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Written By: akhilesh dwivedi | Updated : August 13, 2018 1:27 PM IST
Image credits by: दवाएं- आपका डॉक्टर आपको दवाएं दे सकता है ताकि दर्द में आराम मिले और घुटनों की समस्याओं जैसे ऑस्टियोअर्थराइटिस और र्यूमैटॉइड अर्थराइटिस को ठीक किया जा सके।
क्या आप नकली और असली दवा में अंतर कर पाते हैं ? अगर यह सवाल किसी पढ़े लिखे इंसान से किया जाय तो शायद वह भी कहे की बहुत मुश्किल है। लेकिन जिन देशों में ज्यादातर आबादी नाममात्र की शिक्षित हो वहां नकली दवाओं की पहचान सामान्य जन कैसे कर पायेगा ! इसी का फायदा उठाने के लिए हेल्थ सेक्टर में नकली व खराब गुणवत्ता की दवाओं का कारोबार फलता-फूलता है।
अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ नॉर्थ कैरोलिना (यूएनसी) के शोधकर्ताओं के एक अध्ययन में पता चला कि अफ्रीका में इस्तेमाल में लायी जा रही 19 प्रतिशत जरूरी दवाएं नकली या खराब गुणवत्ता की थीं। शोधकर्ताओं ने पाया कि कम और मध्यम आय वाले देशों में 19 प्रतिशत मलेरिया रोधी और 12 प्रतिशत एंटीबॉयोटिक दवाएं नकली या खराब गुणवत्ता की थीं।
विकासशील देशों में सबसे ज्यादा कारोबार
विकासशील देशों में मलेरिया और एंटीबायोटिक जैसी जानलेवा बीमारियों के लिए नकली और खराब गुणवत्ता की दवाओं की धड़ल्ले से बिक्री हो रही है। वैज्ञानिकों ने पाया है कि कम और मध्यम आय वाले देशों में बिक रही 13 प्रतिशत दवाएं खराब गुणवत्ता की हैं। अफ्रीकी देशों में 19 प्रतिशत दवाएं नकली या खराब गुणवत्ता की पायी गयी हैं।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ
वैज्ञानिकों का कहना है कि मलेरिया जैसी जानलेवा बीमारी सहित दूसरी बीमारियों की नकली और खराब गुणवत्ता वाली दवाएं विकासशील देशों में धड़ल्ले से इस्तेमाल की जा रही हैं। वैज्ञानिकों ने साथ ही कहा कि कम एवं मध्यम आय वाले देशों से नमूने के तौर पर ली गयी दवाओं में से 13 प्रतिशत दवाएं खराब गुणवत्ता की थीं।
यूएनसी में सहायक प्रोफेसर साचिको ओजावा के अनुसार, ‘‘खराब गुणवत्ता वाली या नकली दवाओं का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल एक गंभीर जनस्वास्थ्य समस्या है क्योंकि ये दवाएं अप्रभावी या नुकसानदेह हो सकती हैं और बीमारी को लंबे समय के लिए खींच सकती है, विषाक्तता को जन्म दे सकती है या शरीर पर खतरनाक नकारात्मक असर डाल सकती हैं. ’’
यूएनसी के प्रोफेसर जेम्स हेरिंगटन के अनुसार, ‘‘हमें दवाओं की गुणवत्ता को लेकर कानून लागू करने, गुणवत्ता नियंत्रण क्षमता बढ़ाने और निगरानी एवं डेटा साझा संबंधी सुधार की जरूरत है.’’
मलेरिया और एंटीबायोटिक दवांए सबसे ज्यादा नकली
शोधकर्ताओं ने नकली और निम्न स्तर की 50 से अधिक दवाओं का परीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने पाया कि इन नकली और निम्न स्तर की दवाओं में सबसे ज्यादा मलेरिया की दवा और एंटीबायोटिक दवाएं हैं। निम्न और मध्यम आय वर्ग के देशों में मलेरिया की 19 प्रतिशत और एंटीबायोटिक 12 प्रतिशत दवाएं नकली बेची जा रही हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ नॉर्थ कैरोलिना के एसोसिएट प्रोफेसर सचिको ओजावा का कहना है कि इन नकली और निम्न स्तर की दवाओं का प्रचलन स्वास्थ्य के लिए बड़ी समस्या बन सकता है।
शरीर में जहर फैलने का खतरा
इन दवाओं से कोई लाभ न होने के साथ- साथ लंबी बीमारी और शरीर में जहर फैलने का खतरा है। उन्होंने कहा कि इस समस्या पर वैश्विक समाधान की आवश्यकता है, जिससे कि सही दवाओं की सप्लाई सुनिश्चित की जाए और दवाओं के बारे में सही जानकारी साझा हो सके। इसके अलावा दवाओं की गुणवत्ता और निगरानी के लिए अंतर्राष्ट्रीय कानूनों की आवश्यकता है।
चित्रस्रोत: Shutterstock.
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