
साधना तिवारी
साधना तिवारी 15 वर्षों से मीडिया क्षेत्र में हैं। लगभग 9 वर्षों से अधिक समय से ZEE ग्रुप के साथ जुड़ी हुई ... Read More
Written By: Sadhna Tiwari | Updated : July 6, 2020 4:00 PM IST
A fall in the temperatures and a relatively low humidity may facilitate spread of COVID-19.
Mumbai Rains: मुंबई और पूरे महाराष्ट्र राज्य के साथ गुजरात में अगले कुछ दिनों तक बहुत अधिक बारिश के कारण हाई अलर्ट (High Alert) जारी किया गया है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि , इस दौरान इन स्थानों पर भारी बारिश और पानी जमा हो सकता है। इसके अलावा समुद्र में हाईटाइड लहरें भी उठेंगी। गौरतलब है कि, शुक्रवार से मुंबई में भारी बरसात हो रही है। शनिवार और रविवार को शहर में बहुत अधिक वर्षा हुई। मौसम विभाग द्वारा मिली जानकारी के मुताबिक, रविवार को कोलोबा में 13 सेमी बरसात रिकॉर्ड की गयी, तो वहीं सांताक्रूज़ में 21.01 सेमी वर्षा रिकॉर्ड की गयी। इतनी भारी बारिश से शहर में जलभराव की स्थिति बन गयी है। इस पानी के जमाव से ना केवल असुविधा होती है। बल्कि, कई तरह की बीमारियों का ख़तरा भी उत्पन्न होता है। (Mumbai Rains in hindi)
अक्सर, बरसात में अलग-अलग स्थानों पर पर विभिन्न प्रकार के अलर्ट जारी किए जाते हैं। इन समझने के लिए अलर्ट को अलग-अलग रंगों के नाम दिए जाते हैं, जैसे - रेड अलर्ट, ऑरेंज अलर्ट, ग्रीन अलर्ट या येलो अलर्ट। दरअसल, इनके पीछे स्थिति की गम्भीरता दर्शाना ही मौसम विभाग की कोशिश होती है। ताकि, उस हिसाब से प्लानिंग और डिजास्टर मैनेजमेंट किया जा सके। आइए जानते हैं बारिश को लेकर इन अलग-अलग रंगों के अलर्ट के क्या मायने क्या हैं?
यह काफी भारी बारिश की चेतावनी देता है। यानी जिस जगह के लिए ये अलर्ट जारी किया गया है, वहां काफी भारी बारिश की आशंका है।
इस तरह का अलर्ट बहुत अधिक बरसात और बाढ़ जैसी स्थितियों के पूर्वानुमान होने पर दिया जाता है। ऑरेंज अलर्ट का अर्थ है कि प्रशासन के दल पूरी तरह तैयार हो जाएं, क्योंकि, कभी भी उनके क्षेत्र में बरसात के कारण स्थिति गम्भीर हो सकती है।
जब, ग्रीन अलर्ट दिया जाए, तो इसका अर्थ है कि किसी विशेष सावधानी की जरूरत नहीं है। आमतौर पर बारिश के पूर्वानुमान के तहत ग्रीन अलर्ट हल्की या हल्की से मध्यम बरसात के लिए दिया जाता है।
मौसम विभाग द्वारा येलो अलर्ट जारी करने पर प्रशासन और नगर पालिका समेत संबंधित अधिकारियों को बरसात और उससे जुड़ी स्थितियों पर नजर रखनी होगी और समय-समय पर यह जानकारी प्रशासन को उपलब्ध भी करानी होगी।