वैज्ञानिकों ने खोजा गले में मौजूद एक नया अंग, एक्सपर्ट्स ने कहा कैंसर के इलाज में होगी मदद

नीदरलैंड्स के कैंसर इंस्टिट्यूट से जुड़े इन वैज्ञानिकों को गले के ऊपरी हिस्से में 2 लार ग्रंथियां (Salivary glands) मिली हैं। मिली जानकारी के अनुसार इन्हें, ट्यूबेरियल सलाइवरी ग्लैंड नाम दिया गया है।

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Written By: Sadhna Tiwari | Updated : October 22, 2020 1:03 PM IST

New Organ in Throat:  वैज्ञानिकों ने गले में एक नये अंग की खोज की है। नीदरलैंड्स में प्रोस्टेट कैंसर सु जुड़े एक रिसर्च के दौरान वैज्ञानिकों को अनजाने में इंसानों के गले में एक नया अंग होने का पता चला है। नीदरलैंड्स के कैंसर इंस्टिट्यूट से जुड़े इन वैज्ञानिकों को गले के ऊपरी हिस्से में 2 लार ग्रंथियां (Salivary glands) मिली हैं। मिली जानकारी के अनुसार इन्हें, ट्यूबेरियल सलाइवरी ग्लैंड (Tuberel Salivary Glands)  नाम दिया गया है। (New Organ in Throat)

वैज्ञानिकों ने खोजा गले में मौजूद एक नया अंग:

इस स्टडी के परिणामों के बारे में जर्नल रेडियोथेरपी ऐंड ऑन्कॉलजी (Radiotherapy and Oncology) में लिखा गया है। जिसके अनुसार, वैज्ञानिकों ने इस नये अंग की खोज के बारे में पुष्टि की है।  इस रिसर्च के लिए 100 लोगों को चुना गया जिनके गले में यह ग्लैंड देखे गए हैं। ऐसा कहा जा रहा है कि, इन लार ग्रंथियों  का पता लगने से अब कैंसर के इलाज की दिशा में बहुत सहायता होगी।

गौरतलब है कि वैज्ञानिकों का अभी तक यही मत था कि, गले और नाक के बीच के इस भाग में कोई भी ऐसा अंग मौजूद नहीं होता है। जबकि, शरीर में पहले से खोजी गयी 3 लार ग्रंथियों में से एक जीभ के निचले हिस्से में, दूसरी जबड़े के नीचे और तीसरी जबड़े के पीछे होने की बात कही जाती रही है। इसके अलावा लार ग्रंथियों के बारे में वैज्ञानिकों को पता नहीं था। (New Organ in Throat)

 कैंसर के इलाज में हो सकती है मददगार:

शोधकर्ताओं ने इस स्टडी के दौरान पाया कि इस ग्लैंड की लम्बाई 1.5 इंच  (लगभग 3.9 सेमी) के आसपास है। यह नाक के पीछे स्थित टोरस ट्यूबेरियस (Torus Tubarius) नाम के कार्टिलेज ( cartilage) से सटी हुई है और वहां, ऊपरी हिस्से में स्थित है। इन वैज्ञानिकों का अनुमान है कि, इस ग्रंथि का काम नाक और मुंह के पीछे वाले और गले के ऊपरी हिस्से को चिकनाई देने यानि ल्यूब्रिकेट करना हो सकता है।

मिली जानकारी के अनुसार, इस ग्लैंड की खोज प्रोस्टेट कैंसर (Prostate Cancer) से जुड़ी एक स्टडी के दौरान अनजाने में ही हुई। एक्सपर्ट्स का कहना है कि, इस नयी लार ग्रंथि की खोज होने से कैंसर के इलाज की दिशा में बहुत आसानी होगी। कैंसर के उपचार के दौरान होनेवाले रेथियोथेरेपी में सलाइवा यानि लार बनाने वाली ग्रंथियों को सुरक्षित रखने के प्रयास किए जाते हैं। क्योंकि, इन ग्लैंड्स को नुकसान होने पर पीड़ित व्यक्ति को बोलने, खाना खाने और पानी या लार निगलने में कठिनाई महसूस होती है। अब चूंकि, इस नये ग्लैंड का पता लग चुका है तो, अब इलाज के दौरान इसे भी सुरक्षित रखने के प्रयास किए जाएंगे। ताकि, कैंसर के दौरान मरीज को होने वाला नुकसान कम से कम हो।

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