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प्रेगनेंसी के दौरान कोविड अक्सर गर्भवती महिलाओं के लिए चिंता का सबब लेकर आता है क्योंकि उन्हें इस बात का डर लगा रहता है कि कहीं बच्चे पर तो इसका कोई खास असर नहीं पड़ने वाला है। हाल ही में कोविड-19 पर हुई कुछ स्टडी से एक खास बात सामने आई है। हालांकि इन अध्ययनों के निष्कर्षों का पता लगाने के लिए अभी और अध्ययन की जरूरत है। अध्ययन के मुताबिक, जिन गर्भवती महिलाओं ने mRNA वैक्सीन लगवाई हैं उनके बच्चों में कम से कम 6 महीने तक एंटी-बॉडी रहती हैं।
एक अध्ययन के मुताबिक, गर्भावस्था के दौरान कोविड से सुरक्षा के लिए वैक्सीन लगवाने वाली जिन माताओं ने बच्चों को जन्म दिया उन बच्चों के खून में वायरस से सुरक्षा के लिए 6 महीने तक एंटी-बॉडी रहती हैं। खासकर उन महिलाओं की तुलना में, जिन्होंने गर्भावस्था के दौरान इंफेक्शनसे बचने के लिए वैक्सीन नहीं लगवाई थीं।
जामा में प्रकाशित हुए इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने 20 से 32 सप्ताह में mRNA वैक्सीन की दोनों डोज लगवाने वाली महिलाओं से जन्में छह महीने के 28 बच्चों से डेटा प्राप्त किया, जिमें प्लेसेंटा के जरिए भ्रूण तक एंटी-बॉडीज पहुंची थी और इन बच्चों में ये सबसे ज्यादा थीं। इनमें से 12 बच्चों की माताएं उसी दौरान कोरोना से संक्रमित भी हुई थीं। शोधकर्ताओं ने इम्युनोग्लोबुलीन जी के होने का पता लगाया, जो हमारे रक्त में पाई जाने वाली सबसे आम एंटी-बॉडी हैं। ये एंटी-बॉडी वैक्सीन लगवाने वाली माताओं से जन्में बच्चों में 57 प्रतिशत थी लेकिन जिन माताओं ने वैक्सीन नहीं लगवाई और संक्रमण का शिकार हुई उनके बच्चों में ये एंटी-बॉडी सिर्फ 8 प्रतिशत थीं।
बोस्टन स्थित मैसाच्यूटेस जनरल हॉस्पिटल की डॉ. एंड्रिया एडलो का कहना है कि हालांकि अभी तक ये स्पष्ट नहीं है कि कैसे एंटी-बॉडी का उच्च स्तर इंफेक्शन से सुरक्षाप्रदान करने के लिए जरूरी है और तो और एंटी-बॉडी शरीर का सिर्फ रक्षा तंत्र नहीं है। बहुत से माता-पिता और डॉक्टर ये जानने के लिए इच्छुक हैं कि वैक्सीनेशन के बाद नवजात में मां द्वारा दी गई एंटी-बॉडी कितने दिनों तक रह सकती है और अब हमें उसका जवाब मिल गया है।
उन्होंने कहा कि हमें उम्मीद है कि ये निष्कर्ष गर्भवती महिलाओं को वैक्सीनेशन के लिए प्रेरित करेंगे।
एक नए डेटा से ये खुलासा हुआ है कि गर्भावस्था के अंतिम दिनो में कोविड-19 से संक्रमित होने पर महिलाओं को जन्म देते वक्त खतरा काफी बढ़ जाता है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, करीब 14, 104 महिलाओं ने वैक्सीन लगवाने से पहले बच्चों को जन्म दिया, जिसमें से 586 महिलाओं के डिलिवरी के दौरान या फिर जन्म देने से 6 सप्ताह पहले सामान्य और गंभीर कोविड हुआ था। इन महिलाओं को या तो सिजेरियन डिलिवरी करानी पड़ी या फिर इन्होंने समय से पहले बच्चे को जन्म दिया या फिर जन्म के समय इनकी मृत्यु हुई। इन सबके अलावा बहुत सी महिलाओं में हाई ब्लड प्रेशर, ब्लीडिंग और कोविड के अलावा दूसरे इंफेक्शन भी हुए।
जामा में प्रकाशित निष्कर्षों के मुताबिक, असंक्रमित महिलाओं में इस तरह की घटनाओं की कुल संख्या 9.2 फीसदी थी जबकि 26.1 फीसदी महिलाएं बच्चे को जन्म देने से पहले सामान्य और गंभीर कोविड का शिकार हुई थीं।