जल्द ही नए नाम से जाना जाएगा 'Monkeypox', दुनियाभर के एक्सपर्ट्स के साथ काम कर रहा है डब्लूएचओ

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) ने इस सप्ताह की शुरुआत में कहा था कि वह अपने साथियों और दुनियाभर के एक्सपर्ट्स के साथ मिलकर इस वायरस के नाम को बदलने पर काम कर रहा है।

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Written By: Jitendra Gupta | Published : June 16, 2022 1:17 PM IST

जल्द ही मंकीपॉक्स के लिए नए नाम की घोषणा की हो सकती है। मंकीपॉक्स ऐसा वायरस है, जो कुछ देशों में बहुत तेजी से फैला है, खासकर ऐसे वक्त में जब दुनिया कोरोना से राहत पाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) ने इस सप्ताह की शुरुआत में कहा था कि वह अपने साथियों और दुनियाभर के एक्सपर्ट्स के साथ मिलकर इस वायरस के नाम को बदलने पर काम कर रहा है। आइए जानते हैं क्यों हो रहा है ऐसा।

क्यों नाम बदलने की हो रही कोशिश

नाम बदलने के पीछे एक संभावित कारण हो सकता है भेदभाव, जो कि मई महीने से इंफेक्शन के साथ जुड़ा हुआ है। ये वायरस शुरू में ज्यादातर अफ्रीकी देशों तक सीमित था लेकिन अब ये यूरोप और अमेरिका के कुछ हिस्सों में फैल गया है। हालांकि डब्लूएचओ ये पता लगाने का प्रयास कर रहा है कि आखिर ये बीमारी फैली कैसे।

जल्द ही नए नाम की घोषणा

डब्लूएचओ के चीफ टेड्रोस अघानोम घेब्रेसियस ने संयुक्त राष्ट्र के हवाले से कहा है कि डब्लूएचओ अपने साथियों और दुनियाभर के एक्सपर्टस के साथ मिलकर मंकीपॉक्स वायरसके नाम को बदलने, इसके कारणों का पता लगाने पर काम कर रहा है। हम जल्द से जल्द नए नाम की घोषणा कर सकते हैं।

अगले सप्ताह तक आ सकता है नाम

उन्होंने कहा कि मंकीपॉक्स का फैलना असामान्य और चिंताजनक है। इस कारण से मैंने ये फैसला किया है कि अगले सप्ताह इंटरनेशनल हेल्थ रेगुलेशन के तहत आपातकाल कमेटी बनाई जाए ताकि अंतर्राष्ट्रीय चिंता को देखते हुए इस बीमारी को जन स्वास्थ्य आपातकाल के रूप में प्रस्तुत करने के बारे में आकलन किया जा सके।

30 देशों में फैला वायरस

बता दें कि अभी तक 30 से ज्यादा देशों में मंकीपॉक्स फैल चुका है और हैरत की बात ये है कि इससे पहले कभी भी इन देशों में इसके मामले सामने नहीं आए थे। अब तक मंकीपॉक्स के 1900 से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं और इनमें से ज्यादातर मामले यूरोप से आए हैं।

इन देशों में फैला मंकीपॉक्स

ऑस्ट्रेलिया, डेनमार्क, ऑस्ट्रिया, फिनलैंड, ग्रीस, इटली, आयरलैंड, पोलैंड, पुर्तगाल और रोमानिया जैसे देशों में ये मामले सामने आए हैं। संयुक्त अरब अमीरात और इजरायल में भी इस तरह के मामले सामने आए हैं।

कब फैला था ये वायरस

डब्लूएचओ का कहना है कि इंसानों से जानवरों में फैलने वाला ये वायरस सबसे पहले 1950 में बंदरों में पाया गया था और तभी से इसका नाम मंकीपॉक्स पड़ा। इंसानों में मंकीपॉक्स का पहला मामला 1970 के दशक में सामने आया था तब कांगो में एक 9 महीने के बच्चे को ये बीमारी हुई थी। कांगों में स्मॉलपॉक्स की बीमारी को 1968 में खत्म कर दिया गया था। उसके बाद से 11 अफ्रीकी देशों में इस वायरस के फैलने की पुष्टि हुई थी।

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