थर्ड वेव में देश के किन स्थानों पर कोरोना धरेगा गम्भीर रूप और कहां कम होंगे मामले, ICMR की रिपोर्ट में खुलासा

इसी बीच भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) की तरफ से एक नवीनतम विश्लेषण के आधार पर बयान दिया है कि, कोरोना की तीसरी लहर देश के उन जिलों में उतनी ग्म्भीर नहीं दिखायी देगी जहां, दूसरी लहर के दौरान संक्रमण के मामले बहुत अधिक देखे गए थे। (Third Wave Of Corona In India)

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Written By: Sadhna Tiwari | Updated : August 2, 2021 3:08 PM IST

Third Wave Of Corona In India: भारत में कोरोना वायरस महामारी की तीसरी लहर को लेकर अब हर अपडेट पर लोगों की नज़र बनी हुई है। गौरतलब है कि ऐसा कहा जा रहा है कि अगर देश में कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर आयी तो यह देश के लिए एक बड़ा स्वास्थ्य संकट साबित हो सकती है क्योंकि, थर्ड वेव अधिक संक्रामक भी हो सकती है। इसी बीच भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (Indian Council of Medical Research) की तरफ से एक नवीनतम विश्लेषण के आधार पर बयान दिया है कि, कोरोना की तीसरी लहर देश के उन जिलों में उतनी ग्म्भीर नहीं दिखायी देगी जहां, दूसरी लहर के दौरान संक्रमण के मामले बहुत अधिक देखे गए थे। (Third Wave Of Corona In India In Hindi)

राज्यों को बनानी होगी ऐसी रणनीति

कोविड से जुड़ी रिसर्च कर रहे सीनियर साइंटिस्ट और ICMR के महामारी विज्ञान और संचारी रोग विभाग के प्रमुख समीरन पांडा ने कहा है कि कोविड संक्रमण की पिछली दोनों लहरों के दौरान कोरोना से सबसे अधिक प्रभावित होने वाले महाराष्ट्र जैसे राज्यों को क्षेत्र और जनसंख्या-उपयुक्त प्रतिक्रिया संबंधी आंकड़ों के लिए जिला-स्तरीय विविधता को ध्यान में रखकर रणनीति बनानी चाहिए।

एक्सपर्ट की राय है कि राज्यों को लोकल आंकड़ों के आधार पर सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों की योजना बनाने के लिए जिला-स्तरीय डिस्परेट्री असेस्मेंट तैयार करने चाहिए, जिसमें संक्रमण के प्रसार के साथ-साथ क्षेत्र की जनसंख्या और उससे जुड़ी भिन्नताएं भी शामिल होनी चाहिए।

क्यों बढ़ेंगे कुछ विशेष क्षेत्रों में अधिक मामले ?

इस विश्लेषण के आधार पर समीरन पांडा (Dr. Samiran Panda) ने यह भी कहा जिन स्थानों या जिलों में कोविड-19 संक्रमण की दूसरी लहर का कम असर देखा गया था वहां थर्ड वेव का असर अधिक गम्भीर हो सकता है। इसीलिए राज्यों को जिला स्तरीय संक्रमण नियंत्रण (District Level Infection Control) से जुड़ी रणनीति बनानी चाहिए। एक्सपर्ट्स की राय यह है कि दूसरी लहर के दौरान जिन स्थानों पर संक्रमण की दर कम रही वहां के लोग अब कमज़ोर हो चले होंगे और तीसरी लहर के दौरान ये लोग संक्रमण की चपेट में आसानी से आ सकते हैं।

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