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महिलाओं में इस मानसिक बीमारी का खतरा पुरुषों से दोगुना, सांइस ने भी माना आखिर क्यों होती है महिलाएं इस बीमारी का शिकार

जर्नल नेचर में प्रकाशित इस अध्ययन के निष्कर्ष बताते हैं कि अल्जाइमर एक ऐसी बीमारी है, जिसमें एक व्यक्ति धीरे-धीरे अपनी जानी-पहचानी चीजें या फिर यूं कहें कि यादों को भुलाने लगता है।

महिलाओं में इस मानसिक बीमारी का खतरा पुरुषों से दोगुना, सांइस ने भी माना आखिर क्यों होती है महिलाएं इस बीमारी का शिकार
महिलाओं में इस मानसिक बीमारी का खतरा पुरुषों से दोगुना, सांइस ने भी माना आखिर क्यों होती है महिलाएं इस बीमारी का शिकार

Written by Jitendra Gupta |Published : March 4, 2022 10:08 AM IST

पहले हुए महामारी विज्ञान के अध्ययनों में ये बात बताई जा चुकी है कि महिलाओं में अल्जाइमर रोग के विकसित होने का खतरा पुरुषों के मुकाबले दोगुना होता है लेकिन ऐसा क्यों होता है, ये पहेली अभी तक अनसुलझी हुई थी। लेकिन हाल ही में हुए एक अध्ययन में इस सवाल का जवाब ढूंढने में शोधकर्ताओं ने सफलता हासिल कर ली है। जर्नल नेचर में प्रकाशित इस अध्ययन के निष्कर्ष बताते हैं कि अल्जाइमर एक ऐसी बीमारी है, जिसमें एक व्यक्ति धीरे-धीरे अपनी जानी-पहचानी चीजें या फिर यूं कहें कि यादों को भुलाने लगता है।

क्या है अल्जाइमर

अल्जाइमर एक ऐसी बीमारी है, जिसमें रोगी न चाहते हुए भी एक ऐसी सजा का शिकार होता है, जो बहुत ही भयावह होती है। ये स्थिति उस व्यक्ति के लिए तो पीड़ादाय है ही, जो इससे गुजर रहा है लेकिन ये उस व्यक्ति के लिए भी उतनी ही दुखदायी है, जो उस रोगी की देखभाल में लगा हुआ है।

चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंस के शेंजन इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस टेक्नोलॉजी के प्रोफेसर और अध्ययन के मुख्य लेखक केकियांग ये ने बरसों से इस अनसुलझी पहेली को सुलझाने का काम किया है और एक स्पष्ट उत्तर देने का काम किया है।

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कैसे किया गया ये अध्ययन

पिछले सभी अध्ययनों का सार जुटाकर प्रोफेसर केकियांग की टीम ने एक थ्योरी स्थापित की है, जिसमें उन्होंने न्यूरोडीजेनेरेटिव रोगों की शुरुआत की ओर ले जाने वाले C/EBPb/AEP मार्गों को मुख्य वजह करार दिया है।

प्रोफेसर केकियांग का कहना है कि इस थ्योरी के आधार पर हमारी टीम ने महिलाओं के उन हार्मोन को तलाशने की कोशिश की, जो मेनोपॉज के दौरान तेजी से बदलते हैं और सिर्फ C/EBPb/AEP मार्गों को सक्रिया बनाने वाले हार्मोन की भी जांच की।

अल्जाइमर रोग के होने का चला पता

न्यूयार्क स्थित माउंट सिनाई स्कूल ऑफ मेडिसिन के प्रोफेसर और अध्ययन के मुख्य सह लेखक डॉ. जैदी मोन का कहना है कि मेनोपॉज के दौरान FSH का सीरम कंस्नट्रेशन बहुत तेजी से बढ़ता है, जो न्यूरोन पर FSH रिसेप्टर को रोक कर रखने का काम करता है, जिससे C/EBPb/AEP सक्रिय हो जाते हैं। इसके परिणास्वरूप एबी और टाऊ विकृतियां विकसित हो जाती हैं, जो आगे चलकर अल्जाइमर का कारण बनती है।

ये सभी निष्कर्ष इस बात की ओर इशारा करते हैं कि मेनोपॉज के बाद एफएसएच का बढ़ा हुआ स्तर न्यूरोन में FSHRको रोक कर रखता है और C/EBPb/AEP मार्गों को सक्रिय रखता है, जो कहीं न कहीं अल्जाइमर विकृति को बढ़ाने में एक अहम भूमिका निभाता है।

उम्र के साथ बढ़ने वाली बीमारी की वजह ये

अध्ययन के मुताबिक निकट भविष्य में टीम अल्जाइमर के विकसित होने के प्रति संवेदनशील महिलाओं को प्रभावित करने वाले विशिष्ट जीन और ApoE4 व FSH जैसे हार्मोन के बीच संबंधों का पता लगाने पर धयान केंद्रित करेगी।

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इमोरी यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डॉ. सियोंग सु कांग का कहना है कि हमारे निष्कर्ष ये बताते हैं कि C/EBPb/AEP, जो कि संकेत भेजने वाले मार्ग हैं, उम्र के साथ बढ़ने वाली इस बीमारी के विकसित होने के पीछे मुख्य वजह हैं। इस अध्ययन से हमें ये मदद मिलती है कि इस मार्ग के सक्रिय होने के कारण कैसे इस रोग के विभिन्न जोखिम कारक बहुत तेजी से बढ़ते हैं।

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