गर्मी के मौसम में चीन से भी कम काम कर पाते हैं भारत में लोग, जानें रिपोर्ट

स्वास्थ्य और जलवायु परिवर्तन पर गुरुवार को लांसेट पत्रिका द्वारा जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, यह आंकड़ा चीन की तुलना में करीब चार गुना ज्यादा है जबकि दुनियाभर में.......

WrittenBy

Written By: IANS | Updated : November 30, 2018 9:56 AM IST

भारत में गर्मी के मौसम में लोगों के काम-काज पर असर पड़ता है और वे चीन के लोगों से भी कम काम कर पाते हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में गर्मी के कारण कार्यबल की उत्पादकता करीब सात फीसदी घट जाती है, जो 75 अरब मानव घंटे (मैन आवर्स) के बराबर है। यहां मानव घंटे से अभिप्राय औसतन एक घंटा में किसी व्यक्ति द्वारा किया गया काम से है। ये भी पढ़ेंः आपकी इन आदतों की वजह दिमाग हो रहा है कमजोर।

स्वास्थ्य और जलवायु परिवर्तन पर गुरुवार को लांसेट पत्रिका द्वारा जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, यह आंकड़ा चीन की तुलना में करीब चार गुना ज्यादा है जबकि दुनियाभर में 153 अरब मानव घंटे के आधे से थोड़ा ही कम है। यह आंकड़ा वर्ष 2017 का है।

रिपोर्ट के अनुसार, चीन में गर्मी के कारण एक साल में 21 अरब मानव घंटे की बर्बादी हुई जोकि उसके कार्यबल के पूरे साल के काम का 1.4 फीसदी है। ये भी पढ़ेंः ये भी पढ़ेंः 4 संकेत जो बताते हैं कि दिमाग समय से पहले कमजोर हो रहा है।

दुनियाभर में पिछले साल 2000 की तुलना में 15.7 करोड़ अधिक लोग गर्मी से पीड़ित थे जबकि 2016 के मुकाबले 1.8 करोड़ लोग गर्मी से पीड़ित थे। ये भी पढ़ेंः 8 वो तरीके जो दिमाग व याददाश्त को रखते हैं मजबूत। 

हालिया रिपोर्ट के अनुसार, जलवायु परिवर्तन की सबसे ज्यादा सामाजिक व आर्थिक कीमत चुकाने वाले देशों में भारत भी शामिल है जहां एक टन अतिरिक्त कार्बन डाईऑक्साइड के उर्त्सजन से की कीमत 58 डॉलर होता है जबकि अमेरिका में 48 डॉलर और सऊदी अरब में 47.5 डॉलर।

ये भी पढ़ेंः क्या कंडोम के प्रयोग से एचआईवी का खतरा सच में टल जाता है ?

ये भी पढ़ेंः हमेशा फिट और जवां रहने के लिए ये 3 एक्सरसाइज हैं सबसे बेहतर।

ये भी पढ़ेंः बढ़ती उम्र में भी पुरुष इन टिप्स की मदद से रह सकते हैं जवां।

ये भी पढ़ेंः क्या नल या नहाने वाले पानी से खाना बनाना सही है ?

ये भी पढ़ेंः आपकी इन आदतों की वजह दिमाग हो रहा है कमजोर।

ये भी पढ़ेंः रनिंग करने वालों का कैसा हो खान-पान ?

Add The Health Site as a Preferred Source Add The Health Site as a Preferred Source