
साधना तिवारी
साधना तिवारी 15 वर्षों से मीडिया क्षेत्र में हैं। लगभग 9 वर्षों से अधिक समय से ZEE ग्रुप के साथ जुड़ी हुई ... Read More
Written By: Sadhna Tiwari | Updated : April 26, 2024 10:50 PM IST
Low Height of kids reasons: एक स्टडी में यह बात सामने आई है कि भारत में समुद्र तल से 2,000 मीटर से अधिक ऊंचाई पर रहने वाले 5 साल से कम उम्र के बच्चों का विकास ठीक तरह से नहीं हो पाता। बच्चों में यह जोखिम लगभग 40 प्रतिशत अधिक हो सकता है।बीएमजे न्यूट्रिशन प्रिवेंशन एंड हेल्थ में प्रकाशित इस स्टडी में बताया गया कि क्रोनिक मालन्यूट्रिशन या लम्बे समय तक कुपोषण के कारण बच्चों का विकास रूक जाता है और भारत में यह एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बना हुआ है। आंकड़ों के अनुसार, 5 साल तक के एक तिहाई से अधिक बच्चे इस समस्या से अधिक प्रभावित देखे जा रहे हैं।
आईएएनएस की रिपोर्ट के अनुसार, एनएनईडीप्रो ग्लोबल इंस्टीट्यूट फॉर फूड न्यूट्रिशन एंड हेल्थ के कार्यकारी निदेशक प्रोफेसर सुमंत्र रे ने कहा, ''बीते कुछ दशकों में भारत में चलाए गए स्वास्थ्य कार्यक्रमों के कारण आयोडीन की कमी (Iodin deficiny in kids) जैसी पोषण संबंधी समस्याओं को प्रभावी ढंग से खत्म किया गया है जो बहुत ऊंचाई वाले क्षेत्रों में रहने वालों की एक बड़ी समस्या "
रे ने बताया ''यह अध्ययन पहाड़ी क्षेत्रों में कुपोषण की जटिलताओं पर प्रकाश डालता है जहां 5 साल से कम उम्र के बच्चों में कुपोषण के बारे में और जानकारी जुटाने की जरूरत है। यह देखना जरूरी है कि इसका पर्यावरण, जीवनशैली और सामाजिक आर्थिक कारक की तुलना में कितना अधिक योगदान है।''
शोधकर्ताओं ने इसके लिए 5 साल से कम उम्र के 167,555 बच्चों पर 2015-16 के राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस -4) के डेटा का इस्तेमाल किया। लगभग 1.4 प्रतिशत बच्चे समुद्र तल से 1,000 और 1,999 मीटर के बीच रहते थे, और 0.2 प्रतिशत सेंट 2,000 मीटर या उससे ऊपर रहते थे। स्टडी के अंत में देखा गया कि,
एक्सपर्ट्स के अनुसार ऊंचाई पर लंबे समय तक रहने से भूख कम हो सकतीहै, जिससे कोशिकाओं तक ऑक्सीजन की आपूर्ति बाधित हो सकती है और पोषक तत्वों का अवशोषण सीमित हो सकता है, जो विकास में रुकावट का कारण है।
(आईएएनएस)