Lumpy skin disease: भारत के इन तीन राज्यों को मिली Goat pox vaccine की 28 लाख डोज, राजस्थान में स्थिति गंभीर

Goat pox vaccine: लंपी स्किन डिजीज यानी एलएसडी (LSD) का प्रकोर अब भारत के कई राज्यों में फैल चुका है। स्थिति से निपटने के लिए नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (NDDB) ने गुजरात, राजस्थान और पंजाब को गोट पॉक्स वैक्सीन की 28 लाख खुराक सप्लाई की हैं।

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Written By: Mukesh Sharma | Published : August 5, 2022 10:27 AM IST

इधर मंकीपॉक्स का खतरा बढ़ रहा है तो उधर जानवरों में लंपी स्किन डिजीज का खतरा बढ़ रहा है। देश के कई राज्यों में जानवरों में यह बीमारी तेजी से बढ़ रही है और उससे निपटने के लिए नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (NDDB) गुजरात, राजस्थान और पंजाब को गोट पॉक्स वैक्सीन (Goat pox vaccine) की 28 लाख खुराक दी हैं। एनडीडीबी (National Dairy Development Board) की चेयरमैन मीना शाह ने एक मीडिया वार्ता के दौरान कहा कि गुजरात, पंजाब और राजस्थान में हमें केस देखने को मिल रहे हैं। हमारे पास इंडियन इम्यूनोलॉजिकल्स लिमिटेड सब्सिडियरी है, जो वैक्सीन बनाती है। मीना शाह ने यह भी बताया कि वे 28 लाख खुराक गोट पॉक्स वैक्सीन सप्लाई कर चुके हैं, जिसमें 15 दिन पहले गुजरात को दी गई 10 लाख डोज भी शामिल हैं।

क्या होगी वैक्सीन की कीमत

नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड के द्वारा गुजरात, पंजाब और राजस्थान में सप्लाई की जाने वाली गोट पॉक्स वैक्सीन की कीमत 3 रुपये प्रति खुराक होगी। मीना शाह ने कहा कि लंपी डिजीज को फैलने से रोकने का सबसे सही तरीका जानवरों को वैक्सीन देना ही है। यह बीमारी थोड़े समय के भीतर ही कंट्रोल की जा सकती है।

राजस्थान में स्थिति खराब

लंपी स्किन डिजीज के मामले राजस्थान में तेजी से बढ़ रही हैं और स्थिति निरंतर खराब होती जा रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार सिर्फ राजस्थान में ही लगभग 4000 जानवरों की इस बीमारी से मौत हो चुकी है, जिनमें ज्यादातर गाय थी। वहीं राज्य के लगभग 90000 जानवर अभी भी इस बीमारी से संक्रमित है। यह बीमारी राजस्थान के 16 जिलों में फैल चुकी है, जिसमें बाड़मेर, जोधपुर और जालोर सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।

तेजी से फैलने लगी है यह बीमारी

लंपी स्किन डिजीज जानवरों में खून चूसने वाले कीटों से फैलती है। कुछ प्रकार की मक्खियां और दूषित पानी व चारा खाने से भी जानवरों में यह बीमारी हो सकती है। इसमें जानवरों से तेजी से बुखार हो जाता है और साथ ही नाक बहना, लार टपकना व आंखों से पानी आना आदि लक्षण भी विकसित होने लगते हैं। इसके बाद जानवरों के शरीर पर गांठ या फफोले बनने लग जाते हैं और दुधारू पशुओं का दूध कम हो जाते हैं।

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