
मुकेश शर्मा
मुकेश शर्मा दिल्ली यूनिर्विसिटी से जर्नलिज्म डिग्री होल्डर हैं और पिछले 8 साल से Health Journalism से जुड़े हुए ... Read More
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देश के प्रतिष्ठित और बड़े व्यवसायियों में से एक Essel Group चेयरमैन डॉ. सुभाष चंद्रा गोयनका के पूजनीय पिता श्री नंद किशोर गोयनका जी का निधन हो गया है। उन्होंने 96 की उम्र में अपने जीवन की अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से न सिर्फ गोयनका परिवार बल्कि पूरे उद्योग जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। श्री नंद किशोर गोयनका के जी पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए मुंबई के निवास स्थान A रोड, वसंत सागर, मरीन ड्राइव पर रखा गया है, जहां पर गोयनका परिवार के शुभचिंतक, बड़े उद्योगपति, राजनेता और कई बड़े सामाजिक कार्यकर्ता परिवार का ढांढस बंधाने और दिवंगत आत्मा को अपनी भावपूर्ण श्रद्धांजलि देने के लिए पहुंच रहे हैं।
इस बुधवार 15 जुलाई 2026 को श्री नंद किशोर जी का अंतिम संस्कार किया जाएगा और मुंबई की बजाय उनके पार्थिव शरीर को हरियाणा के हिसार जिले के अग्रोहा में गोयनका उद्यान में किया जाएगा, जहां पर नंद किशोर जी का बचपन बीता है और वहीं पर ही उनके बड़े बेटे डॉ. सुभाष चंद्रा गोयनका का जन्म भी हुआ था।
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नंद किशोर गोयनका जी के निधन पर उनके सुपुत्र और एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन डॉ. सुभाष चंद्रा ने X अकाउंट पर भावुक संदेश दिया और उनके पिता का जाना उनके जीवन की सबसे बड़ी क्षति बताया। उन्होंने लिखा कि “आज सुबह उनके पिता नंद किशोर गोयनका ने आखिरी सांस ली है। आगे उन्होंने कहा कि वैसे तो पूरा परिवार दुखी है, लेकिन हम उनके जीवन के 96 वर्षों के गौरवशाली जीवन का उत्सव के रूप में मनाना चाहते हैं। उनका यह लंबा जीवन समाज सेवा, गौ-सेवा और एक सच्चे आरएसएस (RSS) स्वयंसेवक के रूप में राष्ट्र की सेवा को समर्पित रहा, जो आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरणा देता रहेगा”
Today morning our beloved father Nand Kishore Goenka, breathed his last. Though all in family are saddened. My desire is to celebrate his 96 year's life, which was full of samaj seva, cow seva,and national service as RSS sayam sevak.
— Subhash Chandra (@subhashchandra) July 13, 2026
श्री नंद किशोर गोयनका जी का जीवन की यात्रा एक साधारण व्यक्ति से शुरू होकर देश के बड़े व्यापारियों तक रही है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के स्वयंसेवक के रूप में उन्होंने हमेशा राष्ट्र प्रथम की भावना को सर्वोपरि रखा और देश सेवा के कार्यों में योगदान दिया। इसके साथ ही, भारतीय संस्कृति के मूल स्तंभ 'गौ-सेवा' के प्रति उनका गहरा अनुराग था। वे मुख्य रूप से एक सफल उद्यमी (Entrepreneur), दूरदर्शी स्वतंत्रता सेनानी और समर्पित समाजसेवी थे।