-2 यानी कोविड-19 चीटीं खाने वाले जीव पैंगोलिन से इंसानों में आया। यानि चमगादड़ों ने पहले चींटी को अपना शिकार बनाया, उसके बाद इन जीव के जरिए इंसानों में पहुंचा। हालांकि, फरवरी के बाद बहुत से वैज्ञानिक इस थ्योरी से सहमत नहीं थे।

यह नई स्टडी कनाडा के ओटावा यूनिवर्सिटी में बायोलॉजी प्रोफेसर जुहुआ जिया ने किया है। यह स्टडी 14 अप्रैल को  मॉलीक्यूलर बायोलॉजी एंड एवोल्यूशन में प्रकाशित हुई। इसके एनालिसिस में प्रो. जुहुआ जिया ने कहा है कोविड-19 संक्रमण चमगादड़ों से कुत्तों में पहुंचा, इसके बाद यह कुत्तों के जरिए इंसानों में गया। जिया ने अपने विश्लेषण में कहा कि मनुष्य के शरीर में एक ऐसा प्रोटीन होता है, जिसे वैज्ञानिकों की भाषा में जिंक फिंगर एंटीवायरल प्रोटीन जैप (ZAP) कहते हैं।

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शरीर में मौजूद जैप (ZAP) जैसे ही कोरोना वायरस के जेनेटिक कोड साइट CpG को देखता है। वह उसपर हमला कर देता है, लेकिन उससे लड़ने में सक्षम नहीं होता। इसके बाद यहीं से कोविड 19 अपना काम शुरू करता है और हमारे शरीर में मौजूद कमजोर कोषिकाओं को ढूंढता है और उन्हें नष्ट करने की कोशिश करता है। अपने अध्ययन में जिया ने कई जेनेटिक कोड साइट जैसे CpG, ZAP के बारे में बताया है। इसके साथ ही इसमें कई जेनेटिकल मॉलीक्यूल्स का अध्ययन किया है। इसी के आधार पर उन्होंने बताया है कि कुत्तों में भी जैप होता है, जो काफी कमजोर होता है। कुत्तों में मौजूद जैप कोरोना वायरस के सीपीजी साइट से लड़ नहीं सकता। कोरोना वायरस कुछ कुत्ते की आंतों में अपना घर बना लेते हैं।

कुछ वैज्ञानिक इस बात से नहीं हैं सहमत 

मालूम हो कि चीन में कई तरह के जानवरों का सेवन किया जाता है, जिसमें कुत्ते भी शामिल हैं। इसी बात का सहारा जिया ने अपनी स्टडी में लिया है। कई वैज्ञानिक जिया की इस थ्योरी से सहमत नहीं है। जिया की स्टडी के बारे में सैन फ्रांसिस्को स्टेट यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर लिउनी पेनिंग्स ने कहा कि यह थ्योरी और जेनेटिक डेटा एक-दूसरे को सपोर्ट नहीं करते हैं। मैं इस स्टडी में मौजूद इन बातों को नहीं मानता हूं।

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